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चंबाघाट मोटर मार्केट का उजड़ना तय
Updated Fri, 16 Mar 2018 10:11 PM IST
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सोलन। कालका-शिमला नेशनल हाईवे को फोरलेन में बदलने के लिए चल रहे निर्माण कार्य की जद में आई चंबाघाट मोटर मार्केट आठ दिन के बाद उजड़ जाएगी। प्रशासन ने कारोबारियों को कब्जा छोड़ने का नोटिस जारी कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ मोटर मार्केट के कारोबारियों ने भूख हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। कारोबारियों और मेकेनिकों का यह वर्ग 24 मार्च से पूर्व हड़ताल शुरू कर देगा। हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक सरकार की तरफ से स्थायी ठिकाना नहीं मिल जाता।
मोटर मार्केट से जुड़े कारोबारियों ने इसके लिए सीधे तौर प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कारोबारियों का कहना है कि वर्ष 2009 से ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल सरकारी कार्यालयों में घूम रही है। जमीन होने और कारोबारियों की ओर से निर्माण पर पैसा लगाने की बात कहने के बावजूद नौ सालों में ट्रांसपोर्ट नगर की डीपीआर तक तैयार नहीं हो पाई है। अब प्रशासनिक आदेश पर 24 मार्च से उन्हें हटाने के आदेश जारी हो चुके हैं। सोलन के चंबाघाट की इस मोटर मार्केट में करीब 112 परिवारों की रोजी-रोटी चल रही है। लेकिन जिस मोटर मार्केट के सहारे यह परिवार जीवनयापन कर रहे थे उसे हटाने के प्रशासनिक आदेश मिल चुके हैं। 24 मार्च से इन आदेशों पर अमल शुरू हो जाएगा। मोटर मार्केट से उजड़ने वाले इन मेकेनिकों और कारोबारियों के पास अब कोई नया ठिकाना नहीं है। समय रहते इनकी लंबे समय से पहले बसाने फिर कार्रवाई करने की मांग पर न तो प्रशासन गौर कर पाया और न ही सरकार कोई निर्णय ले पाई है।
मोटर मार्केट से प्रभावित होगा 15 करोड़ का कारोबार
मोटर मार्केट का असर सिर्फ कारोबारियों और मेकेनिकों या उनके परिवार पर ही नहीं पड़ेगा बल्कि मार्केट उजड़ते ही सरकारी राजस्व को भी खासा चूना लगने वाला है। सोलन की मोटर मार्केट से सालाना करीब 15 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इसका राजस्व सरकारी खजाने में जा रहा है। लेकिन मार्केट उजड़ते ही यह राजस्व खत्म हो जाएगा। मोटर मार्केट की आड़ में परिवार चला रहे स्पेयर पार्ट विक्रेताओं और मेकेनिकों को नए ठिकाने ढूंढने होंगे। मैकेनिक अलग-अलग जगह काम शुरू करते हैं तो उन्हें ग्राहक बनाने में महीनों लग जाएंगे तब तक परिवार की रोजी-रोटी का इंतजाम भी मुश्किल हो जाएगा।
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2009 से घूम रही है ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल
चंबाघाट की मोटर मार्केट में फलफूल रहे करीब 112 परिवारों को इस अनहोनी की भनक काफी पहले लग चुकी थी। वर्ष 2009 से ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण का मामला सरकार और प्रशासन के बीच फंसा है। करीब नौ सालों में सोलन के ट्रांसपोर्ट नगर की डीपीआर तक तैयार नहीं हो पाई है। चंबाघाट में जिस जगह को ट्रांसपोर्ट नगर के लिए चुना था वहां भी मलबा फेंकने की वजह से जमीन का आकार बिगड़ चुका है। प्रशासन ने 300 भवन और दुकान मालिकों को 24 मार्च तक अपने कब्जे छोड़ने को कहा है। इनमें चंबाघाट की मोटर मार्केट भी शामिल है।
ट्रांसपोर्ट नगर की डीपीआर बनाए प्रशासन : कारोबारी
मोटर मार्केट एसोसिएशन के प्रधान धीरज सूद ने कहा कि इस बारे में मोटर मार्केट एसोसिएशन ने एसडीएम सोलन से भी मुलाकात की है। एसडीएम ने उन्हें ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण के जल्द डीपीआर बनाने और टेंडर जारी करने की बात कही है। लेकिन यह सिर्फ आश्वासन है कारोबारी तभी मानेंगे जब धरातल पर कोई काम शुरू होगा। अन्यथा आमरण अनशन ही आखिरी विकल्प बचेगा।
मुआवजा ले चुके हैं कारोबारी : एसडीएम
