फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Sirmour News ›   no bed facility in medical college nahan

Sirmour News: वायरल संक्रमण से मेडिकल कॉलेज में बढ़ा मरीजों का दबाव, खुली व्यवस्थाओं की पोल

Mon, 14 Sep 2026 12:15 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 12:15 AM IST
विज्ञापन
no bed facility in medical college nahan
मेडिकल कॉलेज के महिला मेडिकल वार्ड में उपचाराधीन मरीज। संवाद
ग्राउंड रिपोर्ट --
विज्ञापन


-महिला मेडिकल वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीज, प्रसूता वार्ड में बरामदों तक लगाए बेड
-नए भवन का निर्माण चार साल से बंद, पुराने भवन में क्षमता से अधिक मरीजों से व्यवस्थाएं चरमराईं
-सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड सुविधा डेढ़ माह से ठप, निजी केंद्रों का रुख करने को मजबूर मरीज

चंद्र ठाकुर

नाहन (सिरमौर)। वायरल संक्रमण, खांसी और बुखार के मामले बढ़ने के साथ डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। रोजाना एक हजार से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। मेडिसिन और बाल रोग विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ है। वार्डों में भी क्षमता से अधिक मरीज भर्ती होने से हालात बिगड़ रहे हैं।
महिला मेडिकल वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है। वहीं प्रसूता वार्ड में जगह कम पड़ने पर वार्ड के बाहर बरामदों तक बेड लगाने पड़े हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद अस्पताल का बुनियादी ढांचा लंबे समय से जस का तस है। नए भवन का निर्माण कार्य करीब चार वर्षों से बंद पड़ा है।
विज्ञापन

ऐसे में मेडिकल कॉलेज का संचालन पुराने क्षेत्रीय अस्पताल भवन में ही किया जा रहा है। सीमित जगह में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या के कारण वार्डों से लेकर ओपीडी तक दबाव बढ़ गया है। वायरल संक्रमण और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने का सीधा असर मेडिसिन और बाल रोग विभाग पर पड़ा है। महिला मेडिकल वार्ड में एक बेड पर दो मरीजों का उपचार किए जाने से मरीजों को पर्याप्त जगह तक नहीं मिल पा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रसूता वार्ड में भी स्थिति बेहतर नहीं है। वार्ड के भीतर जगह कम पड़ने पर बरामदों तक बेड लगाने पड़े हैं। एक ही स्थान पर अधिक मरीजों के रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका है। खासकर वायरल और मौसमी बीमारियों के बीच अस्पताल में भीड़ संक्रमण नियंत्रण की चुनौती को और बढ़ा रही है।
पुराने भवन की स्थिति भी मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुरूप नहीं है। बरसात के दौरान कई स्थानों पर पानी टपकने की समस्या सामने आती है। सीमित जगह, बढ़ती ओपीडी और वार्डों में अतिरिक्त मरीजों के कारण अस्पताल प्रबंधन के लिए व्यवस्थाओं को सुचारू रखना चुनौती बनता जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड सुविधा भी करीब डेढ़ माह से ठप पड़ी है। 31 जुलाई को रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद एक विशेषज्ञ के पदोन्नति के बाद स्थानांतरण और दूसरे के इस्तीफे से विभाग पर ताला लटक गया है। इसका सीधा असर जांच सेवाओं पर पड़ा है।
बहरहाल, मेडिकल कॉलेज में बढ़ते मरीजों का दबाव केवल बेड की कमी तक सीमित नहीं है। ओपीडी, वार्ड, जांच और विशेषज्ञ सेवाओं पर एक साथ दबाव बढ़ रहा है। बहरहाल, नए भवन का निर्माण ठप होना और रेडियोलॉजी जैसी अहम जांच सुविधाओं का बंद रहना जहां व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार और जन प्रतिनिधियों के लचर रवैये की भी पोल खोल रहा है।

मेडिकल कॉलेज की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेणु चौहान ने बताया कि इन दिनों वायरल संक्रमण के चलते अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने माना कि भवन और सुविधाओं की कमी के कारण अस्पताल के संचालन में दिक्कतें आती हैं।---
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed