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मीटर रीडिंग जांचे बिना बिल काट रहा जलशक्ति विभाग
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अमरपूर मोहल्ला में स्थित पानी का मीटर, जिसकी रीडिंग गलत दर्शाई गई है।
- फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। जनपद सिरमौर में जलशक्ति विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग के कर्मचारी अपने कार्यालयों में बैठकर उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिल थमा रहे हैं। जाहिर सी बात है कि बगैर मीटर रीडिंग जांचे दिए जा रहे बिल कभी सही नहीं हो सकते। यही नहीं कई उपभोक्ताओं को पिछले साल के बिल भी जुलाई माह में दिए गए हैं। अब भारी बिल आने से उपभोक्ताओं को होश फाख्ता होना भी लाजमी है।
हैरानी इस बात की है कि विभाग द्वारा दिए गए बिल में दर्शाई गई रीडिंग व मीटर की वास्तविक रीडिंग आपस में मेल नहीं खा रही। विभाग की ओर से दिए गए बिल में मीटर रीडिंग तीन से चार गुणा अधिक है। ऐसा ही मामला नाहन शहर का है। शहर के अमरपुर मोहल्ला में रहने वाले सुधीर रमौल के पानी का बिल विभाग ने गलत दर्शाया है। वास्तविक तौर पर मीटर पर रीडिंग 227 यूनिट है। जबकि, विभाग ने इसे 916 दर्शाया है। यही नहीं यह रीडिंग विभाग के कर्मचारी स्वयं ही जनरेट कर रहे हैं।
इसके अलावा विभाग ने पिछले साल अगस्त से नवंबर तक का बिल भी इसी बिल में दर्शाया है। सवाल उठ रहे हैं कि पानी के पुराने बिल इस साल क्यों दिए जा रहे हैं। इसको लेकर समाजसेवी सुधीर रमौल ने आरटीआई भी लगाई है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से बगैर मीटर रीडिंग जांचे ही बिल थमाए जा रहे हैं। विभाग के कर्मचारियों को यह पता नहीं है कि घर में पानी के कितने कनेक्शन पर मीटर लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जलशक्ति विभाग उपभोक्ताओं को सीधे सीधे अवैध वसूली कर रहा है। वास्तविक मीटर रीडिंग से विभाग की ओर से जारी किए जा रहे बिल कोई मेल नहीं खाते।
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उन्होंने कहा कि शहर में कई उपभोक्ताओं को पानी के बिल बिना मीटर रीडिंग जांचे दिए गए हैं। उन्होंने विभाग से मांग की कि विभाग की ओर से दिए गए अवैध बिलों का उपभोक्ताओं को ब्याज सहित भुगतान किया जाए या फिर इन बिलों का पैसा भविष्य के बिलों में समायोजित किया जाए। साथ ही मीटर रीडिंग की सर्टिफाइड कॉपी उपभोक्ताओं को दी जाएगी। अब तक उपभोक्ताओं को जारी किए गए बिलों की विभाग तुरंत जांच करे।
उधर, जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता जितेंद्र ठाकुर ने कहा कि शिकायत नहीं मिली है। यदि बिल ज्यादा दर्शाया गया है तो इसे दुरुस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग तीन से चार माह के बिल उपभोक्ताओं को देता है। जिन उपभोक्ताओं ने मीटर लगाए हैं, उनकी रीडिंग जांचने के बाद उन्हें बिल देता है। जिनके मीटर डेड हैं, उन्हें औसत बिल दिए जाते हैं।
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हैरानी इस बात की है कि विभाग द्वारा दिए गए बिल में दर्शाई गई रीडिंग व मीटर की वास्तविक रीडिंग आपस में मेल नहीं खा रही। विभाग की ओर से दिए गए बिल में मीटर रीडिंग तीन से चार गुणा अधिक है। ऐसा ही मामला नाहन शहर का है। शहर के अमरपुर मोहल्ला में रहने वाले सुधीर रमौल के पानी का बिल विभाग ने गलत दर्शाया है। वास्तविक तौर पर मीटर पर रीडिंग 227 यूनिट है। जबकि, विभाग ने इसे 916 दर्शाया है। यही नहीं यह रीडिंग विभाग के कर्मचारी स्वयं ही जनरेट कर रहे हैं।
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इसके अलावा विभाग ने पिछले साल अगस्त से नवंबर तक का बिल भी इसी बिल में दर्शाया है। सवाल उठ रहे हैं कि पानी के पुराने बिल इस साल क्यों दिए जा रहे हैं। इसको लेकर समाजसेवी सुधीर रमौल ने आरटीआई भी लगाई है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से बगैर मीटर रीडिंग जांचे ही बिल थमाए जा रहे हैं। विभाग के कर्मचारियों को यह पता नहीं है कि घर में पानी के कितने कनेक्शन पर मीटर लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जलशक्ति विभाग उपभोक्ताओं को सीधे सीधे अवैध वसूली कर रहा है। वास्तविक मीटर रीडिंग से विभाग की ओर से जारी किए जा रहे बिल कोई मेल नहीं खाते।
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उन्होंने कहा कि शहर में कई उपभोक्ताओं को पानी के बिल बिना मीटर रीडिंग जांचे दिए गए हैं। उन्होंने विभाग से मांग की कि विभाग की ओर से दिए गए अवैध बिलों का उपभोक्ताओं को ब्याज सहित भुगतान किया जाए या फिर इन बिलों का पैसा भविष्य के बिलों में समायोजित किया जाए। साथ ही मीटर रीडिंग की सर्टिफाइड कॉपी उपभोक्ताओं को दी जाएगी। अब तक उपभोक्ताओं को जारी किए गए बिलों की विभाग तुरंत जांच करे।
उधर, जलशक्ति विभाग के सहायक अभियंता जितेंद्र ठाकुर ने कहा कि शिकायत नहीं मिली है। यदि बिल ज्यादा दर्शाया गया है तो इसे दुरुस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग तीन से चार माह के बिल उपभोक्ताओं को देता है। जिन उपभोक्ताओं ने मीटर लगाए हैं, उनकी रीडिंग जांचने के बाद उन्हें बिल देता है। जिनके मीटर डेड हैं, उन्हें औसत बिल दिए जाते हैं।