CRI Kasauli: सीआरआई कसौली नई बीमारियों को लेकर कर रहा टीकों का निर्माण
सीआरआई कसौली में नई बीमारियों पर करेंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस अनुपालना के तहत टीकों का निर्माण किया जा रहा है। यह केंद्र सरकार का पहला ऐसा संस्थान है, जिसने सीजीएमपी अनुपालना के तहत वैक्सीन उत्पादन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया है।
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केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) कसौली में देश में आ रही नई बीमारियों पर करेंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (सीजीएमपी) अनुपालना के तहत टीकों का निर्माण किया जा रहा है। डीटीपी वैक्सीन का निर्माण भी सीजीएमपी आधार पर किया जा रहा है। डीटीपी मनुष्यों में तीन संक्रामक रोगों डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी) और टेटनस (लॉकजॉ) के खिलाफ संयोजन टीकों का एक वर्ग है। यह केंद्र सरकार का पहला ऐसा संस्थान है, जिसने सीजीएमपी अनुपालना के तहत वैक्सीन उत्पादन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया है। संस्थान सर्पदंश, डिप्थीरिया और रैबीज के लिए एंटीसीरा भी विकसित कर रहा है। वर्तमान में संस्थान पीत ज्वर टीकाकरण केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहा है।
वहीं, सीआरआई कसौली डीपीटी समूह के टीकों के उत्पादन के लिए सीजीएमपी के अनुरूप सुविधा बनाने में सक्षम है। संस्थान ने डीपीटी ग्रुप ऑफ वैक्सीन का बड़े स्तर पर उत्पादन कर सप्लाई भी किया है। शुक्रवार को संस्थान ने अपना 120वां स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम में सीआरआई कसौली की पूर्व निदेशक डॉ. जेएस सोखे और संस्थान के सबसे वयोवृद्ध सेवानिवृत कर्मचारी ज्ञानेंद्र सिंह कंवर ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की। वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल ने वीडियो संदेश के माध्यम से सीआरआई के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान की निदेशक डॉ. डिंपल कसाना ने वार्षिक गतिविधियों व उपलब्धियों के बारे में बताया।
केंद्रीय स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल ने संस्थान के बीते इतिहास के बारे में बताया कि आज संस्थान नये आयाम स्थापित कर रहा है। सीआरआई कसौली का जीवन रक्षक वैक्सीन समेत बायोलॉजी में अहम योगदान है। 1905 में स्थापना के बाद से सीआरआई कसौली लगातार कार्य कर रहा है। संस्थान को सूक्ष्म जीव विज्ञान, जीवन रक्षक प्रतिरक्षा जीव विज्ञान, निगरानी गतिविधियों, शिक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के उत्पादन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। संस्थान ने पहला वाणिज्यिक तंत्रिका ऊतक रैबीज टीका विकसित किया। उसके बाद केंद्रीय मलेरिया ब्यूरो, इंडियन रिसर्च फंड एसोसिएशन की स्थापना की।
लाइव वायरस पर भी होगा कार्य
सीआरआई कसौली में आधुनिक बीएसएल थ्री लैब भी स्थापित होगी। यहां पर लाइव वायरस और बैक्टीरिया पर भी शोध किया जाएगा। कोरोना काल के दौरान सीआरआई ने नया आयाम स्थापित किया। स्वदेशी एंटीसीरा बनाने का कार्य भी कोरोना काल में किया। वहीं कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए सैंपलों की भी दिन-रात जांच की।