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नप अधिकारी पर लगाया वन बर्बाद करने का आरोप
Updated Tue, 23 Jan 2018 11:18 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। आंवलीवाला गाड्डा गांव के लोगों ने नगर परिषद नाहन के कार्यकारी अधिकारी पर वनक्षेत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। इस संदर्भ में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को उपायुक्त सिरमौर से मिला। इस दौरान उन्हें ज्ञापन सौंप कार्यकारी अधिकारी पर अपने पद का गलत दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया है।
उपायुक्त को सौंपें ज्ञापन में आंवलीवाला गाड्डा के सूरज ठाकुर, कौशल्या देवी, सुदेश ठाकुर, जसमत सिंह, देविंद्र दत्त आदि ने कहा कि कुछ दिन पूर्व उन्होंने नगर पालिका के अधीन आने वाले वन क्षेत्र में अज्ञात भेड़ पालकों द्वारा भेड़-बकरियां चला कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की शिकायत की थी। इस दौरान उनके द्वारा ग्रामीणों के पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाने की भी बात कही थी लेकिन अब जाकर पता चला है कि वह भेड़पालक कोई और नहीं बल्कि कार्यकारी अधिकारी सूरत सिंह नेगी व उसके सहयोगी बलदेव नेगी का साझा ढेरा है जिसने जंगल को बर्बाद करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों नप की बैठक में भेड़ों को जंगल से पत्तियां चराने की इजाजत देने का प्रस्ताव पारित किया गया था जिसका सीधा लाभ उनके अपने ढेरे के सहयोगी बलदेव सिंह को मिला है। उन्होंने बताया कि नगर पालिका अधिनियम 1994 की धारा 42-1 व 301-1-2 के नियम के अनुसार नप का कोई कर्मचारी व सहयोगी लाभ की पात्रता नहीं रख सकता है। जबकि इन्होंने यहां करीब 1500 भेड़ बकरियां छोड़ी हुई हैं जो छोटे पेड़ पौधों को नष्ट कर रही हैं। इससे जहां पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, वहीं स्थानीय लोगों खासकर महिलाओं का जंगल में अकेले जाना खतरे से खाली नहीं है।
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उन्होंने बताया कि यहां भारी भेड़ बकरियां आ जाने के चलते जंगली जानवर भी गांव की ओर आने लगे हैं जिससे सुरक्षा भी दांव पर लगी है। ग्रामीणों ने उपायुक्त से मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।
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नाहन (सिरमौर)। आंवलीवाला गाड्डा गांव के लोगों ने नगर परिषद नाहन के कार्यकारी अधिकारी पर वनक्षेत्र को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। इस संदर्भ में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को उपायुक्त सिरमौर से मिला। इस दौरान उन्हें ज्ञापन सौंप कार्यकारी अधिकारी पर अपने पद का गलत दुरुपयोग करने का आरोप भी लगाया है।
उपायुक्त को सौंपें ज्ञापन में आंवलीवाला गाड्डा के सूरज ठाकुर, कौशल्या देवी, सुदेश ठाकुर, जसमत सिंह, देविंद्र दत्त आदि ने कहा कि कुछ दिन पूर्व उन्होंने नगर पालिका के अधीन आने वाले वन क्षेत्र में अज्ञात भेड़ पालकों द्वारा भेड़-बकरियां चला कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की शिकायत की थी। इस दौरान उनके द्वारा ग्रामीणों के पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाने की भी बात कही थी लेकिन अब जाकर पता चला है कि वह भेड़पालक कोई और नहीं बल्कि कार्यकारी अधिकारी सूरत सिंह नेगी व उसके सहयोगी बलदेव नेगी का साझा ढेरा है जिसने जंगल को बर्बाद करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है।
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उन्होंने बताया कि पिछले दिनों नप की बैठक में भेड़ों को जंगल से पत्तियां चराने की इजाजत देने का प्रस्ताव पारित किया गया था जिसका सीधा लाभ उनके अपने ढेरे के सहयोगी बलदेव सिंह को मिला है। उन्होंने बताया कि नगर पालिका अधिनियम 1994 की धारा 42-1 व 301-1-2 के नियम के अनुसार नप का कोई कर्मचारी व सहयोगी लाभ की पात्रता नहीं रख सकता है। जबकि इन्होंने यहां करीब 1500 भेड़ बकरियां छोड़ी हुई हैं जो छोटे पेड़ पौधों को नष्ट कर रही हैं। इससे जहां पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, वहीं स्थानीय लोगों खासकर महिलाओं का जंगल में अकेले जाना खतरे से खाली नहीं है।
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उन्होंने बताया कि यहां भारी भेड़ बकरियां आ जाने के चलते जंगली जानवर भी गांव की ओर आने लगे हैं जिससे सुरक्षा भी दांव पर लगी है। ग्रामीणों ने उपायुक्त से मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है।
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