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सिरमौर पुलिस ने 13 साल बाद दबोचा पत्नी का हत्यारा पति
Updated Wed, 30 May 2018 12:04 AM IST
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- फोटो : डेमो
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
हत्या के एक मामले को सुलझाने के लिए सिरमौर पुलिस को एक माह में वह सब करना पड़ा, जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी न हो। पुलिस कर्मी न केवल भिखारी बने, रेहड़ी भी चलानी पड़ी। यही नहीं हत्या के आरोपी का सुराग जुटाने के लिए घुमंतू की भूमिका भी निभानी पड़ी। भले ही यह सब फिल्मी अंदाज में लगता हो लेकिन शतप्रतिशत सत्य है। पुलिस दल की कड़ी मेहनत व कर्तव्य परायणता ने सोमवार की शाम को उसे अंजाम तक भी पहुंचा दिया।
यहां बात हो रही है 13 साल पुराने हत्या के एक मामले की। युवा एसपी सिरमौर रोहित मालपानी के दिशा-निर्देश में पुलिस दल ने पांच माह के भीतर ही इस मामले में उद्घोषित अपराधी को ऋषिकेष के रेलवे स्टेशन से धर दबोचा। 10 मई 2005 को पांवटा साहिब में बिहार के मुढ़िया गांव (जिला दरभंगा) के रहने वाले संजय साहनी पर पत्नी की हत्या का मामला दर्ज हुआ था। हत्यारा पत्नी के साथ ही पांवटा साहिब में मजदूरी करने पहुंचा था।
पत्नी को ठिकाने लगाने केे बाद फरार हुआ आरोपी कभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। 2008 में संजय सहानी को उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया। साथ ही कोर्ट में अनट्रेस रिपोर्ट पेश कर दी गई थी। 2008 से 2013 के बीच भगौड़े को दबोचने के लिए कई बार पुलिस ने बिहार, झारखंड व उड़ीसा में दबिश दी लेकिन असफलता ही हाथ लगी।
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इसी साल जनवरी माह में अनट्रेस रिपोर्ट को रि-ओपन कर दिया। युवा एसपी रोहित मालपानी ने एसआईटी का गठन किया। इसके बाद तीन बार एसआईटी आरोपी के करीब पहुंची लेकिन कामयाबी नहीं मिली। फिर भी एसआईटी ने अपनी कोशिश जारी रखी। इसके लिए एसआईटी के सदस्यों को झुग्गी-झोपड़ियों में भी रहना पड़ा। ऋषिकेश व हरिद्वार के अलावा पुलिस ने देहरादून में भी खाक छानी। एसआईटी के सदस्यों को आरोपी तक पहुंचने के लिए घुमंतू व भिखारियों के वेश में रहने के साथ-साथ रेहड़ीवाला तक बनना पड़ा। एसआईटी की टीम में आरक्षी शाहिद अली, मोहम्मद तोशिफ, सुरजीत, अमरिंदर, मुख्य आरक्षी कृष्ण भंडारी व सब इंस्पेक्टर सुभाष शामिल रहे।
बाक्स
ऐसे की थी हत्या
गिरफ्तार किए गए उद्घोषित अपराधी संजय साहनी ने गंडासे से अपनी 25 साल की पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी थी। फरार होने के बाद आरोपी ने अपनी पहचान तक बदल डाली। जांच के दौरान पता चला है कि हत्यारा अपने बड़े भाई प्रवीण साहनी की पहचान से ऋषिकेष में रह रहा था। उधर, एसपी सिरमौर रोहित मालपानी ने बताया कि एसआईटी की कड़ी मेहनत के बाद यह सफलता हाथ लगी। उन्होंने बताया कि हत्यारे को दबोचने के लिए कई तरह की भूमिकाएं अदा करनी पड़ीं। सोमवार को पुलिस ने 13 साल बाद भगौड़े को ऋषिकेष से गिरफ्तार किया है। एक माह में ही पुलिस ने केस को अंजाम तक पहुंचाया है।
