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Sirmour News: पुलिस को चकमा देकर अस्पताल से भागा कैदी, अदालत ने सुनाई 7 महीने की सजा
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अदालत
-पुलिसकर्मी को धक्का देकर फरार हो गया था आरोपी, कुछ ही समय बाद पुन: किया था गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा की अदालत ने पुलिस हिरासत से भागने के आरोपी निशांत कम्बोज को दोषी करार देते हुए 7 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला अप्रैल 2023 का है। आरोपी निशांत कम्बोज चोरी के एक मामले में न्यायिक हिरासत में था और उसे इलाज के लिए नाहन के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 अप्रैल 2023 की सुबह करीब 5:30 बजे, आरोपी ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी से शौचालय जाने की बात कही। जैसे ही पुलिसकर्मी उसे शौचालय ले गया, आरोपी ने उसे जोर से धक्का दे दिया। पुलिसकर्मी का संतुलन बिगड़ गया और आरोपी वहां से रफूचक्कर हो गया।
कैदी के भागते ही अस्पताल और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस टीम ने तुरंत चारों तरफ उसकी तलाश शुरू कर दी। आखिरकार, घटना के कुछ ही समय बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को दो-सड़का के पास एक जंगल के किनारे से दोबारा गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ पुलिस हिरासत से भागने की धारा 224 (आईपीसी) के तहत नया केस दर्ज किया गया।
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सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने आरोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी पहली बार अपराध कर रहा है और वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नरम रुख अपनाया और उसे 7 महीने की जेल की सजा सुनाई।
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-पुलिसकर्मी को धक्का देकर फरार हो गया था आरोपी, कुछ ही समय बाद पुन: किया था गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। नाहन की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा की अदालत ने पुलिस हिरासत से भागने के आरोपी निशांत कम्बोज को दोषी करार देते हुए 7 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला अप्रैल 2023 का है। आरोपी निशांत कम्बोज चोरी के एक मामले में न्यायिक हिरासत में था और उसे इलाज के लिए नाहन के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 अप्रैल 2023 की सुबह करीब 5:30 बजे, आरोपी ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी से शौचालय जाने की बात कही। जैसे ही पुलिसकर्मी उसे शौचालय ले गया, आरोपी ने उसे जोर से धक्का दे दिया। पुलिसकर्मी का संतुलन बिगड़ गया और आरोपी वहां से रफूचक्कर हो गया।
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कैदी के भागते ही अस्पताल और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस टीम ने तुरंत चारों तरफ उसकी तलाश शुरू कर दी। आखिरकार, घटना के कुछ ही समय बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को दो-सड़का के पास एक जंगल के किनारे से दोबारा गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ पुलिस हिरासत से भागने की धारा 224 (आईपीसी) के तहत नया केस दर्ज किया गया।
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सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने आरोपी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी पहली बार अपराध कर रहा है और वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नरम रुख अपनाया और उसे 7 महीने की जेल की सजा सुनाई।