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गृहकर न देने पर एक हजार परिवारों को नोटिस जारी
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। नगर परिषद पांवटा साहिब में आय कम होने से आर्थिक हालत बिगड़ रही है। गृहकर आय का प्रमुख साधन रहता है लेकिन गृहकर के रूप में ही लगभग आठ करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है। शहर के हजारों लोग गृहकर देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इसका सीधा असर शहर के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। नगर परिषद सरकारी अनुदान पर निर्भर हो गई है। गृहकर नहीं देने वालों की संख्या हजारों में है। अकेले दो वार्डों में ही अब तक एक हजार से अधिक परिवारों को नगर परिषद ने नोटिस जारी किए हैं। शेष वार्डों में भी लंबित गृहकर वसूलने को नोटिस जारी करने की तैयारी है।
पांवटा साहिब नगर परिषद में वर्ष 2001 से गृहकर शुरू किया गया था। रिहायशी भवन और व्यावसायिक संस्थान के अनुसार इसकी दरें तय की गईं। नगर परिषद में कुल 13 वार्ड, 7200 परिवार और 42 हजार से अधिक जनसंख्या है। वर्ष 2019 में नप ने गृहकर के रुप में 16.55 लाख वसूला था। इस वर्ष जनवरी से नवंबर 2020 तक मात्र 10.60 लाख ही वसूल हो पाए। वर्ष 2001 से अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की राशि गृहकर के रूप में फंसी हुई है। निकाय चुनाव के दौरान चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशियों से वसूली जाने वाली गृहकर राशि की औसत सर्वाधिक रहती है क्योंकि बिना गृहकर राशि जमा करवाए चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है। पांवटा नगर परिषद में आय का सबसे प्रमुख साधन गृहकर है।
इसके अलावा करीब 55 लाख वार्षिक राशि दुकानों और किराये के भवनों से एकत्र होती है। नक्शे पास करने की एवज में 18 से 20 लाख आय होती है। हर वर्ष शहरी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पर करीब 3 करोड़, कर्मचारियों के मानदेय पर 2 करोड़ और बिजली बिलों समेत अन्य वार्षिक खर्च 1 करोड़ से अधिक होता है जिसके लिए सरकारी अनुदान राशि पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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उधर, पांवटा नगर परिषद कमेटी के कार्यकारी अधिकारी एसएस नेगी ने बताया कि गृहकर के रूप में करोड़ों रुपये फंसे हैं। अब तक शहरी क्षेत्र के दो वार्डों में एक हजार से अधिक परिवारों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। गृहकर नहीं देने वाले परिवारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। टैक्स नहीं भरा तो आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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पांवटा साहिब नगर परिषद में वर्ष 2001 से गृहकर शुरू किया गया था। रिहायशी भवन और व्यावसायिक संस्थान के अनुसार इसकी दरें तय की गईं। नगर परिषद में कुल 13 वार्ड, 7200 परिवार और 42 हजार से अधिक जनसंख्या है। वर्ष 2019 में नप ने गृहकर के रुप में 16.55 लाख वसूला था। इस वर्ष जनवरी से नवंबर 2020 तक मात्र 10.60 लाख ही वसूल हो पाए। वर्ष 2001 से अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की राशि गृहकर के रूप में फंसी हुई है। निकाय चुनाव के दौरान चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशियों से वसूली जाने वाली गृहकर राशि की औसत सर्वाधिक रहती है क्योंकि बिना गृहकर राशि जमा करवाए चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है। पांवटा नगर परिषद में आय का सबसे प्रमुख साधन गृहकर है।
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इसके अलावा करीब 55 लाख वार्षिक राशि दुकानों और किराये के भवनों से एकत्र होती है। नक्शे पास करने की एवज में 18 से 20 लाख आय होती है। हर वर्ष शहरी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पर करीब 3 करोड़, कर्मचारियों के मानदेय पर 2 करोड़ और बिजली बिलों समेत अन्य वार्षिक खर्च 1 करोड़ से अधिक होता है जिसके लिए सरकारी अनुदान राशि पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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उधर, पांवटा नगर परिषद कमेटी के कार्यकारी अधिकारी एसएस नेगी ने बताया कि गृहकर के रूप में करोड़ों रुपये फंसे हैं। अब तक शहरी क्षेत्र के दो वार्डों में एक हजार से अधिक परिवारों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। गृहकर नहीं देने वाले परिवारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। टैक्स नहीं भरा तो आगामी कार्रवाई की जाएगी।