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Sirmour News: चालकों-परिचालकों की कमी से पटरी से उतर रहीं एचआरटीसी की बस सेवाएं
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अभियान : यात्री बेबस-5
153 रूटों पर सिर्फ 133 चालक और 128 परिचालक दे रहे सेवाएं
डिपो में चालक और परिचालकों के 155-155 पदों की आवश्यकता
बसें भी कम, उम्रदराज कर्मी डिपो में तैनात, छुट्टी लेना भी कर्मचारियों के लिए चुनौती
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) का नाहन डिपो इन दिनों चालक और परिचालकों की भारी कमी के बीच परिवहन व्यवस्था संभालने को मजबूर है। महज 133 चालक और 128 परिचालकों के भरोसे 153 बस रूटों का संचालन किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि स्टाफ और बसों की कमी के चलते कई बार महत्वपूर्ण रूट रद्द करने पड़ रहे हैं, जबकि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को लगातार अतिरिक्त कार्यभार उठाना पड़ रहा है। बीमारी की स्थिति में भी छुट्टी लेना कई कर्मचारियों के लिए आसान नहीं रह गया है।
डिपो में चालक और परिचालकों के 155-155 पदों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में दोनों श्रेणियों में क्रमशः 22 और 27 पद खाली पड़े हैं। उपलब्ध कर्मचारियों में भी कई चालक और परिचालक उम्रदराज या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से नियमित रूटों पर सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं और उन्हें कार्यालय अथवा बस अड्डे की ड्यूटी में लगाया गया है। ऐसे में लंबे और कठिन रूटों का पूरा बोझ शेष कर्मचारियों पर आ गया है।
स्टाफ और बसों की कमी का सबसे अधिक खामियाजा ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। कई बार नाहन, सराहां और पांवटा साहिब डिपो के दो से तीन रूट प्रतिदिन कर्मचारियों या बसों की अनुपलब्धता के कारण रद्द करने पड़ते हैं। कुछ मार्गों पर रोटेशन के आधार पर बसें चलाई जा रही हैं, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को समय पर परिवहन सुविधा नहीं मिल रही। एक रूट प्रभावित होने पर यात्रियों के सामने घंटों इंतजार करने या निजी वाहनों पर अतिरिक्त खर्च करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
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स्थिति केवल संचालन तक सीमित नहीं है। डिपो की वर्कशॉप में भी तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण मिस्त्रियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सीमित स्टाफ के चलते बसों की समय पर मरम्मत और रखरखाव प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर बसों की उपलब्धता और नियमित संचालन पर पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से चालक और परिचालकों को ओवरटाइम और रात्रि भत्ते का भुगतान भी नहीं किया गया है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
बस अड्डा प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि नाहन डिपो में वर्तमान में 133 चालक और 128 परिचालक कार्यरत हैं, जबकि आवश्यकता 155-155 की है। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण कई बार बस सेवाओं के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों के साथ यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। संवाद
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153 रूटों पर सिर्फ 133 चालक और 128 परिचालक दे रहे सेवाएं
डिपो में चालक और परिचालकों के 155-155 पदों की आवश्यकता
बसें भी कम, उम्रदराज कर्मी डिपो में तैनात, छुट्टी लेना भी कर्मचारियों के लिए चुनौती
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) का नाहन डिपो इन दिनों चालक और परिचालकों की भारी कमी के बीच परिवहन व्यवस्था संभालने को मजबूर है। महज 133 चालक और 128 परिचालकों के भरोसे 153 बस रूटों का संचालन किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि स्टाफ और बसों की कमी के चलते कई बार महत्वपूर्ण रूट रद्द करने पड़ रहे हैं, जबकि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को लगातार अतिरिक्त कार्यभार उठाना पड़ रहा है। बीमारी की स्थिति में भी छुट्टी लेना कई कर्मचारियों के लिए आसान नहीं रह गया है।
डिपो में चालक और परिचालकों के 155-155 पदों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में दोनों श्रेणियों में क्रमशः 22 और 27 पद खाली पड़े हैं। उपलब्ध कर्मचारियों में भी कई चालक और परिचालक उम्रदराज या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से नियमित रूटों पर सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं और उन्हें कार्यालय अथवा बस अड्डे की ड्यूटी में लगाया गया है। ऐसे में लंबे और कठिन रूटों का पूरा बोझ शेष कर्मचारियों पर आ गया है।
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स्टाफ और बसों की कमी का सबसे अधिक खामियाजा ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। कई बार नाहन, सराहां और पांवटा साहिब डिपो के दो से तीन रूट प्रतिदिन कर्मचारियों या बसों की अनुपलब्धता के कारण रद्द करने पड़ते हैं। कुछ मार्गों पर रोटेशन के आधार पर बसें चलाई जा रही हैं, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के लोगों को समय पर परिवहन सुविधा नहीं मिल रही। एक रूट प्रभावित होने पर यात्रियों के सामने घंटों इंतजार करने या निजी वाहनों पर अतिरिक्त खर्च करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
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स्थिति केवल संचालन तक सीमित नहीं है। डिपो की वर्कशॉप में भी तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण मिस्त्रियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सीमित स्टाफ के चलते बसों की समय पर मरम्मत और रखरखाव प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर बसों की उपलब्धता और नियमित संचालन पर पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से चालक और परिचालकों को ओवरटाइम और रात्रि भत्ते का भुगतान भी नहीं किया गया है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है।
बस अड्डा प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि नाहन डिपो में वर्तमान में 133 चालक और 128 परिचालक कार्यरत हैं, जबकि आवश्यकता 155-155 की है। उन्होंने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण कई बार बस सेवाओं के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों के साथ यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। संवाद