{"_id":"60929f878ebc3ebf423bed54","slug":"industry-on-the-verge-of-being-shut-down-due-to-lack-of-oxygen-in-barotiwala-solan-news-sml36940823","type":"story","status":"publish","title_hn":"बरोटीवाला में आक्सीजन न मिलने से उद्योग बंद होने की कगार पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरोटीवाला में आक्सीजन न मिलने से उद्योग बंद होने की कगार पर
विज्ञापन
बरोटीवाला (सोलन)। बरोटीवाला स्थित कुंडलस लोह उद्योग के संचालकों ने उपायुक्त को पत्र लिख कर उन्हें पांच ऑक्सीजन सिलिंडर प्रति दिन के हिसाब से मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि आक्सीजन न मिलने के कारण उनका उद्योग बंद हो गया है।
कुंडलस उद्योग के संचालक राजीव सिंगला ने कहा कि उनका उद्योग सरिया तैयार करता है। उद्योग में पांच सौ वर्कर काम करते हैं। एक मई से सरकार ने अधिसूचना जारी कर आक्सीजन को अस्पताल के अलावा न देने की बात कही है। इससे उनका उद्योग समेत सभी लोह उद्योग प्रभावित हुए हैं। बिना काम से कामगार खाली बैठे हैं। इससे उन्हें मजबूरन होकर कामगारों की छंटनी करनी पड़ सकती है। वह प्रति माह 2.25 करोड़ बिजली का बिल जमा कराते हैं। अगर फैक्टरी नहीं भी चलती है तो उन्हें चालीस लाख रुपये रुपये तो बिल देना ही पड़ेगा।
उन्हें हर माह 20 लाख रुपये ब्याज के रूप में बैंकों में जमा कराना पड़ते हैं। उनकी कंपनी में 15 से 20 आक्सीजन सिलेंडर की जरूरत प्रति दिन पड़ती है। वर्तमान महामारी के समय देखते हुए काम चलाने के लिए और कामगारों को रोकने के लिए पांच आक्सीजन के सिलिंडर मुहैया कराए जाएं।
विज्ञापन
अन्यथा उनके कामगार पलायन कर जाएंगे और उनकी कंपनी बंद हो जाएगी। उन्होंने उपायुक्त से आग्रह किया कि कामगारों की रोजी-रोटी की समस्या को देखते हुए उन्हें कम से कम पांच सिलेंडर मुहैया कराए जाएं जिससे उनका काम भी चलता रहे।
विज्ञापन
कुंडलस उद्योग के संचालक राजीव सिंगला ने कहा कि उनका उद्योग सरिया तैयार करता है। उद्योग में पांच सौ वर्कर काम करते हैं। एक मई से सरकार ने अधिसूचना जारी कर आक्सीजन को अस्पताल के अलावा न देने की बात कही है। इससे उनका उद्योग समेत सभी लोह उद्योग प्रभावित हुए हैं। बिना काम से कामगार खाली बैठे हैं। इससे उन्हें मजबूरन होकर कामगारों की छंटनी करनी पड़ सकती है। वह प्रति माह 2.25 करोड़ बिजली का बिल जमा कराते हैं। अगर फैक्टरी नहीं भी चलती है तो उन्हें चालीस लाख रुपये रुपये तो बिल देना ही पड़ेगा।
विज्ञापन
उन्हें हर माह 20 लाख रुपये ब्याज के रूप में बैंकों में जमा कराना पड़ते हैं। उनकी कंपनी में 15 से 20 आक्सीजन सिलेंडर की जरूरत प्रति दिन पड़ती है। वर्तमान महामारी के समय देखते हुए काम चलाने के लिए और कामगारों को रोकने के लिए पांच आक्सीजन के सिलिंडर मुहैया कराए जाएं।
विज्ञापन
अन्यथा उनके कामगार पलायन कर जाएंगे और उनकी कंपनी बंद हो जाएगी। उन्होंने उपायुक्त से आग्रह किया कि कामगारों की रोजी-रोटी की समस्या को देखते हुए उन्हें कम से कम पांच सिलेंडर मुहैया कराए जाएं जिससे उनका काम भी चलता रहे।