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Sirmour News: लापता बेटी मिलने पर साथ न रखने का आरोप, कोर्ट में बयान से पलटी, मां बरी
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नाबालिग बेटी ने मां पर लगाए थे मारपीट, धमकी और प्रताड़ना के आरोप
सुनवाई के दौरान बयान बदलने से ढहा अभियोजन का मामला
नवंबर 2023 में नाहन थाना में दर्ज हुआ था मामला, स्कूल फीस जमा नहीं करवाने के भी लगाए थे आरोप
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने नाबालिग बेटी से मारपीट, धमकी और प्रताड़ना तथा पुलिस की ओर से बरामद किए जाने के बाद अपने साथ रखने से इन्कार करने के आरोपों का सामना कर रही महिला रक्षा देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता बेटी अपने ही आरोपों से मुकर गई। इसके बाद अभियोजन का पूरा मामला कमजोर पड़ गया।
यह मामला जिला के उपमंडल राजगढ़ क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, 22 नवंबर 2023 को नाबालिग बेटी ने नाहन थाना में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसकी मां एक व्यक्ति के साथ लिव-इन संबंध में रह रही है तथा उसकी स्कूल फीस भी जमा नहीं करवाती। शिकायत में यह भी कहा गया कि मां उसके साथ मारपीट करती थी, उसे घर से निकाल दिया था और मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करती थी।
बेटी ने यह भी आरोप लगाया कि मां ने पहले उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से बरामद किए जाने के बाद उसे अपने साथ रखने से इन्कार कर दिया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 323, 506 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को उस समय बड़ा झटका लगा, जब शिकायतकर्ता बेटी ही अदालत में अपने पहले दिए गए आरोपों से मुकर गई। उसने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट कहा कि उसकी मां ने न तो उसके साथ मारपीट की और न ही किसी प्रकार की प्रताड़ना व धमकी दी। इसके बाद अभियोजन पक्ष के पास आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं बचा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) अंशुल मलिक ने निर्णय में कहा कि मामले के अन्य गवाह केवल औपचारिक थे और उनकी गवाही से आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संभावना भी बनती है कि शिकायत जल्दबाजी में दर्ज कराई गई हो। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी महिला को सभी आरोपों से बरी कर दिया। संवाद
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सुनवाई के दौरान बयान बदलने से ढहा अभियोजन का मामला
नवंबर 2023 में नाहन थाना में दर्ज हुआ था मामला, स्कूल फीस जमा नहीं करवाने के भी लगाए थे आरोप
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने नाबालिग बेटी से मारपीट, धमकी और प्रताड़ना तथा पुलिस की ओर से बरामद किए जाने के बाद अपने साथ रखने से इन्कार करने के आरोपों का सामना कर रही महिला रक्षा देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता बेटी अपने ही आरोपों से मुकर गई। इसके बाद अभियोजन का पूरा मामला कमजोर पड़ गया।
यह मामला जिला के उपमंडल राजगढ़ क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, 22 नवंबर 2023 को नाबालिग बेटी ने नाहन थाना में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उसकी मां एक व्यक्ति के साथ लिव-इन संबंध में रह रही है तथा उसकी स्कूल फीस भी जमा नहीं करवाती। शिकायत में यह भी कहा गया कि मां उसके साथ मारपीट करती थी, उसे घर से निकाल दिया था और मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करती थी।
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बेटी ने यह भी आरोप लगाया कि मां ने पहले उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से बरामद किए जाने के बाद उसे अपने साथ रखने से इन्कार कर दिया। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 323, 506 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को उस समय बड़ा झटका लगा, जब शिकायतकर्ता बेटी ही अदालत में अपने पहले दिए गए आरोपों से मुकर गई। उसने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट कहा कि उसकी मां ने न तो उसके साथ मारपीट की और न ही किसी प्रकार की प्रताड़ना व धमकी दी। इसके बाद अभियोजन पक्ष के पास आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं बचा।
न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) अंशुल मलिक ने निर्णय में कहा कि मामले के अन्य गवाह केवल औपचारिक थे और उनकी गवाही से आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संभावना भी बनती है कि शिकायत जल्दबाजी में दर्ज कराई गई हो। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए आरोपी महिला को सभी आरोपों से बरी कर दिया। संवाद