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Solan News: सरकारी लैब में किडनी टेस्ट बंद, निजी क्लीनिकों के लग रहे चक्कर
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सरकारी लैब में किडनी टेस्ट बंद,
निजी क्लीनिकों में जा रहे मरीज
क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशान, 800-1000 रुपये करने पड़ रहे खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल की सरकारी लैब में पिछले कुछ दिनों से किडनी से संबंधित (आरएफटी) टेस्ट बंद हो गए हैं, जिसके कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में मुफ्त होने वाले टेस्ट के लिए मरीजों को अब निजी प्रयोगशालाओं में भटकना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। किडनी के मरीजों को डायलिसिस करवाने से पहले रीनल फंक्शनल टेस्ट (आरएफटी) करवाना अनिवार्य होता है, जिससे किडनी की सही स्थिति पता चलती है। यह टेस्ट न होने से डायलिसिस के मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल के बाहर निजी प्रयोगशालाओं में आरएफटी टेस्ट करवाने पर मरीजों को 800 से 1,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। बाहर से टेस्ट करवाने के बाद मरीज डायलिसिस के लिए अपना नंबर लगवा रहे हैं, जिससे काफी समय भी व्यर्थ जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान है और यहां तीन मेडिसिन विशेषज्ञ मौजूद हैं, इसलिए आरएफटी टेस्ट की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। अस्पताल में किडनी टेस्ट न होने का कारण बायोकेमिस्ट्री मशीन में आई खराबी है। सरकारी लैब में पहले ये टेस्ट आसानी से होते थे, लेकिन मशीन में कुछ दिक्कत आने के बाद इसे ठीक करवाया गया। बताया जा रहा है कि मशीन ठीक होने के बाद हीट के कारण किडनी टेस्ट की रिपोर्ट सही नहीं आ रही थी, जिसके बाद टेस्ट बंद कर दिए गए।
कोट
क्षेत्रीय अस्पताल की सरकारी लैब में किडनी टेस्ट की रिपोर्ट सही नहीं आ रही थी, इस कारण टेस्ट कुछ दिनों से नहीं हो रहे हैं। आगामी दिनों में जैसे ही मशीन में टेस्ट रिपोर्ट सही आने लगेगी, वैसे ही टेस्ट सुविधा मरीजों को मिल जाएगी। क्रस्ना लैब में सभी टेस्ट हो रहे हैं।
डॉ. राकेश पंवार,चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल,सोलन
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निजी क्लीनिकों में जा रहे मरीज
क्षेत्रीय अस्पताल में मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशान, 800-1000 रुपये करने पड़ रहे खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल की सरकारी लैब में पिछले कुछ दिनों से किडनी से संबंधित (आरएफटी) टेस्ट बंद हो गए हैं, जिसके कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में मुफ्त होने वाले टेस्ट के लिए मरीजों को अब निजी प्रयोगशालाओं में भटकना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। किडनी के मरीजों को डायलिसिस करवाने से पहले रीनल फंक्शनल टेस्ट (आरएफटी) करवाना अनिवार्य होता है, जिससे किडनी की सही स्थिति पता चलती है। यह टेस्ट न होने से डायलिसिस के मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल के बाहर निजी प्रयोगशालाओं में आरएफटी टेस्ट करवाने पर मरीजों को 800 से 1,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। बाहर से टेस्ट करवाने के बाद मरीज डायलिसिस के लिए अपना नंबर लगवा रहे हैं, जिससे काफी समय भी व्यर्थ जा रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान है और यहां तीन मेडिसिन विशेषज्ञ मौजूद हैं, इसलिए आरएफटी टेस्ट की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। अस्पताल में किडनी टेस्ट न होने का कारण बायोकेमिस्ट्री मशीन में आई खराबी है। सरकारी लैब में पहले ये टेस्ट आसानी से होते थे, लेकिन मशीन में कुछ दिक्कत आने के बाद इसे ठीक करवाया गया। बताया जा रहा है कि मशीन ठीक होने के बाद हीट के कारण किडनी टेस्ट की रिपोर्ट सही नहीं आ रही थी, जिसके बाद टेस्ट बंद कर दिए गए।
कोट
क्षेत्रीय अस्पताल की सरकारी लैब में किडनी टेस्ट की रिपोर्ट सही नहीं आ रही थी, इस कारण टेस्ट कुछ दिनों से नहीं हो रहे हैं। आगामी दिनों में जैसे ही मशीन में टेस्ट रिपोर्ट सही आने लगेगी, वैसे ही टेस्ट सुविधा मरीजों को मिल जाएगी। क्रस्ना लैब में सभी टेस्ट हो रहे हैं।
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डॉ. राकेश पंवार,चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल,सोलन