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Solan News: गरीबी से निकलकर साक्षी टीम इंडिया का खटखटा रहीं दरवाजा
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कबड्डी स्टार साक्षी शर्मा- संवाद।
खेल दिवस...
शिलाई के ढकोली गांव की बेटी कबड्डी में कमा रही नाम
कबड्डी वर्ल्ड कप खेलने को तैयार, इंडिया कैंप में ले रही प्रशिक्षण
बड़ी बहन से ली प्रेरणा, 12 साल से कबड्डी खेलना किया था शुरू
ओमपाल सिंह
बद्दी (सोलन)। सिरमौर के दूरदराज क्षेत्र शिलाई की नाया पंचायत के ढकोली गांव की साक्षी शर्मा छोटे से गांव से निकलकर भारतीय कबड्डी टीम के दरवाजे खटखटा रही हैं।
राजेश कुमार और सत्या देवी के घर जन्मी साक्षी चार बहनों और एक भाई में तीसरे नंबर पर हैं। घर की गरीबी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद साक्षी ने मात्र 13 वर्ष की आयु में राजीव गांधी खेल प्रतियोगिता में पहला गोल्ड जीता था। इसके बाद वह अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 15 गोल्ड जीत चुकी हैं।
साक्षी की बड़ी बहन कृतिका शर्मा भी अपने समय की कबड्डी खिलाड़ी रही हैं। बहन को देखकर ही साक्षी ने खेलना शुरू किया और आज देश की टॉप खिलाड़ियों में शामिल हैं। साक्षी शर्मा का इंडिया कैंप के लिए चयन हुआ है। वह कैंप में प्रशिक्षण ले रही हैं। वह नालागढ़ के खेलो इंडिया सेंटर में कोचिंग ले रही हैं। आने वाले कबड्डी वर्ल्ड कप के लिए उनके चयन की भी प्रबल संभावना है।
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हिमाचल को दो बार खेलो इंडिया में गोल्ड दिलाने में साक्षी की अहम भूमिका रही है। वह टीम में ऑल राउंडर की भूमिका निभाती हैं, हालांकि उन्हें मुख्य रूप से डिफेंडर के रूप में टीम में लिया जाता है। साक्षी ने कहा कि उनके आज के मुकाम के पीछे खेलो इंडिया सेंटर के कोच संजीव ठाकुर का बहुत बड़ा योगदान है। जब वह गांव से बाहर निकलीं, तभी से कोच ने उनके खेल को तराशा। आज भी वह संजीव ठाकुर से कोचिंग ले रही हैं।
उन्होंने कहा कि उनका सपना इंडिया टीम में खेलना और भारत को गोल्ड दिलाना है। साक्षी ने यह भी संदेश दिया कि कोई भी छात्रा अपनी लगन और मेहनत से बड़ा मुकाम हासिल कर सकती है, बशर्ते वह अनुशासन और कोच के बताए मार्ग पर चले।
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शिलाई के ढकोली गांव की बेटी कबड्डी में कमा रही नाम
कबड्डी वर्ल्ड कप खेलने को तैयार, इंडिया कैंप में ले रही प्रशिक्षण
बड़ी बहन से ली प्रेरणा, 12 साल से कबड्डी खेलना किया था शुरू
ओमपाल सिंह
बद्दी (सोलन)। सिरमौर के दूरदराज क्षेत्र शिलाई की नाया पंचायत के ढकोली गांव की साक्षी शर्मा छोटे से गांव से निकलकर भारतीय कबड्डी टीम के दरवाजे खटखटा रही हैं।
राजेश कुमार और सत्या देवी के घर जन्मी साक्षी चार बहनों और एक भाई में तीसरे नंबर पर हैं। घर की गरीबी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद साक्षी ने मात्र 13 वर्ष की आयु में राजीव गांधी खेल प्रतियोगिता में पहला गोल्ड जीता था। इसके बाद वह अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 15 गोल्ड जीत चुकी हैं।
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साक्षी की बड़ी बहन कृतिका शर्मा भी अपने समय की कबड्डी खिलाड़ी रही हैं। बहन को देखकर ही साक्षी ने खेलना शुरू किया और आज देश की टॉप खिलाड़ियों में शामिल हैं। साक्षी शर्मा का इंडिया कैंप के लिए चयन हुआ है। वह कैंप में प्रशिक्षण ले रही हैं। वह नालागढ़ के खेलो इंडिया सेंटर में कोचिंग ले रही हैं। आने वाले कबड्डी वर्ल्ड कप के लिए उनके चयन की भी प्रबल संभावना है।
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हिमाचल को दो बार खेलो इंडिया में गोल्ड दिलाने में साक्षी की अहम भूमिका रही है। वह टीम में ऑल राउंडर की भूमिका निभाती हैं, हालांकि उन्हें मुख्य रूप से डिफेंडर के रूप में टीम में लिया जाता है। साक्षी ने कहा कि उनके आज के मुकाम के पीछे खेलो इंडिया सेंटर के कोच संजीव ठाकुर का बहुत बड़ा योगदान है। जब वह गांव से बाहर निकलीं, तभी से कोच ने उनके खेल को तराशा। आज भी वह संजीव ठाकुर से कोचिंग ले रही हैं।
उन्होंने कहा कि उनका सपना इंडिया टीम में खेलना और भारत को गोल्ड दिलाना है। साक्षी ने यह भी संदेश दिया कि कोई भी छात्रा अपनी लगन और मेहनत से बड़ा मुकाम हासिल कर सकती है, बशर्ते वह अनुशासन और कोच के बताए मार्ग पर चले।