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Sirmour News: भरली काॅलेज बचाने के लिए 14 गांवों के युवाओं ने छेड़ा अभियान

Thu, 05 Mar 2026 11:46 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2026 11:46 PM IST
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Youth from 14 villages launched a campaign to save Bharli College.
सोशल मीडिया और घर-घर जाकर दाखिले की कर रहे अपील
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छात्रों की संख्या कम होने के चलते लटकी
पांवटा में पढ़ रहे छात्रों को भरली लौटने की अपील
संवाद न्यूज एजेंसी
कफोटा (सिरमौर)। कम विद्यार्थियों की संख्या के कारण बंद होने के कगार पर खड़े डिग्री कालेज भरली को बचाने के लिए 14 गांवों के युवाओं ने सोशल मीडिया और जनजागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। युवा लोगों के घर-घर जाकर और सोशल मीडिया से माता-पिता से अपील कर रहे हैं कि वे पांवटा काॅलेज में पढ़ रहे अपने बच्चों को वापस लाकर भरली में दाखिला दिलाएं। इससे दूरदराज क्षेत्र में स्थापित काॅलेज के अस्तित्व को बचाया जा सकेगा।
छात्र नरेश, कपिल, रिशभ, नवीन, संजय, अंजलि, कल्पना, रजनी, आशा, सिमरन और अनिल ने बताया कि उनका अभियान कॉलेज को बचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है, ताकि सरकार इसे बंद न करे। छात्रों ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि सरकार ऐसे शिक्षण संस्थानों को बंद कर रही है, जहां विद्यार्थियों की संख्या मापदंडों से कम है।
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युवाओं के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन कर कई परिवार पांवटा साहिब में बस गए हैं। वे अपने बच्चों को भी वहीं पढ़ा रहे हैं। इसके कारण ट्रांसगिरि क्षेत्र के कई शिक्षण संस्थानों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इनमें डिग्री काॅलेज भरली भी शामिल है। युवाओं के अनुसार भरली काॅलेज की स्थापना पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार ने वर्ष 2013 में की थी।
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उन्होंने बताया कि पुनर्सीमांकन के बाद शिलाई विधानसभा क्षेत्र के 14 गांव पांवटा विधानसभा क्षेत्र में शामिल हो गए थे। यहां की भौगोलिक स्थिति शिलाई क्षेत्र से मिलती-जुलती है। यह क्षेत्र पहाड़ों के बीच है। छात्रों ने सरकार से भी मांग की है कि काॅलेज को बंद न किया जाए।

सरकार किसी भी शिक्षण संस्थान को बंद नहीं करना चाहती। यदि किसी संस्थान में विद्यार्थी ही नहीं होंगे तो वहां शिक्षक और प्रोफेसर क्या करेंगे। यदि विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती है तो किसी भी काॅलेज को बंद नहीं किया जाएगा।
-हर्षवर्धन चौहान, उद्योग मंत्री
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