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि फोरलेन निर्माण की जद में आने वाली मोटर मार्केट के मालिकों को मुआवजा दिया जा चुका है। अब उन्हें यह मार्केट हर हाल में खाली करनी होगी। ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर काम चल रहा है। डीपीआर तैयार होते ही टेंडर जारी किए जाएंगे। यदि कारोबारी गैर कानूनी कदम उठाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कारोबारियों से सहयोग का आह्वान किया है।
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मोटर मार्केट से जुड़े कारोबारियों ने इसके लिए सीधे तौर प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कारोबारियों का कहना है कि वर्ष 2009 से ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल सरकारी कार्यालयों में घूम रही है। जमीन होने और कारोबारियों की ओर से निर्माण पर पैसा लगाने की बात कहने के बावजूद नौ सालों में ट्रांसपोर्ट नगर की डीपीआर तक तैयार नहीं हो पाई है। अब प्रशासनिक आदेश पर 24 मार्च से उन्हें हटाने के आदेश जारी हो चुके हैं। सोलन के चंबाघाट की इस मोटर मार्केट में करीब 112 परिवारों की रोजी-रोटी चल रही है। लेकिन जिस मोटर मार्केट के सहारे यह परिवार जीवनयापन कर रहे थे उसे हटाने के प्रशासनिक आदेश मिल चुके हैं। 24 मार्च से इन आदेशों पर अमल शुरू हो जाएगा। मोटर मार्केट से उजड़ने वाले इन मेकेनिकों और कारोबारियों के पास अब कोई नया ठिकाना नहीं है। समय रहते इनकी लंबे समय से पहले बसाने फिर कार्रवाई करने की मांग पर न तो प्रशासन गौर कर पाया और न ही सरकार कोई निर्णय ले पाई है।
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मोटर मार्केट से प्रभावित होगा 15 करोड़ का कारोबार
मोटर मार्केट का असर सिर्फ कारोबारियों और मेकेनिकों या उनके परिवार पर ही नहीं पड़ेगा बल्कि मार्केट उजड़ते ही सरकारी राजस्व को भी खासा चूना लगने वाला है। सोलन की मोटर मार्केट से सालाना करीब 15 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। इसका राजस्व सरकारी खजाने में जा रहा है। लेकिन मार्केट उजड़ते ही यह राजस्व खत्म हो जाएगा। मोटर मार्केट की आड़ में परिवार चला रहे स्पेयर पार्ट विक्रेताओं और मेकेनिकों को नए ठिकाने ढूंढने होंगे। मैकेनिक अलग-अलग जगह काम शुरू करते हैं तो उन्हें ग्राहक बनाने में महीनों लग जाएंगे तब तक परिवार की रोजी-रोटी का इंतजाम भी मुश्किल हो जाएगा।
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2009 से घूम रही है ट्रांसपोर्ट नगर की फाइल
चंबाघाट की मोटर मार्केट में फलफूल रहे करीब 112 परिवारों को इस अनहोनी की भनक काफी पहले लग चुकी थी। वर्ष 2009 से ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण का मामला सरकार और प्रशासन के बीच फंसा है। करीब नौ सालों में सोलन के ट्रांसपोर्ट नगर की डीपीआर तक तैयार नहीं हो पाई है। चंबाघाट में जिस जगह को ट्रांसपोर्ट नगर के लिए चुना था वहां भी मलबा फेंकने की वजह से जमीन का आकार बिगड़ चुका है। प्रशासन ने 300 भवन और दुकान मालिकों को 24 मार्च तक अपने कब्जे छोड़ने को कहा है। इनमें चंबाघाट की मोटर मार्केट भी शामिल है।
ट्रांसपोर्ट नगर की डीपीआर बनाए प्रशासन : कारोबारी
मोटर मार्केट एसोसिएशन के प्रधान धीरज सूद ने कहा कि इस बारे में मोटर मार्केट एसोसिएशन ने एसडीएम सोलन से भी मुलाकात की है। एसडीएम ने उन्हें ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण के जल्द डीपीआर बनाने और टेंडर जारी करने की बात कही है। लेकिन यह सिर्फ आश्वासन है कारोबारी तभी मानेंगे जब धरातल पर कोई काम शुरू होगा। अन्यथा आमरण अनशन ही आखिरी विकल्प बचेगा।
मुआवजा ले चुके हैं कारोबारी : एसडीएम
एसडीएम आशुतोष गर्ग ने कहा कि फोरलेन निर्माण की जद में आने वाली मोटर मार्केट के मालिकों को मुआवजा दिया जा चुका है। अब उन्हें यह मार्केट हर हाल में खाली करनी होगी। ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर काम चल रहा है। डीपीआर तैयार होते ही टेंडर जारी किए जाएंगे। यदि कारोबारी गैर कानूनी कदम उठाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कारोबारियों से सहयोग का आह्वान किया है।