{"_id":"5b06ea6f4f1c1b9c6e8b462f","slug":"101527179887-solan-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"काठा में सिलेंडर के धमाके से भड़की चिंगारी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
काठा में सिलेंडर के धमाके से भड़की चिंगारी
Updated Thu, 24 May 2018 10:30 PM IST
विज्ञापन
बरोटीवाला (सोलन)। दोपहर का खाना पक रहा था। सभी लोग लंच की तैयारी में थे। अचानक ढाई बजे तेज धमाके के साथ एक झुग्गी की छत उखड़ गई। आग तिरपाल में भड़क गई। इससे पहले की आसपास मौजूद अन्य झुग्गी में बैठे मजदूर और कामगार कुछ समझ पाते एक के बाद एक झुग्गी आग की चपेट में आती गई। बद्दी अग्निकांड की प्रत्यक्षदर्शियों ने कुछ ऐसी ही तस्वीर बयां की है। कई बीघा में फैले खुले मैदान में 45 झुग्गियां कुछ ही देर में राख हो गईं। इनमें से ज्यादातर प्रभावित परिवार उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।
आग की लपटों ने जब बरेली निवासी राजू की झुग्गी को घेरा तो उसके तीन बेटे और दो भाई अंदर ही थे। राजू निवासी गांव ईनायतपुर डाकघर फरीदपुर, तहसील फरीदपुर जिला बरेली उत्तर प्रदेश ड्यूटी पर था। राजू के भाईयों धीर सिंह और शिवराज ने उसके दो बेटों अरुण तथा अनु को तो तुरंत निकाल लिया। लेकिन नौ वर्षीय सूरज आग से बाहर नहीं निकल सका। आग की चपेट में आकर सूरज ने वहीं दम तोड़ दिया। फायर विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बद्दी में रोजगार की तलाश में आए इन गरीब लोगों ने एक स्थानीय व्यक्ति से जमीन किराये पर लेकर झुग्गियां खड़ी की थीं। एक साथ कई परिवार इनमें राजी-खुशी रह रहे थे। लेकिन वीरवार को सबकुछ उजड़ गया। सिलेंडर के खौफ से कोई भी आग के दौरान झुग्गी में रखे सामान को निकालने की हिम्मत नहीं कर पाया।
अग्निकांड में नेमपाल, विनोद, रामवीर, संतोष, कृपाल, खान सहाय, रामदास, राकेश, मोहन लाल, राकेश, गुड्डू, छोटे लाल, राजू, गुलाब सिंह, रवि गौतम, सत्यवीर, बबलू समेत अन्य की झुग्गियां जल गईं। यह झुगियां लोकल निवासी दीवान चंद की जमीन में बनाई गई थी।
विज्ञापन
फोरेंसिक जांच को भेजा शव : डीएसपी
डीएसपी खजाना राम ने बताया कि शव को फोरेंसिक जांच के लिए शिमला भेज दिया है। उन्होंने बताया कि झुग्गियों के मालिक की भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूछताछ के बाद मालिक पर मामला दर्ज किया जा सकता है।
और दिनदहाड़े डूब
गया राजू का सूरज
अमर उजाला ब्यूरो
बरोटीवाला (सोलन)। हजारों मील दूर से कमाने की आस में पहुंचे गरीब परिवार वीरवार को पूरी तरह उजड़ गए हैं। तिल-तिल कर जोड़ी कमाई आग में राख हो गई। राजू का नौ साल का बेटा सूरज आग में जिंदा जल गया। आग ठंडी होते ही बिखरे सपनों को जोड़ने की कोशिश दोबारा शुरू हुई। लेकिन चिंगारियों से जमीन पर राख के अलावा कुछ भी बाकी नहीं बचा था। हालात से पीड़ित परिवारों ने सिर्फ झुग्गियां ही नहीं खोई हैं बल्कि वो सबकुछ गवां दिया है जिसके लिए वे बददी तक चले आए थे।
