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Solan News: चार माह में तीसरी बाद टेंडर रद्द, बीपी की दवा के लिए भटक रहे मरीज
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स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र के क्षेत्रीय अस्पताल में पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन दवा खत्म
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र में पिछले चार माह से बीपी की दवाओं के लिए निजी दुकानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में पिछले चार माह में तीन बार बीपी की दो दवाओं के टेंडर रद्द हो गए हैं। इस कारण प्रशासन के पास मरीजों को देने के लिए जरूरी दवाएं तक नहीं हैं। ऐसे में उन्हें यह दवाएं निजी दवा दुकानों से ही लेनी पड़ रही हैं। वहीं कई बार तो निजी दवा दुकानों पर भी यह दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
वहीं कुछ माह पहले एम्लोडिफाइन के सैंपल फेल होने से बीपी की दवा अस्पताल नहीं पहुंच पा रही है। क्षेत्रीय अस्पताल में बीपी की एम्लोडिफाइन और टेल्मीसार्टन दवा का स्टॉक नहीं मिल पा रहा है। वहीं सरकारी अस्पताल में निशुल्क मिलने वाली एम्लोडिफाइन दवा तो निजी दवा दुकानों में भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरीजों को मजबूरन दवा को डॉक्टरों से कहकर बदलवाना पड़ रहा है। रोजाना अस्पताल में करीब 50 मरीजों को डॉक्टरों की ओर से बीपी की दवाएं लिखी जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में एजिथ्रोमाइसिन और पैरासिटामोल दवा का भी टोटा है। जुकाम, खांसी के समय मरीजों को सबसे अधिक लिखी जाने वाली इन दोनों दवाओं का स्टॉक भी अस्पताल में खत्म है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से अब दोबारा से दवाओं के लिए टेंडर जारी किया गया है।
कोट
अस्पताल में अभी बीपी की दो दवाएं खत्म हैं। इनके टेंडर रद्द होने की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। प्रशासन की ओर से दोबारा टेंडर भेजा गया है। प्रशासन कोशिश कर रहा है कि जल्द मरीजों को दवा मिल सके। - डॉ. राकेश पंवार, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र में पिछले चार माह से बीपी की दवाओं के लिए निजी दुकानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में पिछले चार माह में तीन बार बीपी की दो दवाओं के टेंडर रद्द हो गए हैं। इस कारण प्रशासन के पास मरीजों को देने के लिए जरूरी दवाएं तक नहीं हैं। ऐसे में उन्हें यह दवाएं निजी दवा दुकानों से ही लेनी पड़ रही हैं। वहीं कई बार तो निजी दवा दुकानों पर भी यह दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
वहीं कुछ माह पहले एम्लोडिफाइन के सैंपल फेल होने से बीपी की दवा अस्पताल नहीं पहुंच पा रही है। क्षेत्रीय अस्पताल में बीपी की एम्लोडिफाइन और टेल्मीसार्टन दवा का स्टॉक नहीं मिल पा रहा है। वहीं सरकारी अस्पताल में निशुल्क मिलने वाली एम्लोडिफाइन दवा तो निजी दवा दुकानों में भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मरीजों को मजबूरन दवा को डॉक्टरों से कहकर बदलवाना पड़ रहा है। रोजाना अस्पताल में करीब 50 मरीजों को डॉक्टरों की ओर से बीपी की दवाएं लिखी जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में एजिथ्रोमाइसिन और पैरासिटामोल दवा का भी टोटा है। जुकाम, खांसी के समय मरीजों को सबसे अधिक लिखी जाने वाली इन दोनों दवाओं का स्टॉक भी अस्पताल में खत्म है।
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अस्पताल प्रशासन की ओर से अब दोबारा से दवाओं के लिए टेंडर जारी किया गया है।
कोट
अस्पताल में अभी बीपी की दो दवाएं खत्म हैं। इनके टेंडर रद्द होने की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। प्रशासन की ओर से दोबारा टेंडर भेजा गया है। प्रशासन कोशिश कर रहा है कि जल्द मरीजों को दवा मिल सके। - डॉ. राकेश पंवार, चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल सोलन
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