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प्रकृति से छेड़छाड़ का भुगतना पड़ रहा खामियाजा : नाथूराम

Mon, 31 Aug 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 11:55 PM IST
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The consequences of tampering with nature
पांवटा साहिब में पत्रकारों को संबोधित करते हुए समाजसेवी नाथू राम चौहान। संवाद
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पर्यावरणविद् नाथूराम चौहान ने हिमालय के बढ़ते संकट पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने यहां आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि विकास के नाम पर हिमालय का विनाश किया जा रहा है, जिसका खामियाजा आज नेपाल जैसी त्रासदियों के रूप में देखने को मिल रहा है।
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चौहान ने कहा कि लगभग 9 हजार मीटर ऊंचा हिमालय आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। अंधाधुंध पेड़ कटान, पहाड़ों की खोदाई और पर्यावरण के साथ लगातार छेड़छाड़ से तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ मानवीय गतिविधियों ने पहाड़ों को खोखला कर दिया है। यदि समय रहते प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं रोकी गई तो आने वाले समय में इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे।
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नाथूराम चौहान ने केंद्र सरकार से मांग की कि हिमालय के संरक्षण के लिए अलग से हिमालय आयोग का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इसी गति से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता रहा तो आने वाले वर्षों में हिमालय का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। संवाद
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