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Solan News: नालागढ़ के प्राचीन महल के चार कमरे भूमि कटाव से गिरे
Fri, 11 Aug 2023 11:12 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 11 Aug 2023 11:12 PM IST
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नालागढ़ में भूमी कटाव के कारण क्षतिग्रस्त हुआ प्राचीन महल। संवाद
शुक्रवार सुबह 11:00 बजे से भूमि कटाव हुआ शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। शुक्रवार को नालागढ़ क्षेत्र में हुई तेज बारिश से नालागढ़ के हेरिटेज किला (फोर्ट रिजोर्ट) के चार कमरे भूमि कटाव के गिर गए। भूमि कटाव से 600 साल पुराने महल को खतरा पैदा हो गया है।
इस भूमि कटाव से महल को लाखों रुपये का नुकसान हो गया है। महल के पिछली ओर यह कटाव हुआ है। महल के चार कमरे इसकी चपेट में आ गए है। फोर्ट रिजोर्ट के प्रबंधक सुमीत सिंगल ने कहा कि सुबह हुई तेज बारिश के बाद 11:00 बजे से भूमि कटाव शुरू हुआ और देखते ही देखते चार कमरे ढह गए। कटाव के चलते कमरों में रखे सामान को भी नहीं निकाल पाए।
विदित रहे कि छह सौ साल पुराने इस भवन के अंतिम शासक राजा सुरेंद्र सिंह रहे। उनके बेटे विजेंद्र सिंह ने गद्दी नहीं संभाली लेकिन वह नालागढ़ के पांच बार विधायक रहे और एक बार मंत्री भी रहे। वर्तमान में यह महल विजेंद्र सिंह के अधीन है। वर्ष 1973 से 1993 तक यहां पर काॅलेज की कक्षाएं भी संचालित हुईं। लेकिन बाद में काॅलेज का अपना भवन बनने के बाद रिजोर्ट बना दिया है, जिसमें बाहर से आने वाले पर्यटक ठहरते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। शुक्रवार को नालागढ़ क्षेत्र में हुई तेज बारिश से नालागढ़ के हेरिटेज किला (फोर्ट रिजोर्ट) के चार कमरे भूमि कटाव के गिर गए। भूमि कटाव से 600 साल पुराने महल को खतरा पैदा हो गया है।
इस भूमि कटाव से महल को लाखों रुपये का नुकसान हो गया है। महल के पिछली ओर यह कटाव हुआ है। महल के चार कमरे इसकी चपेट में आ गए है। फोर्ट रिजोर्ट के प्रबंधक सुमीत सिंगल ने कहा कि सुबह हुई तेज बारिश के बाद 11:00 बजे से भूमि कटाव शुरू हुआ और देखते ही देखते चार कमरे ढह गए। कटाव के चलते कमरों में रखे सामान को भी नहीं निकाल पाए।
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विदित रहे कि छह सौ साल पुराने इस भवन के अंतिम शासक राजा सुरेंद्र सिंह रहे। उनके बेटे विजेंद्र सिंह ने गद्दी नहीं संभाली लेकिन वह नालागढ़ के पांच बार विधायक रहे और एक बार मंत्री भी रहे। वर्तमान में यह महल विजेंद्र सिंह के अधीन है। वर्ष 1973 से 1993 तक यहां पर काॅलेज की कक्षाएं भी संचालित हुईं। लेकिन बाद में काॅलेज का अपना भवन बनने के बाद रिजोर्ट बना दिया है, जिसमें बाहर से आने वाले पर्यटक ठहरते हैं।
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