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श्रीराम लीला : श्रवण वध और विश्व मोहिनी स्वयंवर का मंचन
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धर्मपुर में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
रामलीला क्लब और हिंदू जागरण धर्मपुर में करवा रहा रामलीला
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नवरात्र के आगाज के साथ ही वीरवार को श्रीराम लीला का मंचन शुरू हो गया। रामलीला में श्रवण वध और विश्व मोहिनी स्वयंवर का मंचन किया गया।
रामलीला क्लब और हिंदू जागरण धर्मपुर की ओर से मंच पूजन के बाद रामलीला का आगाज किया गया। कलाकारों ने गणेश वंदना के बाद प्रभु राम की लीला का वर्णन शुरू किया। रात 8:00 बजे मंच पूजन किया गया।
लीला मंचन में सर्वप्रथम श्रवण वध का दृश्य दिखाया गया। दृश्य में दिखाया कि महाराज दशरथ शिकार के लिए जंगल में निकले थे और शिकार के धोखे से श्रवण का वध हो गया। पुत्र विरह में श्रवण के माता-पिता ने महाराज दशरथ को श्राप दिया कि जिस तरह पुत्र वियोग में जीवन त्याग रहे हैं, उसी तरह वह भी पुत्र वियोग में जीवन व्यतीत करेंगे। इसके बाद नारद का गंधशील के दरबार में नारद का पहुंचना। साथ ही नारद का विष्णु के पास वर्ण मांगना तत्पश्चात विश्व मोहिनी स्वयंवर दिखाया गया। रामलीला के दौरान अधिक संख्या में लोगों ने शिरकत की। इसमें डायरेक्टर की भूमिका प्रेम शर्मा ने की। जबकि रोशन, सोहन, दीपक, कृष्णदत्त, अरविंद, देवांश, शुभम कलाकार रहे।
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नारद जी ने भगवान विष्णु को दिया श्राप
कुनिहार (सोलन)। रामलीला जन कल्याण समिति ने गणेश पूजन और आरती के साथ मंचन शुरू किया। प्रथम दिन कलाकारों की ओर से नारद मुनि की लीला का मंचन दिखाया गया। इस में इंद्र देवता का सिंहासन डोलने लगा कारण पता लगाने के लिए कामदेव को भेजा गया। कामदेव ने देखा कि नारद जी तप कर रहे हैं इस कारण सिहांसन डोलने लगा है। उस तप को भंग करने के लिए इंद्रदेव ने कामदेव को भेजा पर नारद के तक को कामदेव भंग नहीं कर पाए। तब कामदेव ने अप्सराओं को नारद मुनि की तपस्या भंग करने के लिए बुलाया पर वह भी नारद की तपस्या को भंग नहीं कर पाए।
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नारद का अहंकार तोड़ने के लिए विष्णु भगवान ने अपनी माया से एक राजा की सुंदर कन्या के विवाह की योजना बनाई नारद उस कन्या को देखते ही मोहित हो गए किंतु भगवान ने उन्हें वानर का रूप दे दिया। इस गुस्से के कारण विष्णु को श्राप दिया कि वे एक दिन पृथ्वी लोक पर आप भी स्त्री के लिए इसी तरह से तड़पेंगे। वहीं इस मौके पर श्रीराम जन कल्याण समिति के प्रधान रितेश जोशी, अमन अत्री, गौतम, जय समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। नवरात्र के आगाज के साथ ही वीरवार को श्रीराम लीला का मंचन शुरू हो गया। रामलीला में श्रवण वध और विश्व मोहिनी स्वयंवर का मंचन किया गया।
रामलीला क्लब और हिंदू जागरण धर्मपुर की ओर से मंच पूजन के बाद रामलीला का आगाज किया गया। कलाकारों ने गणेश वंदना के बाद प्रभु राम की लीला का वर्णन शुरू किया। रात 8:00 बजे मंच पूजन किया गया।
लीला मंचन में सर्वप्रथम श्रवण वध का दृश्य दिखाया गया। दृश्य में दिखाया कि महाराज दशरथ शिकार के लिए जंगल में निकले थे और शिकार के धोखे से श्रवण का वध हो गया। पुत्र विरह में श्रवण के माता-पिता ने महाराज दशरथ को श्राप दिया कि जिस तरह पुत्र वियोग में जीवन त्याग रहे हैं, उसी तरह वह भी पुत्र वियोग में जीवन व्यतीत करेंगे। इसके बाद नारद का गंधशील के दरबार में नारद का पहुंचना। साथ ही नारद का विष्णु के पास वर्ण मांगना तत्पश्चात विश्व मोहिनी स्वयंवर दिखाया गया। रामलीला के दौरान अधिक संख्या में लोगों ने शिरकत की। इसमें डायरेक्टर की भूमिका प्रेम शर्मा ने की। जबकि रोशन, सोहन, दीपक, कृष्णदत्त, अरविंद, देवांश, शुभम कलाकार रहे।
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नारद जी ने भगवान विष्णु को दिया श्राप
कुनिहार (सोलन)। रामलीला जन कल्याण समिति ने गणेश पूजन और आरती के साथ मंचन शुरू किया। प्रथम दिन कलाकारों की ओर से नारद मुनि की लीला का मंचन दिखाया गया। इस में इंद्र देवता का सिंहासन डोलने लगा कारण पता लगाने के लिए कामदेव को भेजा गया। कामदेव ने देखा कि नारद जी तप कर रहे हैं इस कारण सिहांसन डोलने लगा है। उस तप को भंग करने के लिए इंद्रदेव ने कामदेव को भेजा पर नारद के तक को कामदेव भंग नहीं कर पाए। तब कामदेव ने अप्सराओं को नारद मुनि की तपस्या भंग करने के लिए बुलाया पर वह भी नारद की तपस्या को भंग नहीं कर पाए।
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नारद का अहंकार तोड़ने के लिए विष्णु भगवान ने अपनी माया से एक राजा की सुंदर कन्या के विवाह की योजना बनाई नारद उस कन्या को देखते ही मोहित हो गए किंतु भगवान ने उन्हें वानर का रूप दे दिया। इस गुस्से के कारण विष्णु को श्राप दिया कि वे एक दिन पृथ्वी लोक पर आप भी स्त्री के लिए इसी तरह से तड़पेंगे। वहीं इस मौके पर श्रीराम जन कल्याण समिति के प्रधान रितेश जोशी, अमन अत्री, गौतम, जय समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

धर्मपुर में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद