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पातलेश्वर मंदिर परिसर में रसोई कक्ष तोड़ने पर मचा बवाल

Thu, 12 Jan 2017 10:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नाहन
ब्यूरो/अमर उजाला, नाहन Updated Thu, 12 Jan 2017 10:47 PM IST
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पांवटा साहिब स्थित पातलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में रसोई कक्ष की छत वन विभाग की ओर से तोड़े जाने से बवाल खड़ा हो गया है। वन विभाग की टीम पातलेश्वर महादेव मंदिर को वन भूमि पर बताते हुए हाईकोर्ट के निर्देश पर कब्जा छुड़वाने पहुंची थी। टीम ने बुधवार को ही शिव मंदिर के रसोईकक्ष की छत उखाड़ फेंकी। इस दौरान मंदिर कमेटी सदस्य, श्रद्धालु या कोई भी ग्रामीण उपस्थित नहीं था।

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जैसे ही वन विभाग की कार्रवाई की भनक शिव भक्तों को लगी, सैकड़ों लोग मंदिर में एकत्रित हो गए। उसके बाद विभाग की टीम को आगे कार्रवाई बंद करनी पड़ी। देखते ही देखते शिव भक्तों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि वन विभाग की टीम को वापस जाना पड़ा। हालांकि वन विभाग ने प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों पर यह कार्रवाई की, लेकिन मंदिर के हिस्से को तोड़ने पर लोग भड़क गए। लोगों ने इसे उनकी आस्था को ठेस करार दिया। विभागीय कार्रवाई से भड़के लोगों ने कहा कि इस मामले में अभी कोई कार्रवाई न की जाए।
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विभाग के खिलाफ नारेबाजी
वीरवार को वन विभाग की कार्रवाई के खिलाफ शिवभक्तों ने जमकर नारेबाजी की। इस दौरान शिवभक्तों ने एसडीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार को एक ज्ञापन भी भेजा। लोगों का कहना है कि यह मामला डिविजनल कमिश्नर के पास विचाराधीन है। इसलिए मामले में फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
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श्री पातलेश्वर महादेव मंदिर सभा के अध्यक्ष दाता राम ने बताया कि विभाग की इस कार्रवाई से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई है। लोग किसी भी कीमत पर मंदिर व मंदिर के अन्य हिस्सों को नहीं गिराने देंगे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि आगे इस कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। साथ ही प्रशासन को चेतावनी दी है कि मंदिर के किसी भी हिस्से को नुकसान पहुंचाया गया तो शिव भक्त आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
 
हाईकोर्ट में दायर की गई थी याचिका
पातलेश्वर मंदिर के एक पुराने पुजारी ने हाईकोर्ट में याचिका दर्ज की थी। याचिकाकर्ता ने समिति पर मंदिर के पैसों के हिसाब में गड़बड़ी के अलावा समिति द्वारा वन विभाग की जमीन हथियाने के आरोप लगाए थे। हालांकि मंदिर में पैसों के हिसाब को लेकर प्रदेश उच्च न्यायालय समिति को पहले ही क्लीन चिट दे चुका है।

उधर, मंदिर समिति ने बताया यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और 1980 में बने फोरेस्ट एक्ट के तहत मंदिर की जमीन नहीं आती। प्रधान दाता राम, विनय गोयल, हर्ष गोयल, विजेश गोयल, सोहन कपूर, मोहन सिंह, दीपक भंडारी, हरमिंदर, अमित गुप्ता, रंगीलाल, अजय, धर्मवीर सिंह आदि सैकड़ो़ भक्तों ने बताया कि इस संबंध में डिविजनल कमिश्नर के पास भी मामला विचाराधीन है।


मंदिर का हिस्सा टूटने से भड़के लोगों ने आरोप लगाया कि यह वन विभाग की मनमानी है, जिसे कतई सहन नहीं किया जाएगा। उधर, पांवटा डीएफओ रहे एसएस राणा ने बताया कि मंदिर से बाहर एक अन्य हिस्से से कब्जा हटाने के विभागीय निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि कब्जा हटाने के आदेश उच्च न्यायालय से प्राप्त हुए हैं।

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