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Solan News: देहदान के लिए आईजीएमसी पहुंचे सुरेंद्र, सिस्टम ने कहा-इतनी दूर से नहीं ला सकते डेड बाॅडी
Thu, 23 Jul 2026 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 23 Jul 2026 11:58 PM IST
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-एक्सक्लूसिव-
78 साल की उम्र में दो दिन तक आईजीएमसी की कई मंजिल चढ़े, विभागों के लगाए चक्कर
देहदान के अभियानों पर उठे सवाल
सोमदत्त शर्मा
सोलन। मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षुओं को मानव शरीर रचना के अध्ययन और नई सर्जरियों के अभ्यास के लिए देह की आवश्यकता होती है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज लोगों को देहदान के लिए प्रेरित करने के लिए कैंप लगाते हैं। मगर सुबाथू के 78 वर्षीय सुरेंद्र सिंह देहदान के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में दो दिन भटकते रहे। फिर उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि इतनी दूर से डेड बॉडी को नहीं लाया जा सकता है।
आईजीएमसी में कहा गया कि सुबाथू से देह लाना मुश्किल है और उनके पास कोई इंतजाम नहीं है। बुजुर्ग निराश होकर लौट आए, जिससे देहदान के अभियानों पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुरेंद्र सिंह 3 जुलाई को आईजीएमसी शिमला गए थे और पर्ची बनवाते समय देहदान की इच्छा बताई थी। उनका दावा है कि उन्हें एक विभाग से दूसरे और पहली से 10वीं मंजिल तक भेजा गया। पूरा दिन खराब होने के बाद उन्हें अगले दिन आने को कहा गया। 4 जुलाई को भी उन्हें दिनभर विभागों में भेजा गया। दूसरे दिन पूरी जानकारी लेने के बाद उन्हें सुबाथू दूर होने का हवाला देकर मना कर दिया गया। बुजुर्ग का कहना है कि सुबाथू में दो हेलिपैड हैं और कई जगह से पहुंचा जा सकता है।
देहदान की वजह
सुरेंद्र सिंह की दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी से बात की थी और उन्होंने भी देहदान के लिए सहमति दी थी। बुजुर्ग मरने के बाद बेटियों और दामाद पर कोई बोझ नहीं डालना चाहते हैं। यह कदम चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में अमूल्य योगदान देता है।
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कोट
यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि किसी ने बुजुर्ग को इन्कार किया है तो इसकी जांच की जाएगी। संबंधित स्टाफ या चिकित्सक से जवाब मांगा जाएगा। आईजीएमसी में कई लोग देहदान करते हैं और किसी को इन्कार नहीं किया जाता है। - अंजु प्रताप, विभागाध्यक्ष एनाटॉमी, आईजीएमसी शिमला
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78 साल की उम्र में दो दिन तक आईजीएमसी की कई मंजिल चढ़े, विभागों के लगाए चक्कर
देहदान के अभियानों पर उठे सवाल
सोमदत्त शर्मा
सोलन। मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षुओं को मानव शरीर रचना के अध्ययन और नई सर्जरियों के अभ्यास के लिए देह की आवश्यकता होती है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज लोगों को देहदान के लिए प्रेरित करने के लिए कैंप लगाते हैं। मगर सुबाथू के 78 वर्षीय सुरेंद्र सिंह देहदान के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में दो दिन भटकते रहे। फिर उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि इतनी दूर से डेड बॉडी को नहीं लाया जा सकता है।
आईजीएमसी में कहा गया कि सुबाथू से देह लाना मुश्किल है और उनके पास कोई इंतजाम नहीं है। बुजुर्ग निराश होकर लौट आए, जिससे देहदान के अभियानों पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुरेंद्र सिंह 3 जुलाई को आईजीएमसी शिमला गए थे और पर्ची बनवाते समय देहदान की इच्छा बताई थी। उनका दावा है कि उन्हें एक विभाग से दूसरे और पहली से 10वीं मंजिल तक भेजा गया। पूरा दिन खराब होने के बाद उन्हें अगले दिन आने को कहा गया। 4 जुलाई को भी उन्हें दिनभर विभागों में भेजा गया। दूसरे दिन पूरी जानकारी लेने के बाद उन्हें सुबाथू दूर होने का हवाला देकर मना कर दिया गया। बुजुर्ग का कहना है कि सुबाथू में दो हेलिपैड हैं और कई जगह से पहुंचा जा सकता है।
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देहदान की वजह
सुरेंद्र सिंह की दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी से बात की थी और उन्होंने भी देहदान के लिए सहमति दी थी। बुजुर्ग मरने के बाद बेटियों और दामाद पर कोई बोझ नहीं डालना चाहते हैं। यह कदम चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में अमूल्य योगदान देता है।
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यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि किसी ने बुजुर्ग को इन्कार किया है तो इसकी जांच की जाएगी। संबंधित स्टाफ या चिकित्सक से जवाब मांगा जाएगा। आईजीएमसी में कई लोग देहदान करते हैं और किसी को इन्कार नहीं किया जाता है। - अंजु प्रताप, विभागाध्यक्ष एनाटॉमी, आईजीएमसी शिमला