राजू खुद कंपनी में काम करता है और सूरज को बड़ा आदमी बनते देखना चाहता था। लेकिन अब राजू का सूरज हमेशा के लिए ढल चुका है। यह मंजर उन बाकी लोगों का भी है जिनकी झोंपड़ी आग की भेंट चढ़ी हैं। आग ठंडी होने के बाद भी वीरवार को काठा में मातम पसरा रहा। बाहरी राज्यों से कमाने की आस में आए इन परिवारों को अब दो वक्त की रोटी के साथ ही ठिकाने का भी इंतजाम एक बड़ी चुनौती बन गया है।
विज्ञापन
आग की लपटों ने जब बरेली निवासी राजू की झुग्गी को घेरा तो उसके तीन बेटे और दो भाई अंदर ही थे। राजू निवासी गांव ईनायतपुर डाकघर फरीदपुर, तहसील फरीदपुर जिला बरेली उत्तर प्रदेश ड्यूटी पर था। राजू के भाईयों धीर सिंह और शिवराज ने उसके दो बेटों अरुण तथा अनु को तो तुरंत निकाल लिया। लेकिन नौ वर्षीय सूरज आग से बाहर नहीं निकल सका। आग की चपेट में आकर सूरज ने वहीं दम तोड़ दिया। फायर विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बद्दी में रोजगार की तलाश में आए इन गरीब लोगों ने एक स्थानीय व्यक्ति से जमीन किराये पर लेकर झुग्गियां खड़ी की थीं। एक साथ कई परिवार इनमें राजी-खुशी रह रहे थे। लेकिन वीरवार को सबकुछ उजड़ गया। सिलेंडर के खौफ से कोई भी आग के दौरान झुग्गी में रखे सामान को निकालने की हिम्मत नहीं कर पाया।
विज्ञापन
अग्निकांड में नेमपाल, विनोद, रामवीर, संतोष, कृपाल, खान सहाय, रामदास, राकेश, मोहन लाल, राकेश, गुड्डू, छोटे लाल, राजू, गुलाब सिंह, रवि गौतम, सत्यवीर, बबलू समेत अन्य की झुग्गियां जल गईं। यह झुगियां लोकल निवासी दीवान चंद की जमीन में बनाई गई थी।
विज्ञापन
फोरेंसिक जांच को भेजा शव : डीएसपी
डीएसपी खजाना राम ने बताया कि शव को फोरेंसिक जांच के लिए शिमला भेज दिया है। उन्होंने बताया कि झुग्गियों के मालिक की भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि पूछताछ के बाद मालिक पर मामला दर्ज किया जा सकता है।
और दिनदहाड़े डूब
गया राजू का सूरज
अमर उजाला ब्यूरो
बरोटीवाला (सोलन)। हजारों मील दूर से कमाने की आस में पहुंचे गरीब परिवार वीरवार को पूरी तरह उजड़ गए हैं। तिल-तिल कर जोड़ी कमाई आग में राख हो गई। राजू का नौ साल का बेटा सूरज आग में जिंदा जल गया। आग ठंडी होते ही बिखरे सपनों को जोड़ने की कोशिश दोबारा शुरू हुई। लेकिन चिंगारियों से जमीन पर राख के अलावा कुछ भी बाकी नहीं बचा था। हालात से पीड़ित परिवारों ने सिर्फ झुग्गियां ही नहीं खोई हैं बल्कि वो सबकुछ गवां दिया है जिसके लिए वे बददी तक चले आए थे।
राजू खुद कंपनी में काम करता है और सूरज को बड़ा आदमी बनते देखना चाहता था। लेकिन अब राजू का सूरज हमेशा के लिए ढल चुका है। यह मंजर उन बाकी लोगों का भी है जिनकी झोंपड़ी आग की भेंट चढ़ी हैं। आग ठंडी होने के बाद भी वीरवार को काठा में मातम पसरा रहा। बाहरी राज्यों से कमाने की आस में आए इन परिवारों को अब दो वक्त की रोटी के साथ ही ठिकाने का भी इंतजाम एक बड़ी चुनौती बन गया है।