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मांगें पूरी नहीं होने पर सोलन में गरजे परिवहन निगम के कर्मचारी

Fri, 10 Sep 2021 11:27 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 11:27 PM IST
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HRTC employees organised gate meeting in Solan over pending demands warns Himachal secretariat gherao
सोलन परिवहन डिपो में गेट मिटिंग करते कर्मचारी। संवाद - फोटो : SOLAN
सोलन। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के कर्मचारी एक बार फिर मांगें पूरी नहीं होने को लेकर मुखर हो गए हैं। इसे लेकर निगम कर्मचारियों ने संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले संघर्ष शुरू कर दिया है। इस समिति में सभी यूनियनों को जोड़ा है और मांगें पूरी करवाने के लिए एकजुट हो गए हैं। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने शुक्रवार को सोलन और परवाणू में भी गेट मीटिंग की। इस गेट मीटिंग से 14 सितंबर को मुख्यालय के घेराव की रणनीति बनाई। साथ ही अधिक से अधिक कर्मचारियों से इसमें भाग लेने का आग्रह किया है।
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सोलन में जेसीसी सदस्य और तकनीकी यूनियन के सचिव पूर्ण चंद शर्मा ने कर्मचारियों को जानकारी दी। कर्मचारी यूनियन 21 जुलाई से मांगों को मनाने का आग्रह कर रही है लेकिन अभी उनका हल नहीं निकला है। वहीं सदस्य पूर्ण चंद शर्मा ने कहा कि 21 जुलाई से कर्मचारी मांगों पर अड़े हुए हैं। पांच अगस्त को भी सरकार को 19 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा लेकिन कोई गौर नहीं किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि मांगों में जनवरी 2016 से 13 प्रतिशत आईआर, डीए जनवरी 2019 से चार फीसदी, पांच जुलाई 2016 से व छह जुलाई 2021 से कुल डीए 15 प्रतिशत, 32 महीनों का नाईट ओवर टाइम, पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, लीव इनकैशमेंट, जीपीएफ, मेडिकल रिंबर्समेंट आदि कर्मचारियों के लगभग 500 करोड़ के लंबित वित्तीय भुगतान देय हैं। इस कारण कर्मचारी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कर्मचारियों के वित्तीय बकाया राशि का भुगतान दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा भी कई मांगें ज्ञापन में लिखी गई हैं।
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पीस मील कर्मचारियों का भी रखा ध्यान
संयुक्त समन्वय समिति में पीसमील कर्मचारियों की मांगों को भी ध्यान में रखा गया है। इनकी मांगों को लेकर भी सरकार को बताया है और ज्ञापन में भी मांग रखी गई है। 1996 से वर्कशाप कर्मचारियों को भर्ती नहीं किया गया है। निगम में इनकी नौ कैटेगिरी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि वर्कशाप का कर्मचारी रीढ़ की तरह कार्य करता है। अगर यह काम करना बंद कर दें तो निगम को भारी दिक्कतों से गुजरना पड़ेगा।
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