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सिरमौर में खतरनाक हो गया सफर, दरकने लगे पहाड़

Wed, 04 Aug 2021 12:21 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 12:21 AM IST
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road block in sirmaur due to landslides
रेणुका-संगड़ाह मार्ग पर मलबा गिरने से यातायात हुआ बंद। - फोटो : NAHAN
नाहन (सिरमौर)। बरसात का मौसम सिरमौर जिले में आफत लेकर आया है। जिले में अब तक करीब 37 करोड़ रुपये का कुल नुकसान आंका गया है। लगातार पहाड़ों के दरकने से सफर खतरनाक हो गया है। पांच दिन के भीतर ही सिरमौर में भारी भूस्खलन ने लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। वहीं, नाहन-कुमारहट्टी-शिमला नेशनल हाईवे पर भी पत्थर और मलबा गिरने का क्रम जारी है। इससे सफर खतरनाक हो गया है।
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सिरमौर जिले के पहाड़ दरकने लगे हैं। वर्ष 2018 में पांवटा-शिलाई नेशनल हाईवे पर ही लालढांक के समीप पहाड़ी दरकने से करीब एक महीने यातायात ठप रहा था। अब 30 जुलाई को इसी मार्ग पर कालीढांक के समीप फिर भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी के साथ लगभग 150 मीटर सड़क ढह जाने से यातायात बंद है। पांचवें दिन भी इस मार्ग पर यातायात बहाल नहीं हो पाया। अब रेणुका-संगड़ाह सड़क मार्ग पर भी ऐसा ही एक भूस्खलन हुआ।
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पहाड़ी से पत्थर, चट्टानें और मलबा सड़क पर आने से यातायात बंद हो गया है। इतना ही नहीं, नेशनल हाईवे पर भी लादू के समीप चट्टानें गिरने से यातायात ठप है। शिमला से नाहन आ रहे संजीव ने बताया कि नेशनल हाईवे पर जगह-जगह चट्टानें गिर रही हैं। इससे सफर जोखिमभरा हो गया है। वहीं, अन्य संपर्क मार्गों पर भी सफर करना खतरे से खाली नहीं है। उपायुक्त रामकुमार गौतम ने लोगों से अपील की है कि अति आवश्यक कार्य होने पर ही यात्रा करें और सावधान रहें।
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बॉक्स के लिए--
बाराती पहुंचे घर, रास्ते में फंस गई दुल्हन
संगड़ाह (सिरमौर)। रेणुका जी संगड़ाह मार्ग मंगलवार को पहाड़ी दरकने से अवरुद्ध होने के कारण जहां पर यातायात व्यवस्था बाधित रही वहीं पर दुल्हन और दुल्हन पक्ष के लोग उस पार फंसे रहे। दरअसल, जिला शिमला के कुपवी श्रेत्र से दुल्हन तथा नाहन के मोगीनंद से दूल्हा बारात लेकर ददाहु आया था। शादी समारोह 11 मुखी हनुमान मंदिर खदाल नामक स्थान पर होना तय हुआ था लेकिन, संगड़ाह ददाहू मार्ग अवरुद्ध होने के चलते दुल्हन संगड़ाह की ओर मार्ग के उस पार फंसी रही जिन्हें जंगल के रास्ते से होते हुए कोटी धिमान मार्ग तक पहुंचना पड़ा। जहां से लड़की के मामा एवं दूल्हा पक्ष की गाड़ियां उन्हें लेने पहुंची। मुहूर्त का समय समाप्त होने के कारण पंडित को सायं करीब 4 बजे के मुहूर्त पर विवाह करवाना पड़ा।
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