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Solan News: जोहड़जी साहिब में ऐतिहासिक मेला 2 से 14 तक
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हिंदू-सिख आस्था का प्रमुख केंद्र, लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद
300 वर्षों से परंपरा जारी, देश-विदेश से पहुंचती है संगत
अलग-अलग तिथियों पर विभिन्न क्षेत्रों की संगत करेगी दर्शन
श्रद्धालुओं के लिए बस सेवा की विशेष व्यवस्था
राजेश गुप्ता
दाड़लाघाट (सोलन)। कसौली तहसील के पट्टा महलोग क्षेत्र में जोहड़जी साहिब पवित्र स्थल है। यहां हिंदू और सिख धर्म के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यह स्थान गुरु नानक देव जी से जुड़ी ऐतिहासिक कथा के कारण विशेष महत्व रखता है।
हर तीसरे वर्ष होने वाला प्रसिद्ध जोहड़जी मेला इस बार 2 से 14 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। इसमें हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तराखंड सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मान्यता के अनुसार 15वीं शताब्दी में यहां कौड़ा नामक एक राक्षस था। वह लोगों को जिंदा जलाकर मार देता था। उसी समय गुरु नानक देव जी के शिष्य बाला और मरदाना यहां पहुंचे। उन्हें राक्षस ने बंदी बना लिया। संकट के समय उन्होंने गुरु जी का स्मरण किया और तभी गुरु नानक देव जी वहां प्रकट हुए। उन्होंने अपनी कृपा से राक्षस का अंत कर लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। जिस स्थान पर यह घटना घटी, वहीं आज जोहड़जी साहिब श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
यहां की विशेष मान्यता यह भी है कि पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के बावजूद इस स्थान का जल कभी नहीं सूखता। करीब 300 वर्षों की परंपरा से जुड़ा यह मेला सिख और हिंदू समुदाय के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। मेले के पहले सप्ताह में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और नालागढ़ की संगत भाग लेती है, जबकि दूसरे सप्ताह में अर्की, महलोग, कुठाड़, बेजा, बघाट, कुनिहार और पटियाला रियासतों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। विदेशों जैसे कनाडा, अमेरिका और इंग्लैंड से भी श्रद्धालु इस मेले में शामिल होने आते हैं।
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यह स्थान बाबा गंगदास, बाबा खड़क सिंह और बाबा जवाहर सिंह की तपस्थली भी रहा है। मेला प्रबंधन के अनुसार 2 से 5 अप्रैल तक दोआबा की संगत, 6 से 7 अप्रैल नालागढ़ क्षेत्र, 8 से 9 अप्रैल अर्की-बाघल और 10 से 13 अप्रैल महलोग, कुठाड़ व अन्य पहाड़ी क्षेत्रों की संगत दर्शन के लिए पहुंचेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कालका, चंडीगढ़, रोपड़, नालागढ़ और बद्दी से सीधी बस सेवा की व्यवस्था भी की गई है।
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300 वर्षों से परंपरा जारी, देश-विदेश से पहुंचती है संगत
अलग-अलग तिथियों पर विभिन्न क्षेत्रों की संगत करेगी दर्शन
श्रद्धालुओं के लिए बस सेवा की विशेष व्यवस्था
राजेश गुप्ता
दाड़लाघाट (सोलन)। कसौली तहसील के पट्टा महलोग क्षेत्र में जोहड़जी साहिब पवित्र स्थल है। यहां हिंदू और सिख धर्म के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यह स्थान गुरु नानक देव जी से जुड़ी ऐतिहासिक कथा के कारण विशेष महत्व रखता है।
हर तीसरे वर्ष होने वाला प्रसिद्ध जोहड़जी मेला इस बार 2 से 14 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। इसमें हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तराखंड सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मान्यता के अनुसार 15वीं शताब्दी में यहां कौड़ा नामक एक राक्षस था। वह लोगों को जिंदा जलाकर मार देता था। उसी समय गुरु नानक देव जी के शिष्य बाला और मरदाना यहां पहुंचे। उन्हें राक्षस ने बंदी बना लिया। संकट के समय उन्होंने गुरु जी का स्मरण किया और तभी गुरु नानक देव जी वहां प्रकट हुए। उन्होंने अपनी कृपा से राक्षस का अंत कर लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। जिस स्थान पर यह घटना घटी, वहीं आज जोहड़जी साहिब श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
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यहां की विशेष मान्यता यह भी है कि पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के बावजूद इस स्थान का जल कभी नहीं सूखता। करीब 300 वर्षों की परंपरा से जुड़ा यह मेला सिख और हिंदू समुदाय के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। मेले के पहले सप्ताह में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और नालागढ़ की संगत भाग लेती है, जबकि दूसरे सप्ताह में अर्की, महलोग, कुठाड़, बेजा, बघाट, कुनिहार और पटियाला रियासतों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। विदेशों जैसे कनाडा, अमेरिका और इंग्लैंड से भी श्रद्धालु इस मेले में शामिल होने आते हैं।
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यह स्थान बाबा गंगदास, बाबा खड़क सिंह और बाबा जवाहर सिंह की तपस्थली भी रहा है। मेला प्रबंधन के अनुसार 2 से 5 अप्रैल तक दोआबा की संगत, 6 से 7 अप्रैल नालागढ़ क्षेत्र, 8 से 9 अप्रैल अर्की-बाघल और 10 से 13 अप्रैल महलोग, कुठाड़ व अन्य पहाड़ी क्षेत्रों की संगत दर्शन के लिए पहुंचेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कालका, चंडीगढ़, रोपड़, नालागढ़ और बद्दी से सीधी बस सेवा की व्यवस्था भी की गई है।