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Solan News: शबद-कीर्तन से संगत को किया निहाल
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ढांग उपरली में शहीदी दिवस को समर्पित गुरमत समागम में उपस्थित संगत स्रोत; आयोजक
ढांग उपरली में गुरमत समागम का आयोजन
गुरु अर्जन देव जी की शहादत की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। ढांग उपरली स्थित अकाल बुंगा साहिब गुरुद्वारा साहिब में गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस को लेकर गुरमत समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर शबद-कीर्तन कर संगत को निहाल किया गया। शुक्रवार को शुरू किए गए अखंड पाठ का भोग रविवार को डाला गया। इस अवसर पर दीवान सजाया गया। गुरुनानक पब्लिक स्कूल के बच्चों ने गुरु की बाणी का बखान कर उपस्थित संगत को निहाल किया।
भाई जगदीप सिंह गुरदासपुर ने संगत को गुरु अर्जन देव जी की शहादत के बारे में जानकारी दी। कीर्तनीय भाई हरदीप सिंह फतेहगढ़ साहिब ने रहम तेरी सुख पाया सदा नानक की अरदास, जपयों जिन अर्जन देव गुरु, बोलो जी वाहेगुरु आदि शब्दों का गायन कर संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथावाचक भाई सुखविंद्र सिंह राटोल ने गुरु अर्जन देव जी का इतिहास सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि गुरु जी ने धर्म का सम्मान करते हुए समय के बादशाह की सभी बातें मानने से इनकार कर दिया और शहीद होना उचित समझा। इस मौके पर अटूट लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने गुरु का प्रसाद ग्रहण किया।
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गुरु अर्जन देव जी की शहादत की दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। ढांग उपरली स्थित अकाल बुंगा साहिब गुरुद्वारा साहिब में गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस को लेकर गुरमत समागम का आयोजन किया गया। इस मौके पर शबद-कीर्तन कर संगत को निहाल किया गया। शुक्रवार को शुरू किए गए अखंड पाठ का भोग रविवार को डाला गया। इस अवसर पर दीवान सजाया गया। गुरुनानक पब्लिक स्कूल के बच्चों ने गुरु की बाणी का बखान कर उपस्थित संगत को निहाल किया।
भाई जगदीप सिंह गुरदासपुर ने संगत को गुरु अर्जन देव जी की शहादत के बारे में जानकारी दी। कीर्तनीय भाई हरदीप सिंह फतेहगढ़ साहिब ने रहम तेरी सुख पाया सदा नानक की अरदास, जपयों जिन अर्जन देव गुरु, बोलो जी वाहेगुरु आदि शब्दों का गायन कर संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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कथावाचक भाई सुखविंद्र सिंह राटोल ने गुरु अर्जन देव जी का इतिहास सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि गुरु जी ने धर्म का सम्मान करते हुए समय के बादशाह की सभी बातें मानने से इनकार कर दिया और शहीद होना उचित समझा। इस मौके पर अटूट लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने गुरु का प्रसाद ग्रहण किया।
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