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आयोडीन की कमी मतलब घातक रोगों को बुलावा
Updated Fri, 03 Nov 2017 10:17 PM IST
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बद्दी (सोलन)। बीबीएन के सबसे बड़े नालागढ़ अस्पताल में विश्व आयोडीन अल्पता विकार बचाव दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बीमारी से बचने के उपाय बताए। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि कार्यकारी बीएमओ डॉ. आनंद कुमार ने शिरकत की।
कार्यकारी बीएमओ डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि खाने में आयोडीन की कमी से घेंघा, भैंगा, बहरा, बौना आदि रोग हो जाते हैं। इसलिए आयोडीन की कमी को पूरा करने के लिए आयोडीन युक्त नमक और आयोडीन युक्त आहार का सेवन ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में इसकी कमी से शारीरिक और बौद्धिक विकास रुक जाता है। देश में छह करोड़ से अधिक लोग आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों से ग्रस्त हैं। इसकी कमी से शारीरिक रूप से थायरॉयड की बीमारी भी हो जाती है। बच्चों में आयोडीन की कमी से वह पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं और गर्भावस्था के दौरान इसकी कमी से गर्भपात, कम वजन का शिशु और विकलांग शिशु होने का खतरा बढ़ जाता है।
जीवन में एक चम्मच आयोडीन जरूरी : ठाकुर
स्वास्थ्य शिक्षक शशिपाल ठाकुर ने कहा कि प्रतिदिन प्रत्येक व्यक्ति को 150 माइक्रोग्राम आयोडीन का सेवन करना अनिवार्य होता है। पूरे जीवन में एक चमच पर्याप्त होता है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी मात्रा लेकिन महत्वपूर्ण तत्व का महत्व बताते हुए कहा कि आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करने से इससे होने वाली बीमारियों से बचा जा सका है। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन, मूली, चुकंदर, दूध, सोयाबीन, अंडा और केला आदि के सेवन से भी आयोडीन की कमी पूरी की जा सकती है।
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प्रश्नोत्तरी स्पर्धा में सुनीता की टीम प्रथम
नालागढ़ अस्पताल में विश्व आयोडीन अल्पता विकार बचाव दिवस पर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। इसमें प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सुनीता, बीना कुमारी, कंचन समूह प्रथम, सफीना, मंजीत कौर, मंजीत समूह ने द्वितीय और सोनिका, मोनिका, रानी की टीम तृतीय स्थान पर रहीं।
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कार्यकारी बीएमओ डॉ. आनंद कुमार ने कहा कि खाने में आयोडीन की कमी से घेंघा, भैंगा, बहरा, बौना आदि रोग हो जाते हैं। इसलिए आयोडीन की कमी को पूरा करने के लिए आयोडीन युक्त नमक और आयोडीन युक्त आहार का सेवन ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में इसकी कमी से शारीरिक और बौद्धिक विकास रुक जाता है। देश में छह करोड़ से अधिक लोग आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों से ग्रस्त हैं। इसकी कमी से शारीरिक रूप से थायरॉयड की बीमारी भी हो जाती है। बच्चों में आयोडीन की कमी से वह पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं और गर्भावस्था के दौरान इसकी कमी से गर्भपात, कम वजन का शिशु और विकलांग शिशु होने का खतरा बढ़ जाता है।
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जीवन में एक चम्मच आयोडीन जरूरी : ठाकुर
स्वास्थ्य शिक्षक शशिपाल ठाकुर ने कहा कि प्रतिदिन प्रत्येक व्यक्ति को 150 माइक्रोग्राम आयोडीन का सेवन करना अनिवार्य होता है। पूरे जीवन में एक चमच पर्याप्त होता है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी मात्रा लेकिन महत्वपूर्ण तत्व का महत्व बताते हुए कहा कि आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करने से इससे होने वाली बीमारियों से बचा जा सका है। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन, मूली, चुकंदर, दूध, सोयाबीन, अंडा और केला आदि के सेवन से भी आयोडीन की कमी पूरी की जा सकती है।
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प्रश्नोत्तरी स्पर्धा में सुनीता की टीम प्रथम
नालागढ़ अस्पताल में विश्व आयोडीन अल्पता विकार बचाव दिवस पर प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया। इसमें प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सुनीता, बीना कुमारी, कंचन समूह प्रथम, सफीना, मंजीत कौर, मंजीत समूह ने द्वितीय और सोनिका, मोनिका, रानी की टीम तृतीय स्थान पर रहीं।