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नेता जी बताइए कैसे मिलेगा स्वच्छ और पर्याप्त पानी

Mon, 23 Oct 2017 05:13 PM IST
Updated Mon, 23 Oct 2017 05:13 PM IST
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चुनाव पेज लोकल
- फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला ब्यूरो

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सोलन।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शहर की गलियां मापने निकले नेताओं के रास्ते आसान नहीं हैं। शहर में हर घर पर दस्तक देने के साथ ही नेताओं को इस बात का जवाब देना होगा कि पेयजल समस्या का समाधान कैसे होगा। इस बार आश्वासन को घर में रखकर उम्मीदवार को पेयजल समस्या खत्म करने का प्लान लेकर निकलने की जरूरत आन पड़ी है।

पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे शहर के लोग आसानी से किसी उम्मीदवार के झांसे में नहीं आएंगे। विधानसभा चुनाव के लिए नेताओं ने तैयारी की है तो लोग भी सवालों की झड़ी लगाने को तैयार हैं। ऐसे सवाल गूंज रहे हैं जो कई सालों से हल नहीं हो पाए। शहर के लोग लंबे अरसे से साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। महीने में चार से पांच दिन ताजा पानी मिलता है और नगर परिषद इसके एवज में पूरे महीने का बिल मांगती है। शहर में 60 हजार की पंजीकृत आबादी है। अश्वनी और गिरि दो खड्डों से पेयजल सप्लाई की जाती है। लेकिन पानी की मात्रा इतनी कम है कि शहरवासियों को रोजाना पानी नसीब नहीं हो रहा है।
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अब चुनावी बेला में दोनों दलों ने पानी पर जुबानी जंग शुरू कर दी है। शहर को स्वच्छ पानी देने के बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं। शहर के मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे दोनों राजनीतिक दलों ने पानी के एजेंडे को अपने-अपने भाषणों में शामिल कर लिया है। सोलन शहर में पर्याप्त पानी देने के दिलासे मंच से दिए जा रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी और मंत्री धनी राम शांडिल शहर में पानी की क्षमता को बढ़ाने के लिए नई योजना लांच करने की बात कर रहे हैं तो भाजपा प्रत्याशी डॉ. राजेश कश्यप हर वार्ड में पानी का टैंक बनाकर स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की बात लेकर लोगों के बीच पहुंचे हैं।
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नप के जिम्मे क्यों पेयजल सप्लाई
लोगों में इस बात पर भी नाराजगी है कि पानी की सप्लाई सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की जगह नगर परिषद कर रही है। इससे वे सीधे तौर पर विभाग से शिकायत भी नहीं कर पाते हैं और नगरपरिषद सारी शिकायतें विभाग पर डाल देती है। पिछले दिनों क्षेत्रीय अस्पताल का पानी तीन दिन के लिए बंद हो गया था। इससे मरीजों को करीब आधा किलोमीटर दूर पुराने बस स्टैंड से पानी लाना पड़ा। जबकि बरसात में कई दिनों तक सोलन शहर को हफ्ते या 15 दिन में एक बार भी पानी मिलता रहा।

दोनों राजनीतिक दल इस ज्वलंत मुद्दे पर मतदाताओं की नब्ज टटोल चुके हैं। यही वजह है जो अब शहरी मतदाताओं को मनाने के लिए स्वच्छ पानी को मुख्य एजेंडे के रूप में पेश किया जा रहा है। बहरहाल, देखना यह है कि नेता मतदाताओं के पास सिर्फ बातें लेकर पहुंचेंगे या फिर उनके पिटारे में समस्या को दूर करने का कोई मास्टर प्लान सच में है।

आश्वासन से काम नहीं बनेगा : कृष्ण लाल
कृष्ण लाल का कहना है कि जो नेता मूलभूत समस्याओं को हल करने का एजेंडा लेकर आएगा उसका साथ दिया जाएगा। शहर की बहुत सी समस्याएं हैं अब सिर्फ आश्वासन देकर काम नहीं चलेगा।

मास्टर प्लान लाना होगा : राम स्वरूप
राम स्वरूप ने बताया कि सोलन शहर में पेयजल की समस्या आश्वासन से खत्म नहीं होगी। इस बार उम्मीदवार को मास्टर प्लान लाना पड़ेगा। पानी कैसे बढ़ेगा इसकी बात मतदाताओं को समझानी पड़ेगी।


बयानबाजी से नहीं मिलेंगे वोट : ऋचा
ऋचा ने बताया कि किसी भी सूरत में नेताओं के झांसे में नहीं आएंगे। पेयजल की समस्या खत्म होनी चाहिए। लोगों को स्वच्छ पानी मिलना उनका अधिकार है और नेता सिर्फ बयानबाजी से वोट नहीं ले सकते हैं।

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