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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Emphasis on reducing the use of pesticides and natural farming

Solan News: कीटनाशकों का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती पर जोर

Sun, 15 Sep 2024 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 15 Sep 2024 11:55 PM IST
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नौणी विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का हुआ समापन
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रोजगार, जलवायु परिवर्तन और स्थिरता, प्राकृतिक खेती के प्रभाव पर चर्चा

संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सतत टिकाऊ खाद्य प्रणालियों को को सक्षम बनाने के लिए प्राकृतिक खेती विषय पर नौणी विवि द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन कई सिफारिशों के साथ संपन्न हुआ। कीटनाशकों का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय कृषि, खाद्य और पर्यावरण अनुसंधान संस्थान और भारतीय पारिस्थितिकी सोसायटी के हिमाचल चैप्टर के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारत, फ्रांस, सर्बिया, यूके, मॉरीशस, उज्बेकिस्तान और नेपाल के वैज्ञानिक, किसान और उद्योग के पेशेवर प्राकृतिक कृषि जैसे पर्यावरण हितैषी कृषि पद्धतियों पर विचार विमर्श करने के लिए एक मंच पर आए।
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उत्तराखंड बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भडसार के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल समापन सत्र में मुख्यातिथि रहे। उन्होंने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और मिट्टी, वायु और पानी के स्वास्थ्य को बढ़ाने में प्राकृतिक खेती के लाभों को रेखांकित किया, जो बदले में उपभोक्ता स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। फ्रांस की लिसिस लैब की उप निदेशक प्रो. एलीसन लोकोंटो ने एक्रोपिक्स परियोजना से अंतर्दृष्टि साझा की और आशा व्यक्त की कि भारत सहित विभिन्न देशों की स्थायी प्रथाओं को विश्व स्तर पर दोहराया जा सकता है।
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आईसीएआर के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने जलवायु परिवर्तन को कम करने में प्राकृतिक खेती की क्षमता पर जोर दिया और देश के 732 कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आईसीएआर की पहल के बारे में विस्तार से बताया। सम्मेलन का समापन खाद्य जीविका और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए प्राकृतिक खेती में नवाचारों को आगे बढ़ाने पर एक पैनल चर्चा के साथ हुआ। फ्रांस के वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. ब्रूनो डोरिन ने आंध्र प्रदेश के भविष्य के परिदृश्यों पर अंतर्दृष्टि प्रस्तुत की।

सिफारिशों में भोजन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार करने, 5 मिलियन किसानों के लिए रोजगार पैदा करने और बेरोजगारी को 30 प्रतिशत से 7 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्राकृतिक खेती की क्षमता के बारे में बात की गई। जतन ट्रस्ट के डॉ. कपिल शाह ने कृषि इनपुट के आधार पर उपज को मापने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि सेंट औबिन ग्रुप, मॉरीशस के डॉ. अलीजी गुइम्ब्यू ने मॉरीशस में कीटनाशकों के उपयोग को कम करने के लिए शैक्षिक पहल का आह्वान किया।
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