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Solan News: मित्र कीट कम होने से बीबीएन की उपजाऊ जमीन बन रही बंजर

Wed, 06 Aug 2025 01:24 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Aug 2025 01:24 AM IST
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ओमपाल सिंह
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बद्दी (सोलन)। उपजाऊ जमीन से मित्र कीट कम होने से बीबीएन में उपजाऊ जमीन बंजर हो रही है। पिछले कुछ सालों से ट्रैक्टर में ट्रैक्टर में रोटावेटर का प्रयोग इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। ऊपर से कीटनाशक दवाओं को छिड़काव, खरपतवार मारने की दवाओं मित्र कीटों के जमीन से समाप्त कर रही है। यही कारण है कि बीबीएन में फसलों में बहुत अधिक रोग लग रहे हैं। हालात यह है कि इस पर कीटनाशक दवा का छिड़काव भी बे असर हो गया है। बीबीएन में धान व मक्की की फसल रोग की चपेट में आ गई है। अब किसान अपने खेतों में ट्रैक्टर से रुटर बीटर लगाकर खेत तैयार करते है। यह रुटर बीटर पांच से छह इंच से ज्यादा खुदाई नहीं करता है और जमीन की ऊपर की सतह को काफी मुलायम बना देता है। जबकि छह इंच से नीचे जमीन सख्त रहती है। ऐसे में ऊपरी सतह में रहने वाली मित्र कीट नष्ट हो जाता है और जमीन की उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे कम हो गई है। ऊपर से किसान फसल में लगने वाले रोगों के लिए कीटनाशक दवाओं को छिड़काव कर रहे है। यही नहीं फसल में लगने वाले खतपतवार को भी मारने के लिए दवाओं को इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जमीन से मित्र कीट जैसे केंचुए व अन्य धीरे-धीरे समाप्त हो गई है। अब जमीन की उर्वरता कम हो गई है। किसान रसायानिक खाद डाल कर फसल ले रहे हैं। जिससे बीमारियां भी फैल रही है। खेड़ा के प्रगतिशील किसान अवतार सिंह ने बताया कि पिछले कुछ सालों से बीबीएन में गेहूं की फसल में कनाल बंट, पीला रतुआ, काला दाना, धान में पत्ता लपेट, वायरस और अब सुंडी रोग भी धान में लगना शुरू हो गया है। किसान रासायनिक खाद का अत्याधिक प्रयोग कर रहे हैं, इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति समाप्त हो गई है। जमीन में मित्र मर रहे हैं और धीरे धीरे जमीन बंजर हो रही है। अमर सिंह ठाकुर ने बताया कि बीबीएन में मक्की में सुंडी रोग व धान में वायरस रोग की चपेट में आ गई है। अब इस पर कीट नाशक भी बेअसर हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र कंडाघाट की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सीमा ठाकुर ने बताया कि प्राकृतिक खेत में मित्र कीटों को बहुत महत्व है। यह कीट हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने, परागण में मदद करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होते हैं। मित्र कीटों के संरक्षण के लिए जैविक खाद का प्रयोग करने, खेती के साथ फूलों के पौधे लगाए, खरपतवार को नियंत्रित करें रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। संवाद
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