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Solan News: बद्दी की बदहाल सड़कें बनीं विकास में बाधा, वाहन चालक परेशान
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बारिश के बाद शुक्रवार को पिंजौर-बद्दी नालागढ़ फोरलेन में हुआ जलभराव। संवाद
करोड़ों का राजस्व देने वाला क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं को तरसा, मानसून से पहले बढ़ी चिंता
दर्जनों संपर्क सड़कों पर वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी हुआ है दूभर
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें अपनी दयनीय स्थिति के कारण विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं। यह क्षेत्र देश और प्रदेश सरकार को हर माह करोड़ों रुपये का राजस्व प्रदान करता है, लेकिन यहां की सड़कों की हालत बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। झाड़माजरी, काठा, साई सड़क, बरोटीवाला, लोधीमाजरा, थाना, दबनी सहित हरिपुर और पट्टा जैसे औद्योगिक और धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाली सड़कें जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। साई मार्ग और काठा क्षेत्रों में सड़कों का नामोनिशान तक मिट गया है। सड़कें पूरी तरह से उखड़ी हुई हैं। कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले भारी वाहन, ट्रक और कंटेनर इन खराब सड़कों पर रेंगने को मजबूर हैं, जिससे यातायात की गति बुरी तरह प्रभावित हो रही है और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। बीबीएन क्षेत्र में हजारों कर्मचारी प्रतिदिन दोपहिया वाहनों से अपनी फैक्ट्रियों तक पहुंचते हैं। खराब सड़कों के कारण सबसे अधिक परेशानी इन्हीं कर्मचारियों को उठानी पड़ रही है। धूल के गुबार और टूटे रास्तों के कारण उनका सफर अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों की मरम्मत के नाम पर केवल आश्वासन मिलते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लघु उद्योग संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अशोक राणा ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बीबीएन की अधिकांश सड़कों की हालत अत्यंत खराब है, जिससे उद्यमियों को उद्योगों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को सर्वाधिक राजस्व देने वाले क्षेत्र की सड़कें इस स्थिति में होना अत्यंत चिंताजनक है और सरकार को प्राथमिकता के आधार पर सड़कों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण करना चाहिए। फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (एफआईआई) हिमाचल प्रदेश के राज्य अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने भी इस समस्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि टूटी सड़कों का सीधा नुकसान उद्योगों को उठाना पड़ रहा है। भारी वाहनों और मालवाहक गाड़ियों में बार-बार खराबी आ रही है, जिससे उद्यमियों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट खर्च भी बढ़ रहा है। सड़कों की दयनीय स्थिति के कारण कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि उद्योग नगरी की साख और निवेशकों का विश्वास बनाए रखना है, तो सड़क ढांचे को तत्काल सुधारा जाना चाहिए।
आवासीय और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा
औद्योगिक क्षेत्र केवल उद्योगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां बड़ी संख्या में आवासीय कॉलोनियां, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियां और ग्रामीण आबादी भी निवास करती है। इन क्षेत्रों को मुख्य सड़कों से जोड़ने वाली सड़कें भी वर्षों से व्यापक मरम्मत की प्रतीक्षा कर रही हैं। बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जिससे वाहन चालकों को सड़क और गड्ढे के बीच का अंतर समझना मुश्किल हो जाता है।
उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव और बढ़ी चिंता
उद्यमियों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता उसके सड़क नेटवर्क व्यवस्था पर निर्भर करती है। बीबीएन से देशभर में दवाइयां, खाद्य उत्पाद, कॉस्मेटिक और अन्य औद्योगिक सामान भेजा जाता है। खराब सड़कों के कारण परिवहन लागत बढ़ रही है, समय अधिक लग रहा है और ट्रांसपोर्टरों को वाहनों के रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। इसका सीधा असर उद्योगों की उत्पादन क्षमता और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ रहा है।
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दर्जनों संपर्क सड़कों पर वाहन चलाना तो दूर, पैदल चलना भी हुआ है दूभर
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें अपनी दयनीय स्थिति के कारण विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गई हैं। यह क्षेत्र देश और प्रदेश सरकार को हर माह करोड़ों रुपये का राजस्व प्रदान करता है, लेकिन यहां की सड़कों की हालत बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। झाड़माजरी, काठा, साई सड़क, बरोटीवाला, लोधीमाजरा, थाना, दबनी सहित हरिपुर और पट्टा जैसे औद्योगिक और धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाली सड़कें जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। साई मार्ग और काठा क्षेत्रों में सड़कों का नामोनिशान तक मिट गया है। सड़कें पूरी तरह से उखड़ी हुई हैं। कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले भारी वाहन, ट्रक और कंटेनर इन खराब सड़कों पर रेंगने को मजबूर हैं, जिससे यातायात की गति बुरी तरह प्रभावित हो रही है और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। बीबीएन क्षेत्र में हजारों कर्मचारी प्रतिदिन दोपहिया वाहनों से अपनी फैक्ट्रियों तक पहुंचते हैं। खराब सड़कों के कारण सबसे अधिक परेशानी इन्हीं कर्मचारियों को उठानी पड़ रही है। धूल के गुबार और टूटे रास्तों के कारण उनका सफर अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों की मरम्मत के नाम पर केवल आश्वासन मिलते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लघु उद्योग संघ हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अशोक राणा ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बीबीएन की अधिकांश सड़कों की हालत अत्यंत खराब है, जिससे उद्यमियों को उद्योगों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को सर्वाधिक राजस्व देने वाले क्षेत्र की सड़कें इस स्थिति में होना अत्यंत चिंताजनक है और सरकार को प्राथमिकता के आधार पर सड़कों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण करना चाहिए। फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (एफआईआई) हिमाचल प्रदेश के राज्य अध्यक्ष चिरंजीव ठाकुर ने भी इस समस्या पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि टूटी सड़कों का सीधा नुकसान उद्योगों को उठाना पड़ रहा है। भारी वाहनों और मालवाहक गाड़ियों में बार-बार खराबी आ रही है, जिससे उद्यमियों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट खर्च भी बढ़ रहा है। सड़कों की दयनीय स्थिति के कारण कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि उद्योग नगरी की साख और निवेशकों का विश्वास बनाए रखना है, तो सड़क ढांचे को तत्काल सुधारा जाना चाहिए।
आवासीय और ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा
औद्योगिक क्षेत्र केवल उद्योगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां बड़ी संख्या में आवासीय कॉलोनियां, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियां और ग्रामीण आबादी भी निवास करती है। इन क्षेत्रों को मुख्य सड़कों से जोड़ने वाली सड़कें भी वर्षों से व्यापक मरम्मत की प्रतीक्षा कर रही हैं। बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जिससे वाहन चालकों को सड़क और गड्ढे के बीच का अंतर समझना मुश्किल हो जाता है।
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उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव और बढ़ी चिंता
उद्यमियों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता उसके सड़क नेटवर्क व्यवस्था पर निर्भर करती है। बीबीएन से देशभर में दवाइयां, खाद्य उत्पाद, कॉस्मेटिक और अन्य औद्योगिक सामान भेजा जाता है। खराब सड़कों के कारण परिवहन लागत बढ़ रही है, समय अधिक लग रहा है और ट्रांसपोर्टरों को वाहनों के रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। इसका सीधा असर उद्योगों की उत्पादन क्षमता और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ रहा है।

बारिश के बाद शुक्रवार को पिंजौर-बद्दी नालागढ़ फोरलेन में हुआ जलभराव। संवाद

बारिश के बाद शुक्रवार को पिंजौर-बद्दी नालागढ़ फोरलेन में हुआ जलभराव। संवाद
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