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Solan News: चंबाघाट, कथेड़ में आठ दिन बाद भी नहीं मिला पानी
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सोलन शहर में पेयजल किल्लत बरकरार
नगर निगम का पानी वितरण शेड्यूल नहीं आया पटरी पर
लोग टैंकर और जल स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर
आने वाले दिनों में ओर ज्यादा हो सकती है शहर में पेयजल किल्लत
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जून की भीषण गर्मी के बीच जिला मुख्यालय सोलन में पेयजल किल्लत गहराती जा रही है। शहर के कई हिस्सों में हाहाकार मचा हुआ है। नगर निगम का पानी वितरण शेड्यूल पूरी तरह से पटरी से उतर चुका है। सबसे बदतर हालात चंबाघाट और कथेड़ क्षेत्र के है। यहां आठ दिनों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है।
जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। आठ दिनों से पानी न आने के कारण स्थानीय निवासी महंगे दामों पर निजी टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं। कुछ लोग भीषण गर्मी में मीलों पैदल चलकर प्राकृतिक जल स्रोतों बावड़ियों और चश्मों से पानी ढोने को मजबूर हैं। शहर के प्राकृतिक स्रोतों पर सुबह से ही पानी भरने वालों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम ने जल्द ही पानी की सप्लाई सुचारू नहीं की, तो आने वाले दिनों में स्थिति और ज्यादा विस्फोटक हो सकती है।
शूलिनी मेले कैसे संभलेगी व्यवस्था
शहर में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिन सोलन नगर निगम के लिए बड़ी परीक्षा साबित होने वाले हैं। शहर में जल्द ही एक विशाल निजी आयोजन होने जा रहा है। इसमें हजारों लोगों के जुटने की संभावना है। इसके ठीक बाद सोलन का प्रसिद्ध राज्य स्तरीय मां शूलिनी मेला भी शुरू होने वाला है। इस दौरान बाहरी राज्यों और जिलों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक सोलन पहुंचते हैं। जब आम दिनों में ही जल शक्ति विभाग और नगर निगम शहरवासियों को आठ-आठ दिनों तक पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है, तो इतने बड़े आयोजनों और शूलिनी मेले के दौरान पानी की अतिरिक्त मांग को कैसे पूरा किया जाएगा।
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विकराल हो सकती है स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। ऐसे में पानी की खपत और ज्यादा बढ़ेगी। यदि गिरि और अश्वनी खड्ड जैसी मुख्य पेयजल योजनाओं से पानी की लिफ्टिंग में सुधार नहीं हुआ, तो सोलन शहर में पानी का यह सूखा ऐतिहासिक रूप ले सकता है। लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से पानी के शेड्यूल को ठीक करने की मांग की है।
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नगर निगम का पानी वितरण शेड्यूल नहीं आया पटरी पर
लोग टैंकर और जल स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर
आने वाले दिनों में ओर ज्यादा हो सकती है शहर में पेयजल किल्लत
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जून की भीषण गर्मी के बीच जिला मुख्यालय सोलन में पेयजल किल्लत गहराती जा रही है। शहर के कई हिस्सों में हाहाकार मचा हुआ है। नगर निगम का पानी वितरण शेड्यूल पूरी तरह से पटरी से उतर चुका है। सबसे बदतर हालात चंबाघाट और कथेड़ क्षेत्र के है। यहां आठ दिनों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है।
जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। आठ दिनों से पानी न आने के कारण स्थानीय निवासी महंगे दामों पर निजी टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं। कुछ लोग भीषण गर्मी में मीलों पैदल चलकर प्राकृतिक जल स्रोतों बावड़ियों और चश्मों से पानी ढोने को मजबूर हैं। शहर के प्राकृतिक स्रोतों पर सुबह से ही पानी भरने वालों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम ने जल्द ही पानी की सप्लाई सुचारू नहीं की, तो आने वाले दिनों में स्थिति और ज्यादा विस्फोटक हो सकती है।
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शूलिनी मेले कैसे संभलेगी व्यवस्था
शहर में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले दिन सोलन नगर निगम के लिए बड़ी परीक्षा साबित होने वाले हैं। शहर में जल्द ही एक विशाल निजी आयोजन होने जा रहा है। इसमें हजारों लोगों के जुटने की संभावना है। इसके ठीक बाद सोलन का प्रसिद्ध राज्य स्तरीय मां शूलिनी मेला भी शुरू होने वाला है। इस दौरान बाहरी राज्यों और जिलों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक सोलन पहुंचते हैं। जब आम दिनों में ही जल शक्ति विभाग और नगर निगम शहरवासियों को आठ-आठ दिनों तक पानी उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है, तो इतने बड़े आयोजनों और शूलिनी मेले के दौरान पानी की अतिरिक्त मांग को कैसे पूरा किया जाएगा।
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विकराल हो सकती है स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। ऐसे में पानी की खपत और ज्यादा बढ़ेगी। यदि गिरि और अश्वनी खड्ड जैसी मुख्य पेयजल योजनाओं से पानी की लिफ्टिंग में सुधार नहीं हुआ, तो सोलन शहर में पानी का यह सूखा ऐतिहासिक रूप ले सकता है। लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से पानी के शेड्यूल को ठीक करने की मांग की है।