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Sirmour News: अदालत 6
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चेक बाउंस मामले में दोषी करार व्यक्ति को सेशन कोर्ट से नहीं मिली राहत
नाहन। अदालत ने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की अपील खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा और मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा है।
यह मामला शिलाई क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता बहादुर सिंह ने प्रेम सिंह के खिलाफ परिवाद दायर किया था। आरोप था कि वर्ष 2022 और 2023 के दौरान उसने आरोपी को कुल 3 लाख रुपये उधार दिए थे। राशि लौटाने के लिए आरोपी ने 3 लाख रुपये का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक खाता ब्लॉक होने की टिप्पणी के साथ अनादृत हो गया।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी), शिलाई ने 19 जनवरी 2025 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास तथा 3.30 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की।
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अपील में दावा किया गया कि उसने शिकायतकर्ता से केवल 50 हजार रुपये उधार लिए थे और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत ने निर्णय में कहा कि निचली अदालत के फैसले में किसी प्रकार की कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं पाई गई। इसलिए अपील को खारिज करते हुए दोषसिद्धि और सजा को यथावत रखा जाता है।
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नाहन। अदालत ने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की अपील खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने निचली अदालत की सुनाई गई सजा और मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा है।
यह मामला शिलाई क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता बहादुर सिंह ने प्रेम सिंह के खिलाफ परिवाद दायर किया था। आरोप था कि वर्ष 2022 और 2023 के दौरान उसने आरोपी को कुल 3 लाख रुपये उधार दिए थे। राशि लौटाने के लिए आरोपी ने 3 लाख रुपये का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक खाता ब्लॉक होने की टिप्पणी के साथ अनादृत हो गया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी), शिलाई ने 19 जनवरी 2025 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए छह माह के कारावास तथा 3.30 लाख रुपये मुआवजा अदा करने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की।
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अपील में दावा किया गया कि उसने शिकायतकर्ता से केवल 50 हजार रुपये उधार लिए थे और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। अदालत ने निर्णय में कहा कि निचली अदालत के फैसले में किसी प्रकार की कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं पाई गई। इसलिए अपील को खारिज करते हुए दोषसिद्धि और सजा को यथावत रखा जाता है।