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नाहन (सिरमौर)।
हत्या के एक मामले को सुलझाने के लिए सिरमौर पुलिस को एक माह में वह सब करना पड़ा, जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी न हो। पुलिस कर्मी न केवल भिखारी बने, रेहड़ी भी चलानी पड़ी। यही नहीं हत्या के आरोपी का सुराग जुटाने के लिए घुमंतू की भूमिका भी निभानी पड़ी। भले ही यह सब फिल्मी अंदाज में लगता हो लेकिन शतप्रतिशत सत्य है। पुलिस दल की कड़ी मेहनत व कर्तव्य परायणता ने सोमवार की शाम को उसे अंजाम तक भी पहुंचा दिया।
यहां बात हो रही है 13 साल पुराने हत्या के एक मामले की। युवा एसपी सिरमौर रोहित मालपानी के दिशा-निर्देश में पुलिस दल ने पांच माह के भीतर ही इस मामले में उद्घोषित अपराधी को ऋषिकेष के रेलवे स्टेशन से धर दबोचा। 10 मई 2005 को पांवटा साहिब में बिहार के मुढ़िया गांव (जिला दरभंगा) के रहने वाले संजय साहनी पर पत्नी की हत्या का मामला दर्ज हुआ था। हत्यारा पत्नी के साथ ही पांवटा साहिब में मजदूरी करने पहुंचा था।
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पत्नी को ठिकाने लगाने केे बाद फरार हुआ आरोपी कभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा। 2008 में संजय सहानी को उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिया। साथ ही कोर्ट में अनट्रेस रिपोर्ट पेश कर दी गई थी। 2008 से 2013 के बीच भगौड़े को दबोचने के लिए कई बार पुलिस ने बिहार, झारखंड व उड़ीसा में दबिश दी लेकिन असफलता ही हाथ लगी।
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इसी साल जनवरी माह में अनट्रेस रिपोर्ट को रि-ओपन कर दिया। युवा एसपी रोहित मालपानी ने एसआईटी का गठन किया। इसके बाद तीन बार एसआईटी आरोपी के करीब पहुंची लेकिन कामयाबी नहीं मिली। फिर भी एसआईटी ने अपनी कोशिश जारी रखी। इसके लिए एसआईटी के सदस्यों को झुग्गी-झोपड़ियों में भी रहना पड़ा। ऋषिकेश व हरिद्वार के अलावा पुलिस ने देहरादून में भी खाक छानी। एसआईटी के सदस्यों को आरोपी तक पहुंचने के लिए घुमंतू व भिखारियों के वेश में रहने के साथ-साथ रेहड़ीवाला तक बनना पड़ा। एसआईटी की टीम में आरक्षी शाहिद अली, मोहम्मद तोशिफ, सुरजीत, अमरिंदर, मुख्य आरक्षी कृष्ण भंडारी व सब इंस्पेक्टर सुभाष शामिल रहे।
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ऐसे की थी हत्या
गिरफ्तार किए गए उद्घोषित अपराधी संजय साहनी ने गंडासे से अपनी 25 साल की पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी थी। फरार होने के बाद आरोपी ने अपनी पहचान तक बदल डाली। जांच के दौरान पता चला है कि हत्यारा अपने बड़े भाई प्रवीण साहनी की पहचान से ऋषिकेष में रह रहा था। उधर, एसपी सिरमौर रोहित मालपानी ने बताया कि एसआईटी की कड़ी मेहनत के बाद यह सफलता हाथ लगी। उन्होंने बताया कि हत्यारे को दबोचने के लिए कई तरह की भूमिकाएं अदा करनी पड़ीं। सोमवार को पुलिस ने 13 साल बाद भगौड़े को ऋषिकेष से गिरफ्तार किया है। एक माह में ही पुलिस ने केस को अंजाम तक पहुंचाया है।