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अमरकोट में फूट-फूट कर रोई मां की ममता

Sat, 20 Jan 2018 10:21 PM IST
Updated Sat, 20 Jan 2018 10:21 PM IST
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अमरकोट में फूट-फूट कर रोई मां की ममता
कुत्तों का झुंड - फोटो : demo pic
----------भोर होते ही धमेंद्र और सुनीता दिहाड़ी लगाने खेत को निकल गए। वह पेशे से औद्योगिक इकाई में मजदूरी करते हैं। सुबह-शाम और छुट्टी वाले दिन लोगों के खेतों में दिहाड़ी लगाकर भी अतिरिक्त धन जुटाने की जुगत में हैं लेकिन शनिवार की सुबह उनके लिए ऐसे जख्म लाई जो उम्रभर के लिए उनका नासूर बन जाएगा। आवारा कुत्तों के झुंड ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पलभर में छीन ली।
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यह घटना दिल दहलाने वाली तो है ही लेकिन सरकारी और प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर कर रही है। शहर की गलियों में घूमते आवारा कुत्ते और बंदर लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं। बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने के तमाम दावे धरातल पर धराशाही हो गए हैं। नाहन शहर में पिछले वर्ष बंदरों की आपसी छटपटाहट में एक ईंट का टुकड़ा महिला पर गिर गया और उसकी मौत हो गई। लिहाजा, समय रहते बंदरों और आवारा कुत्तों की बढ़ती फौज की समस्या के समाधान बारे सरकार और प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।
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-----प्रस्तुति: संजय भारद्वाज और सुरेश तोमर।
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अमर उजाला ब्यूराो

पांवटा साहिब (सिरमौर)।
साहब..., मेरा जिगर का टुकड़ा था विशाल। विक्की अब कभी वापस नहीं आएगा। ऐसे कैसे कहां चला गया मेरे जिगर का टुकड़ा, मेरा मासूम लाडला...। अमरकोट में अपना मासूम बेटा खोने के बाद मां की ममता फूट-फूट कर रोई। खेत में मासूम बच्चे के नन्हे-नन्हे पांव की चप्पल देख हर किसी का दिल पसीज गया।

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मां कभी चप्पल की ओर देख रही थी तो कभी बेसुध होकर जमीन पर गिर रही थी। कह रही थी...ये क्या हो गया। मेरे हंसते-खेलते बेटे को कौन निगल गया। अरे, कोई कुछ तो बताओ, मेरा लाडला मुझे वापस ला दो। आदमखोर कुत्तों के झुंड के हमले में सात साल के मासूम विक्की की मौत के बाद अमरकोट का मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला था। जो भी वहां पहुंचा उसके रोंगटे खड़े हो गए।


बेटे की मौत के बाद पीड़ित मां सुनीता के आंसू रोके नहीं रुक रहे। वह कभी गम में डूब कर सिसकियां, तो कभी एकटक आसमान निहार कर बेसुध हो रही है। उत्तर प्रदेश के जिला पीलीभीत के ग्राम रफियापुर निवासी धर्मेंद्र कुमार(30) व उनकी पत्नी सुनीता (27) पिछले 8 वर्षों से पांवटा के औद्योगिक इकाई में कार्यरत हैं। दंपति के पास सबसे बड़ा बेटा विक्रम उर्फ विक्की(7), मुन्नी(4) और दो वर्ष का छोटा बेटा है। प्रवासी दंपति काफी मेहनतकश है। कड़ी मेहनत कर बच्चों के भविष्य के लिए धन जुटा रहे हैं। उन्हें क्या मालूम था कि भाग्य उनके साथ कुछ और ही खेल खेलने वाला है।

जिन बच्चों के लिए वह पसीना बहा रहे हैं, वह इस तरह उनसे दूर हो जाएगा।
सुनीता ने कहा कि विक्की स्कूल जाता था। वह शनिवार को गांव में दिहाड़ी मजदूरी पर निकले थे। इसलिए बेटा घर में छोटे बेटे की देखभाल के लिए घर पर ही रुक गया। खेतों की तरफ आने के दौरान आवारा कुत्तों ने उसे हमसे हमेशा के लिए छीन लिया। आदमखोर कुत्तों को कोई मारता क्यों नहीं? इस तरह किसी और मां से उसके मासूम बच्चों को न छीने।
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पहले भी हमला कर चुके हैं कुत्ते
पांवटा साहिब (सिरमौर)। ग्राम पंचायत अमरकोट प्रधान राकेश महरालू व पूर्व प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि आदमखोर आवारा कुत्तों से पूरी पंचायत में दहशत है। गांव में आवारा कुत्तों ने 7 वर्षीय विशाल को मौत के घाट उतार दिया।
पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि गांव में एक दर्जन से अधिक आवारा कुत्ते हैं। पिछले वर्ष कुत्ते बकरियों व गोवंश को भी शिकार बना चुके है। इस बारे में कई बार आवाज भी उठाई गई लेकिन ज्यादा गंभीरता से लिया ही नहीं गया। शिकायत गंभीरता से ली होती तो यह दर्द विदारक घटना न होती। अब, यह आवारा कुत्ते आदमखोर हो चुके हैं जिससे ग्रामीण-परिजन बच्चों को घर से बाहर खेलने भेजने से भी कतराने लगे हैं। शनिवार को वारदात के बाद अधिकतर अभिभावक खुद स्कूल पहुंच कर बच्चों को घर लेकर आए। पंचायत प्रधान राकेश महरालू ने कहा कि आदमखोर कुत्तों से निजात नहीं दिलाई गई, तो विरोध स्वरूप सड़कों पर उतरेंगे। इसके लिए प्रशासन सख्त कदम उठाएं। प्रशासन से ठोस कदम नहीं उठाए तो ग्रामीण मिलकर स्वयं कुत्तों को मौत के घाट उतार देंगे।


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शिकारियों की तरफ झपट पड़ते हैं आवारा कुत्ते
पांवटा साहिब (सिरमौर)। अमरकोट निवासी श्रवण कुमार, इस्लाम, सोनू, राजा व विजय ने कहा कि आवारा कुत्तों की दहशत है। जंगली जानवरों से ज्यादा भय लोगों को इन आवारा कुत्तों से लगने लगा है। अब ये कुत्ते आदमखोर हो चुके हैं। ग्रामीणों ने कहा कि मवेशियों पर शिकारी की तरह एक साथ कुत्ते झपटते हैं। कोई ग्रामीण छुड़ाने का प्रयास करता है तो काटने को दौड़ते हैं। अमरकोट क्षेत्र में आवारा कुत्तों की दहशत है।
 

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