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यमुनाघाट की मस्ती, जिंदगी पर पड़ रही भारी

Sun, 04 Jul 2021 10:48 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jul 2021 10:48 PM IST
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tourist enjoying bathing in yamunaghat  ponta
पांवटा साहिब(सिरमौर)। गुरु की नगरी पांवटा साहिब में पहुंचने वाले श्रद्धालु और पर्यटक पवित्र यमुना स्नान को खूब तरजीह देते हैं लेकिन यमुनाघाट बाहरी प्रदेशों और जिलों के श्रद्धालुओं के लिए जानलेवा साबित होता रहा है। पिछले डेढ़ दशकों से यमुनाघाट और नदी के आसपास स्नान करते हुए चार दर्जन से अधिक हादसे हो चुके हैं लेकिन सुरक्षा को लेकर यहां कोई कदम नहीं उठाए गए।
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हर साल हादसों के बाद महज लकीर पीटी जाती है। इन दिनों गर्मी से बचने के लिए यहां पहुंचने वाले लोग यमुना में स्नान करने के लिए उतर रहे हैं। यहां न तो गोताखोरों की तैनाती हुई है और न ही अन्य कोई इंतजाम किए गए हैं। इस बारे में पांवटा के बुद्धिजीवियों से बात की गई।
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क्या कहते हैं लोग
1. हरि यमुना सहयोग समिति सदस्य विकास वालिया का कहना है कि यमुनाजी के पवित्र स्नान
को खूब भीड़ होती है। बाहरी राज्यों और जिलों से पहुंचने वाले श्रद्धालु जानलेवा खतरे से
अनभिज्ञ होते हैं। जानलेवा भंवर वाले स्थलों तक पहुंच कर हादसों का शिकार होते रहे हैं।
यमुनाघाट पर सरकार और प्रशासन को लोकल गोताखोर तैनाती एवं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
करने चाहिए।
2. गिरिपार के युवा व्यवसायी कंवर ठाकुर का कहना है कि दर्जनों लोग यमुना नदी में स्नान
के दौरान हादसों का शिकार हो चुके हैं। 20 जून को भी 17 और 18 वर्षीय दो युवा डूब कर जान गंवा चुके हैं। इस संवेदनशील हादसों वाले स्थल पर स्नान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर प्रदेश सरकार और प्रशासन को फोकस करना होगा।
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3. पांवटा निवासी रविता का कहना है कि यमुनाघाट में हादसों को रोकना जरूरी है।
यमुनाघाट पर स्नान करने वालों की भीड़ रहती है। एक संस्था ने कुछ लोहे की संगलें लगाई
हैं लेकिन जानलेवा हादसों से बचाव के लिए सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी है। प्रशासन,
नगर परिषद, गुरुद्वारा और मंदिर कमेटी इस स्थल पर पुख्ता इंतजाम पर गंभीरता से कोई
कदम उठाए।
4. नंबरदार मंजूर अली खान मलिक ने कहा कि मानसून में भारी बारिश से नदी का जलस्तर
जानलेवा हो सकता है। इतने हादसों के बाद भी सरकार और प्रशासन कोई गंभीर कदम नहीं
उठा रही है। दर्जनों श्रद्धालु यमुनाघाट पर हादसों के शिकार हो चुके हैं। यमुनाघाट पर
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा व सुरक्षा जरूरी है, अन्यथा हादसे के बाद सिर्फ लकीर पीटने
से कुछ होने वाला नहीं है।
सुरेश तोमर
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