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केंद्रीय योजना के निरीक्षक कर रहे वसूली
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नाहन (सिरमौर)। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) की परियोजनाओं की स्पॉट वेरिफिकेशन के लिए चिन्हित एजेंसी के निरीक्षक पर अवैध वसूली के आरोप लगे हैं। लाभार्थियों के माध्यम से जिला उद्योग विभाग को इस तरह की कई शिकायतें मिल रही हैं। जिले में स्पॉट वेरिफिकेशन के नाम पर हो रही अवैध वसूली से संबंधित शिकायत उद्योग विभाग के पास पहुंचने के बाद कार्रवाई के लिए उद्योग विभाग के निदेशक को भेजा है।
निदेशक ने भी खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के शीर्ष कार्यालय को पत्र लिखकर इस तरह की गतिविधि पर रोक लगाने को कहा है। जिला उद्योग प्रबंधक ज्ञान सिंह चौहान ने मामला संज्ञान में आने के बाद लाभार्थियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा है कि इस योजना के तहत स्पॉट वेरिफिकेशन निशुल्क है।
यदि कोई उनसे इस प्रकार की वसूली करने का प्रयास करे तो तुरंत उसकी सूचना इस कार्यालय को दें। साथ ही जिन लाभार्थियों से वसूली की गई है, वे भी पूरी जानकारी लिखित में उपलब्ध करवाएं। यह भी देखने में आया है कि पीएमईजीपी या मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के कुछ मामलों में ऋण मंजूर करवाने के नाम पर कुछ तत्वों ने आवेदकों से पांच हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। बार-बार जागरूक करने के बावजूद भी लोग ऐसे तत्वों के झांसे में आ रहे हैं।
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इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। ऐसे तत्व लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए आधे अधूरे या अलाभकारी प्रोजेक्टों को भरवाकर, उसकी सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करवा देते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे तत्वों का डाटा तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही पुलिस के साथ साझा किया जाएगा।
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निदेशक ने भी खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के शीर्ष कार्यालय को पत्र लिखकर इस तरह की गतिविधि पर रोक लगाने को कहा है। जिला उद्योग प्रबंधक ज्ञान सिंह चौहान ने मामला संज्ञान में आने के बाद लाभार्थियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा है कि इस योजना के तहत स्पॉट वेरिफिकेशन निशुल्क है।
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यदि कोई उनसे इस प्रकार की वसूली करने का प्रयास करे तो तुरंत उसकी सूचना इस कार्यालय को दें। साथ ही जिन लाभार्थियों से वसूली की गई है, वे भी पूरी जानकारी लिखित में उपलब्ध करवाएं। यह भी देखने में आया है कि पीएमईजीपी या मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के कुछ मामलों में ऋण मंजूर करवाने के नाम पर कुछ तत्वों ने आवेदकों से पांच हजार से लेकर 20 हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। बार-बार जागरूक करने के बावजूद भी लोग ऐसे तत्वों के झांसे में आ रहे हैं।
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इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। ऐसे तत्व लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए आधे अधूरे या अलाभकारी प्रोजेक्टों को भरवाकर, उसकी सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करवा देते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे तत्वों का डाटा तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही पुलिस के साथ साझा किया जाएगा।