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Sirmour News: चेक बाउंस के दोषी का एक साल कैद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के मामले में अदालत ने जगत सिंह को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पीड़ित को दो लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने यह फैसला सुनाया। मुआवजा राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला वर्ष 2016 में राज्य को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक की शिलाई शाखा से संबंधित है। शिकायतकर्ता बैंक ने अदालत को बताया कि जगत सिंह ने जनवरी माह में सिंचाई योजना के लिए तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। आरोपी ने नियमित किश्तों में ऋण राशि चुकाने का वचन दिया था, लेकिन वह किश्तों का भुगतान करने में विफल रहा।
वर्ष 2024 में आरोपी ने 1,58,677 रुपये की बकाया राशि चुकाने के लिए बैंक को एक चेक जारी किया। बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण चेक बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई।
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अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा, जबकि शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे साबित कर दिया।
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नाहन (सिरमौर)। चेक बाउंस के मामले में अदालत ने जगत सिंह को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही पीड़ित को दो लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास कपूर ने यह फैसला सुनाया। मुआवजा राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला वर्ष 2016 में राज्य को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक की शिलाई शाखा से संबंधित है। शिकायतकर्ता बैंक ने अदालत को बताया कि जगत सिंह ने जनवरी माह में सिंचाई योजना के लिए तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। आरोपी ने नियमित किश्तों में ऋण राशि चुकाने का वचन दिया था, लेकिन वह किश्तों का भुगतान करने में विफल रहा।
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वर्ष 2024 में आरोपी ने 1,58,677 रुपये की बकाया राशि चुकाने के लिए बैंक को एक चेक जारी किया। बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त धनराशि के कारण चेक बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस देने के बावजूद आरोपी ने न तो रकम लौटाई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई।
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अदालत ने फैसले में कहा कि आरोपी अपना पक्ष साबित करने में असफल रहा, जबकि शिकायतकर्ता ने मामले को संदेह से परे साबित कर दिया।