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Solan News: करोड़ों खर्च, फिर भी खेत प्यासे, दून में 11 सिंचाई योजनाएं छह साल बाद भी अधर में
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अभी तक सात योजनाएं हुई चालू, 9 में 90 फीसदी काम पूरा,ग्रामीणों के विवाद के चलते नहीं शुरू हो पाया काम
दून की 316 हेक्टेयर जमीन होनी थी इन योजनाओं से सिंचाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। दून विधानसभा क्षेत्र के मैदानी इलाकों में किसानों की किस्मत बदलने के लिए शुरू की गई 18 उठाऊ सिंचाई योजनाएं सफेद हाथी साबित हो रही हैं। नाबार्ड के तहत करीब 15.77 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत इन योजनाओं में से छह साल बाद भी केवल 7 ही शुरू हो पाई हैं। विभागीय सुस्ती और ग्रामीणों के आपसी विवाद के चलते 11 योजनाएं अभी भी बंद हैं, जिससे 316 हेक्टेयर जमीन को सिंचित करने का लक्ष्य अधूरा है। इन 18 योजनाओं को नाबार्ड ने वर्ष 2019 में मंजूरी दी थी। हालांकि, सरकारी फाइलों में काम की रफ्तार इतनी धीमी रही कि 2022 में काम अवाॅर्ड हुआ और धरातल पर काम 2023 में शुरू हो पाया। वर्तमान में स्थिति यह है कि मात्र 115 हेक्टेयर जमीन को ही पानी मिल पा रहा है, जबकि बड़ा क्षेत्र अभी भी बारिश पर निर्भर है। योजनाओं में से दो (लोदीमाजरा और निचला भूड्ड) में ग्रामीणों के आपसी विवाद के कारण काम पूरी तरह ठप रहा। विभाग का दावा है कि लोदीमाजरा में अब सहमति बन गई है और काम शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन निचला भूड्ड में पेंच अभी भी फंसा हुआ है। इन गांवों को मिलना था लाभ योजना के तहत लोधी माजरा, दामोवाल, कुंजाहल, सतीवाला, सूरजपुर, मधाला, भटोलीकलां, धर्मपुर, मलकू माजरा, भूपपुर, भूड्ड निचला, खरुणी झंडेवाल, गुल्लरवाला, कडुवाना, चक्का, ठेडा, नरंगपुर और कोंडी गांवों के खेतों को पानी दिया जाना था।
कोट
18 में से 7 योजनाओं को चालू कर दिया गया है। शेष 11 में से 9 योजनाओं का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। दो योजनाओं में विवाद था, जिसमें से लोदीमाजरा का समाधान कर काम शुरू करवा दिया गया है। निचला भूड्ड योजना को भी जल्द चलाने का प्रयास किया जा रहा है।
- राहुल अबरोल, अधिशासी अभियंता, जलशक्ति विभाग
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दून की 316 हेक्टेयर जमीन होनी थी इन योजनाओं से सिंचाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। दून विधानसभा क्षेत्र के मैदानी इलाकों में किसानों की किस्मत बदलने के लिए शुरू की गई 18 उठाऊ सिंचाई योजनाएं सफेद हाथी साबित हो रही हैं। नाबार्ड के तहत करीब 15.77 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत इन योजनाओं में से छह साल बाद भी केवल 7 ही शुरू हो पाई हैं। विभागीय सुस्ती और ग्रामीणों के आपसी विवाद के चलते 11 योजनाएं अभी भी बंद हैं, जिससे 316 हेक्टेयर जमीन को सिंचित करने का लक्ष्य अधूरा है। इन 18 योजनाओं को नाबार्ड ने वर्ष 2019 में मंजूरी दी थी। हालांकि, सरकारी फाइलों में काम की रफ्तार इतनी धीमी रही कि 2022 में काम अवाॅर्ड हुआ और धरातल पर काम 2023 में शुरू हो पाया। वर्तमान में स्थिति यह है कि मात्र 115 हेक्टेयर जमीन को ही पानी मिल पा रहा है, जबकि बड़ा क्षेत्र अभी भी बारिश पर निर्भर है। योजनाओं में से दो (लोदीमाजरा और निचला भूड्ड) में ग्रामीणों के आपसी विवाद के कारण काम पूरी तरह ठप रहा। विभाग का दावा है कि लोदीमाजरा में अब सहमति बन गई है और काम शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन निचला भूड्ड में पेंच अभी भी फंसा हुआ है। इन गांवों को मिलना था लाभ योजना के तहत लोधी माजरा, दामोवाल, कुंजाहल, सतीवाला, सूरजपुर, मधाला, भटोलीकलां, धर्मपुर, मलकू माजरा, भूपपुर, भूड्ड निचला, खरुणी झंडेवाल, गुल्लरवाला, कडुवाना, चक्का, ठेडा, नरंगपुर और कोंडी गांवों के खेतों को पानी दिया जाना था।
कोट
18 में से 7 योजनाओं को चालू कर दिया गया है। शेष 11 में से 9 योजनाओं का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। दो योजनाओं में विवाद था, जिसमें से लोदीमाजरा का समाधान कर काम शुरू करवा दिया गया है। निचला भूड्ड योजना को भी जल्द चलाने का प्रयास किया जा रहा है।
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- राहुल अबरोल, अधिशासी अभियंता, जलशक्ति विभाग