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Sirmour News: गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी हिंदी को दिया जाए विशेष बढ़ावा
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सविता भारद्वाज, शिक्षक। हिंदी दिवस परिचर्चा।
हिंदी दिवस विशेष-- -
सचित्र-- -
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। भारत माता के माथे की बिंदी, हिंदुस्तान की शान है हिंदी...। किसी कवयित्री की यह पंक्तियां आज भी हिंदी प्रेमियों के जहन में गूंज रही हैं। हिंदी प्रेमी शहरवासियों का कहना है कि वह चाहते हैं कि हिंदी जैसी खूबसूरत भाषा पूरे हिंदुस्तान की प्रमुख भाषा बने। इसके लिए सरकार भी कोशिश कर रही है लेकिन अब हमें हिंदी पखवाड़े की औपचारिकता से आगे बढ़कर इसे राजभाषा के साथ-साथ राष्ट्रीय भाषा का भी दर्जा देना होगा। इससे यह देश के लिए गौरव की भाषा बन सकती है।
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विश्व में सिरमौर बनना है तो हिंदी करनी होगी मजबूत
शिक्षक सविता भारद्वाज ने कहा कि भाषा का सीधा संबंध संस्कार और सभ्यता से है। विश्व में जितने भी देश अग्रणी हैं, वह अपनी भाषा की वजह से ही है। यदि हमें भारत को विश्व में सिरमौर बनाना है तो हिंदी को अधिक मजबूत करना होगा।
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गैर भाषी हिंदी क्षेत्रों में दिया जाए बढ़ावा
अधिवक्ता शकील अहमद शेख ने कहा कि हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रसार में कोई कमी नहीं है। जरूरत गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रसार पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा राजस्व रिकॉर्ड, न्यायालयों की भाषा भी सरल हिंदी की जानी चाहिए।
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सभी को मिलकर तलाशनी होगी संभावनाएं
शिक्षक रजनी कश्यप ने कहा कि सभी को मिलकर इस पर सोचना पड़ेगा कि राष्ट्र और भाषा हिंदी की उन्नति कैसे संभव है। इसमें रोजगार परक शिक्षा और रोजगार की संभावना कैसे तलाशना है। हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है, जो पूरे देश को सूत्रबद्ध कर सकती है।
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हिंदी को मिले राष्ट्रभाषा का दर्जा
युवा यश चौहान ने कहा कि हिंदी एक बहुत खूबसूरत भाषा है। इसमें आसानी से संवाद किया जा सकता है। हिंदी को कई राज्यों में राजभाषा का दर्जा मिला है। यदि इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाए तो यह पूरे देश के लिए गौरव की भाषा बन सकती है। संवाद-- -- -- -- --
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सचित्र
पंकज तन्हा
नाहन (सिरमौर)। भारत माता के माथे की बिंदी, हिंदुस्तान की शान है हिंदी...। किसी कवयित्री की यह पंक्तियां आज भी हिंदी प्रेमियों के जहन में गूंज रही हैं। हिंदी प्रेमी शहरवासियों का कहना है कि वह चाहते हैं कि हिंदी जैसी खूबसूरत भाषा पूरे हिंदुस्तान की प्रमुख भाषा बने। इसके लिए सरकार भी कोशिश कर रही है लेकिन अब हमें हिंदी पखवाड़े की औपचारिकता से आगे बढ़कर इसे राजभाषा के साथ-साथ राष्ट्रीय भाषा का भी दर्जा देना होगा। इससे यह देश के लिए गौरव की भाषा बन सकती है।
विश्व में सिरमौर बनना है तो हिंदी करनी होगी मजबूत
शिक्षक सविता भारद्वाज ने कहा कि भाषा का सीधा संबंध संस्कार और सभ्यता से है। विश्व में जितने भी देश अग्रणी हैं, वह अपनी भाषा की वजह से ही है। यदि हमें भारत को विश्व में सिरमौर बनाना है तो हिंदी को अधिक मजबूत करना होगा।
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गैर भाषी हिंदी क्षेत्रों में दिया जाए बढ़ावा
अधिवक्ता शकील अहमद शेख ने कहा कि हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रसार में कोई कमी नहीं है। जरूरत गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रसार पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा राजस्व रिकॉर्ड, न्यायालयों की भाषा भी सरल हिंदी की जानी चाहिए।
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सभी को मिलकर तलाशनी होगी संभावनाएं
शिक्षक रजनी कश्यप ने कहा कि सभी को मिलकर इस पर सोचना पड़ेगा कि राष्ट्र और भाषा हिंदी की उन्नति कैसे संभव है। इसमें रोजगार परक शिक्षा और रोजगार की संभावना कैसे तलाशना है। हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है, जो पूरे देश को सूत्रबद्ध कर सकती है।
हिंदी को मिले राष्ट्रभाषा का दर्जा
युवा यश चौहान ने कहा कि हिंदी एक बहुत खूबसूरत भाषा है। इसमें आसानी से संवाद किया जा सकता है। हिंदी को कई राज्यों में राजभाषा का दर्जा मिला है। यदि इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाए तो यह पूरे देश के लिए गौरव की भाषा बन सकती है। संवाद

सविता भारद्वाज, शिक्षक। हिंदी दिवस परिचर्चा।

सविता भारद्वाज, शिक्षक। हिंदी दिवस परिचर्चा।