{"_id":"65c0d6a0c6e4602ff600d019","slug":"holticulture-expert-advise-to-maintain-plants-nahan-news-c-177-1-ssml1027-117964-2024-02-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: आम-लीची, नींबू और अमरूद के पौधों में करें तौलिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: आम-लीची, नींबू और अमरूद के पौधों में करें तौलिया
Mon, 05 Feb 2024 11:02 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरमौर
Updated Mon, 05 Feb 2024 11:02 PM IST
विज्ञापन
आम-लीची, नींबू और अमरूद के पौधों में करें तौलिया
क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधन केंद्र धौलाकुआं ने दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिले में पर्याप्त बारिश के बाद बागवानों के लिए क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं ने जरूरी सलाह जारी की है। बागवानी विशेषज्ञों ने आम, लीची, नींबू प्रजातीय (नींबू, किन्नू, संतरा और माल्टा आदि) और अमरूद के पौधों में तौलिये तैयार करने की सलाह दी है। तौलिये बनाते समय 60 किलोग्राम गली-सड़ी गोबर की खाद को मिलाएं। क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं के एसोसिएट निदेशक डा. विशाल सिंह राणा ने बताया कि बारिश होने के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी है। लिहाजा, पूर्ण रूप से विकसित फलदार पौधों में 700 ग्राम यूरिया, 3.0 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 1.0 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश डालें। खाद और उर्वरकों का प्रयोग मुख्य तने से एक फीट दूरी पर करें। उन्होंने बताया कि सूखी, रोगग्रस्त और कीड़ों से प्रभावित टहनियों की कांट-छांट करके उन्हें बगीचे से बाहर ले जाकर नष्ट करें और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम/प्रति लीटर) का छिड़काव करें। फलदार पौधों के तनों पर चूने की पोताई करें, ताकि आगामी ग्रीष्म ऋतु में कैंकर नामक बीमारी से बचा जा सके।
विज्ञापन
क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधन केंद्र धौलाकुआं ने दी सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिले में पर्याप्त बारिश के बाद बागवानों के लिए क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं ने जरूरी सलाह जारी की है। बागवानी विशेषज्ञों ने आम, लीची, नींबू प्रजातीय (नींबू, किन्नू, संतरा और माल्टा आदि) और अमरूद के पौधों में तौलिये तैयार करने की सलाह दी है। तौलिये बनाते समय 60 किलोग्राम गली-सड़ी गोबर की खाद को मिलाएं। क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं के एसोसिएट निदेशक डा. विशाल सिंह राणा ने बताया कि बारिश होने के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी है। लिहाजा, पूर्ण रूप से विकसित फलदार पौधों में 700 ग्राम यूरिया, 3.0 किलोग्राम सिंगल सुपर फास्फेट और 1.0 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश डालें। खाद और उर्वरकों का प्रयोग मुख्य तने से एक फीट दूरी पर करें। उन्होंने बताया कि सूखी, रोगग्रस्त और कीड़ों से प्रभावित टहनियों की कांट-छांट करके उन्हें बगीचे से बाहर ले जाकर नष्ट करें और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (3 ग्राम/प्रति लीटर) का छिड़काव करें। फलदार पौधों के तनों पर चूने की पोताई करें, ताकि आगामी ग्रीष्म ऋतु में कैंकर नामक बीमारी से बचा जा सके।