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Sirmour News: कर्मचारियों पर बढ़ रहा काम का बोझ, ऊपर से लटकाए जा रहे वित्तीय लाभ
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कर्मचारी-शासन
कर्मचारियों पर बढ़ रहा काम का बोझ, ऊपर से लटकाए जा रहे वित्तीय लाभ
महंगाई भत्ते की किश्तें और वेतनमान व महंगाई भत्ते का एरियर न मिलने पर रोष
विद्यालय प्रवक्ता संघ सिरमौर ने वित्तीय लाभ शीघ्र जारी करने की उठाई मांग
बोले, घोषणाओं की इंतजार में बैठक कर्मचारियों के हाथ लगी घोर निराशा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में जहां पुरानी पेंशन बहाल करके कर्मचारी हितैषी सरकार का परिचय दिया, वहीं अब वित्तीय मामलों के लटकने के कारण कर्मचारियों में निराशा बढ़ने लगी हैं। इसी संदर्भ में विद्यालय प्रवक्ता संघ जिला सिरमौर ने कहा कि हिमाचल दिवस पर प्रदेश के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की लटकी हुई पिछली किस्तों, नए वेतनमान एरियर और अन्य भत्तों के संबंध में महत्वपूर्ण घोषणा की उम्मीद थी लेकिन उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी।
प्रवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, महासचिव डॉ. आईडी राही, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, कोषाध्यक्ष विजय वर्मा, कार्यकारिणी सदस्य सतीश शर्मा, महिला विंग की संध्या चौहान, राम शर्मा, भावना साथी, पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश नेगी, पूर्व महासचिव संजय शर्मा, लाल सिंह ठाकुर, विशाल शर्मा, राजेश शर्मा, प्रेम सिंह, देवराज कन्याल आदि ने ऑनलाइन चर्चा कर एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि जहां विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ बढ़ता जा रहा हैं वहीं वेतन और भत्तों संबंधी मामलों के लंबे समय से लटकाए जाने से असंतोष भी बढ़ता जा रहा है।
इसका विपरीत असर कर्मचारियों की कार्यशैली और दक्षता पर पड़ने की आशंका बढ़ने लगी है जो प्रदेश हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में प्रदेश सरकार को शीघ्र ही कर्मचारियों के वित्तीय लाभों को जारी करना चाहिए।
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गौरतलब हैं कि जहां अभी तक 2016 में बढ़े वेतनमान की केवल एक ही किश्त जारी की गई हैं वहीं जुलाई 2023 से जुलाई 24 तक की महंगाई भत्ते की तीन किस्तें लटकी पड़ी हैं, जबकि जनवरी 2025 से चौथी किस्त भी जारी होनी है। इसके अतिरिक्त महंगाई भत्ते की पिछली किस्तों के एरियर पिछली सरकार के कार्यकाल से भी लंबित पड़े हैं।
शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि बेशक वह मुख्यमंत्री की आर्थिक हालात को सुधारने के प्रयासों में सहयोग के लिए तैयार है और यह भी चाहते हैं कि आर्थिक मामलों में प्रदेश आत्मनिर्भर हो लेकिन इसके लिए केवल कर्मचारियों के उचित लाभों को लटकाए जाने की जगह कुशल वित्तीय प्रबंधन से अन्य विकल्पों को तलाशने की आवश्यकता हैं।
-- -संवाद
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कर्मचारियों पर बढ़ रहा काम का बोझ, ऊपर से लटकाए जा रहे वित्तीय लाभ
महंगाई भत्ते की किश्तें और वेतनमान व महंगाई भत्ते का एरियर न मिलने पर रोष
विद्यालय प्रवक्ता संघ सिरमौर ने वित्तीय लाभ शीघ्र जारी करने की उठाई मांग
बोले, घोषणाओं की इंतजार में बैठक कर्मचारियों के हाथ लगी घोर निराशा
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली ही बैठक में जहां पुरानी पेंशन बहाल करके कर्मचारी हितैषी सरकार का परिचय दिया, वहीं अब वित्तीय मामलों के लटकने के कारण कर्मचारियों में निराशा बढ़ने लगी हैं। इसी संदर्भ में विद्यालय प्रवक्ता संघ जिला सिरमौर ने कहा कि हिमाचल दिवस पर प्रदेश के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की लटकी हुई पिछली किस्तों, नए वेतनमान एरियर और अन्य भत्तों के संबंध में महत्वपूर्ण घोषणा की उम्मीद थी लेकिन उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी।
प्रवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर, महासचिव डॉ. आईडी राही, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, कोषाध्यक्ष विजय वर्मा, कार्यकारिणी सदस्य सतीश शर्मा, महिला विंग की संध्या चौहान, राम शर्मा, भावना साथी, पूर्व जिला अध्यक्ष रमेश नेगी, पूर्व महासचिव संजय शर्मा, लाल सिंह ठाकुर, विशाल शर्मा, राजेश शर्मा, प्रेम सिंह, देवराज कन्याल आदि ने ऑनलाइन चर्चा कर एक संयुक्त वक्तव्य में कहा कि जहां विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ बढ़ता जा रहा हैं वहीं वेतन और भत्तों संबंधी मामलों के लंबे समय से लटकाए जाने से असंतोष भी बढ़ता जा रहा है।
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इसका विपरीत असर कर्मचारियों की कार्यशैली और दक्षता पर पड़ने की आशंका बढ़ने लगी है जो प्रदेश हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में प्रदेश सरकार को शीघ्र ही कर्मचारियों के वित्तीय लाभों को जारी करना चाहिए।
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गौरतलब हैं कि जहां अभी तक 2016 में बढ़े वेतनमान की केवल एक ही किश्त जारी की गई हैं वहीं जुलाई 2023 से जुलाई 24 तक की महंगाई भत्ते की तीन किस्तें लटकी पड़ी हैं, जबकि जनवरी 2025 से चौथी किस्त भी जारी होनी है। इसके अतिरिक्त महंगाई भत्ते की पिछली किस्तों के एरियर पिछली सरकार के कार्यकाल से भी लंबित पड़े हैं।
शिक्षक प्रतिनिधियों ने कहा कि बेशक वह मुख्यमंत्री की आर्थिक हालात को सुधारने के प्रयासों में सहयोग के लिए तैयार है और यह भी चाहते हैं कि आर्थिक मामलों में प्रदेश आत्मनिर्भर हो लेकिन इसके लिए केवल कर्मचारियों के उचित लाभों को लटकाए जाने की जगह कुशल वित्तीय प्रबंधन से अन्य विकल्पों को तलाशने की आवश्यकता हैं।