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दाड़लाघाट के पूर्व सैनिक ने अपने खर्च से बना डाली गौशाला
Updated Tue, 20 Feb 2018 10:13 PM IST
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दाड़लाघाट (सोलन)। सरहद पर तैनात रहकर देश की सेवा करने वाले फौजी ने अब गऊ सेवा को एक अभियान बना दिया है। फौजी अकेला इस मुहिम में चला था लेकिन आज उनके साथ कारवां चल पड़ा है। सड़कों पर खुले घूमने वाले पशुओं को उन्होंने गोशाला बनाकर आश्रय दिया है। बिना सरकारी मदद के वह इस काम को अमलीजामा पहना रहे हैं। यह काम कर रहे हैं दाड़लाघाट के पछिवर गांव के पूर्व सैनिक भरत भूषण गौतम।
उन्होंने अपने जीवन के बेहतरीन 12 साल तीन महीने राष्ट्र सेवा में म्यांमार सरहद पर गुजारे। रिटायर्ड फौजी ने अब पेंशन आने के बाद मेरा मित्र गौ सेवक श्रीराधे कृष्ण समिति का गठन कर बिना सरकारी मदद के गांव में एक गोशाला का निर्माण किया है। इसमें क्षेत्र की सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा, बीमार और चोटिल मवेशियों को आश्रय दिया जा रहा है। गोशाला के निर्माण और मवेशियों के चारे पर ही अभी तक लगभग 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। भूमि उपलब्ध करवाने के अलावा सरकार से कोई आर्थिक मदद अभी तक नहीं मिली है। गोशाला के पंजीकरण की फाइल भी कई महीनों से एसडीएम कार्यालय अर्की में धूल फांक रही है। भरत भूषण गौतम ने गौशाला में आठ कर्मचारी वेतन पर रखे हैं। गौतम की इस पहल के बाद कई युवा समिति से जुड़कर सहयोग करने लगे हैं। क्षेत्र के लोगों में भी फौजी की इस पहल की जमकर प्रशंसा हो रही है। आसपास की लगभग 11 पंचायतों ने भी लिखित में समर्थन दिया है। अब इन पंचायतों से भी घायल और बीमार मवेशियों को लाकर आश्रय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ गोशाला का निर्माण ही समस्या का हल नहीं है बल्कि हर परिवार एक मवेशी को गोद लेना पड़ेगा तभी समस्या से छुटकारा मिलेगा। एसडीएम विवेक चौहान ने कहा कि यह काम सराहनीय है। फाइल को लेकर वह जानकारी लेंगे तथा इस काम को हर हाल में करवाया जाएगा।
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उन्होंने अपने जीवन के बेहतरीन 12 साल तीन महीने राष्ट्र सेवा में म्यांमार सरहद पर गुजारे। रिटायर्ड फौजी ने अब पेंशन आने के बाद मेरा मित्र गौ सेवक श्रीराधे कृष्ण समिति का गठन कर बिना सरकारी मदद के गांव में एक गोशाला का निर्माण किया है। इसमें क्षेत्र की सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा, बीमार और चोटिल मवेशियों को आश्रय दिया जा रहा है। गोशाला के निर्माण और मवेशियों के चारे पर ही अभी तक लगभग 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। भूमि उपलब्ध करवाने के अलावा सरकार से कोई आर्थिक मदद अभी तक नहीं मिली है। गोशाला के पंजीकरण की फाइल भी कई महीनों से एसडीएम कार्यालय अर्की में धूल फांक रही है। भरत भूषण गौतम ने गौशाला में आठ कर्मचारी वेतन पर रखे हैं। गौतम की इस पहल के बाद कई युवा समिति से जुड़कर सहयोग करने लगे हैं। क्षेत्र के लोगों में भी फौजी की इस पहल की जमकर प्रशंसा हो रही है। आसपास की लगभग 11 पंचायतों ने भी लिखित में समर्थन दिया है। अब इन पंचायतों से भी घायल और बीमार मवेशियों को लाकर आश्रय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ गोशाला का निर्माण ही समस्या का हल नहीं है बल्कि हर परिवार एक मवेशी को गोद लेना पड़ेगा तभी समस्या से छुटकारा मिलेगा। एसडीएम विवेक चौहान ने कहा कि यह काम सराहनीय है। फाइल को लेकर वह जानकारी लेंगे तथा इस काम को हर हाल में करवाया जाएगा।
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