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कालाअंब में डेंगू का खतरा बरकरार, एक दर्जन मामले आए सामने
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One dozen cases of dengue in Kalaamb
संजय गुप्ता
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में डेंगू का खतरा अभी टला नहीं है। इसका मुख्य कारण लोगों में जागरूकता का अभाव एवं स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही है। लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के पास डेंगू के कम मामले आ रहे हैं।
वहीं अधिकांश लोग दूसरे राज्यों के निजी अस्पतालों में इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुल मिलाकर कालाअंब इलाके में एक दर्जन से अधिक मामले अभी तक सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ मामले स्वास्थ्य विभाग के पास आए हैं, जबकि कुछ मामले निजी अस्पतालों में सामने आए हैं।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को डेंगू के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। बावजूद इसके लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। यहां तक कि खांसी, जुकाम और बुखार होने पर किसी योग्य चिकित्सक के पास न जाकर नीम हकीमों से इलाज करवाकर खतरा मोल ले रहे हैं।
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डेंगू रोगियों के परिजन पपीते के पत्तों और बकरी के दूध के लिए यहां से वहां भटक रहे हैं। नीम हकीमों से आराम न मिलने और हालत गंभीर होने के बाद ही लोग सरकारी व निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में डेंगू पर काबू पाया जाना मुख्य समस्या बना हुआ है।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनीषा अग्रवाल ने बताया कि कोरोना और डेंगू दोनों की रोकथाम के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है। बुखार आदि की अवस्था में सिर्फ पैरासिटामोल दवा के प्रयोग के अलावा किसी अन्य दवा का प्रयोग योग्य चिकित्सक के परामर्श के बिना न करें। घरों में पानी को ढक कर रखें और घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। पूरे कपड़े पहनें। मास्क का प्रयोग अवश्य करें।
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कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में डेंगू का खतरा अभी टला नहीं है। इसका मुख्य कारण लोगों में जागरूकता का अभाव एवं स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही है। लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के पास डेंगू के कम मामले आ रहे हैं।
वहीं अधिकांश लोग दूसरे राज्यों के निजी अस्पतालों में इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुल मिलाकर कालाअंब इलाके में एक दर्जन से अधिक मामले अभी तक सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ मामले स्वास्थ्य विभाग के पास आए हैं, जबकि कुछ मामले निजी अस्पतालों में सामने आए हैं।
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हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को डेंगू के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। बावजूद इसके लोग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। यहां तक कि खांसी, जुकाम और बुखार होने पर किसी योग्य चिकित्सक के पास न जाकर नीम हकीमों से इलाज करवाकर खतरा मोल ले रहे हैं।
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डेंगू रोगियों के परिजन पपीते के पत्तों और बकरी के दूध के लिए यहां से वहां भटक रहे हैं। नीम हकीमों से आराम न मिलने और हालत गंभीर होने के बाद ही लोग सरकारी व निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में डेंगू पर काबू पाया जाना मुख्य समस्या बना हुआ है।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनीषा अग्रवाल ने बताया कि कोरोना और डेंगू दोनों की रोकथाम के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जाता है। बुखार आदि की अवस्था में सिर्फ पैरासिटामोल दवा के प्रयोग के अलावा किसी अन्य दवा का प्रयोग योग्य चिकित्सक के परामर्श के बिना न करें। घरों में पानी को ढक कर रखें और घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। पूरे कपड़े पहनें। मास्क का प्रयोग अवश्य करें।