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300 गत्ता उद्योगों पर तालाबंदी की नौबत
सोलन, ब्यूरो
Updated Fri, 07 Apr 2017 09:13 AM IST
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गत्ता उद्योग संघ के राज्य स्तरीय सम्मेलन में कच्चे माल की कीमतों की बढ़ोतरी का मुद्दा गूंजा रहा।
- फोटो : अमर उजाला
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गत्ता उद्योग संघ के राज्य स्तरीय सम्मेलन में कच्चे माल की कीमतों की बढ़ोतरी का मुद्दा गूंजा रहा। बद्दी में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि क्राफ्ट पेपर (गत्ता उत्पादन का कच्चा माल) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी से बीबीएन समेत प्रदेश के करीब 300 गत्ता उद्योगों पर तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है। उद्योग संचालकों का दावा है कि कच्चे माल की कीमतों में इजाफा अनियंत्रित हो चुका है।
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प्रदेश सरकार के पास दाम कंट्रोल करने की कोई नीति नहीं है। इसका फायदा बाहरी राज्यों के क्राफ्ट पेपर का उद्योग चलाने वाले साहूकार उठा रहे हैं। तीन माह में 22 से 30 फीसदी कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। इस दौरान एक किलो गत्ता सात रुपये तक महंगा हुआ है। ऐसे में तैयार माल की लागत तक पूरी नहीं बैठ रही है। बाहर की मार्केट में गलाकाट प्रतिस्पर्धा के बीच कंपीट करना मुश्किल हो गया है।
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दावा किया कि कच्चे माल की बेतहाशा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सात गत्ता उद्योग बंद हो चुके हैं। शेष भी घाटे पर चल रहे हैं। ऐसे में कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया तो प्रदेश में गत्ता उद्योगों का कारोबार सिमट जाएगा। इससे आने वाले दिनों में प्रदेश में सेब के बॉक्स तैयार करने की डिमांड पूरी करने में भी दिक्कत आ सकती है।
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यह बागवानों के लिए गत्ते की पेटियों की महंगी कीमतों में खरीद साबित हो सकती है। कैरोगेटिड बॉक्स उद्योग कई महीनों से संकट के दौर में है। क्राफ्ट पेपर उत्पादकों की मनमानी के खिलाफ गत्ता उद्यमियों की राष्ट्रीय स्तर की एसोसिएशन फेडरेशन ऑफ कैरोगेटिड बाक्स मैन्युफैक्चर ऑफ इंडिया (एफसीबीएम) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संबंधित मंत्रालयों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
सम्मेलन में किसने क्या कहा
प्रदेश गत्ता एसोसिएशन के प्रांत अध्यक्ष गगन कपूर ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री कार्यालय और संबंधित मंत्रालयों ने इस दिशा में कार्रवाई नहीं की तो गत्ता उद्यमी हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। पदाधिकारी बलराम अग्रवाल ने बताया कि इस समय कैरोगेटिड बॉक्स इंडस्ट्री की हालत यह है कि कुछ माह के भीतर ही सात यूनिट बंद हो चुकी हैं। 300 उत्पाद यूनिटों पर खतरा मंडरा रहा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जीके सरदाना ने कहा कि कुछ समय से कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। यह वृद्धि अनियंत्रित हो चुकी है। इसे नहीं रोका तो उद्योग बंद हो सकते हैं। बलदेव गोयल ने बताया कि क्राफ्ट पेपर निर्माताओं पर मनमाने ढंग से कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज हिमाचल में तो क्राफ्ट पेपर महंगा दिया जा रहा है जबकि दूसरे राज्यों को यह सस्ता उपलब्ध कराया जा रहा है।
आठ सालों से झेल रहे मनमानी : राणा
बीबीएन इकाई के प्रधान हेमराज चौधरी और महामंत्री अशोक राणा ने कहा कि आठ वर्षों से गत्ता उद्योग पेपर मालिकों की मनमानी झेल रहा है। हर साल सेब सीजन शुरू होने से पहले ही पेपर मिल मालिक जानबूझकर अपनी मिल बंद करके पेपर की कीमतों में वृद्धि कर देते हैं। इसका विरोध कर गत्ता उद्यमी अब सीसीआई में अपील करने के साथ पेपर मिलों के खिलाफ अपना विरोध भी प्रकट करेंगे।
गत्ता पेटी निर्माण में 80 फीसदी क्राफ्ट पेपर
पंजाब का प्रतिनिधित्व कर रहे लुधियाना कैरोगेटिड बाक्स मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने बताया कि एक गत्ता पेटी के निर्माण में 80 फीसदी भूमिका क्राफ्ट पेपर की होती है। क्राफ्ट पेपर की बढ़ती कीमतों के अलावा गोंद की लागत, कर्मचारी, माल की ढुलाई समेत कई तरह के खर्चों में दो वर्षों के दौरान 20 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।
इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो गत्ता पेटी निर्माताओं द्वारा संघर्ष किया जाएगा। एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी आदित्य सूद, परवाणू से दौलतराम ठाकुर, बीबीएन इकाई प्रधान हेमराज चौधरी, अजय जैन, नवीन वत्स, आलोक सिंह, बलजीत सिंह, बलराम अग्रवाल, मनीष और मनमोहन मौजूद रहे।