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Sirmour News: छोटे बच्चों को मोबाइल फोन से रखें दूर
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पोषण पखवाड़े के शुभारंभ पर शिलाईधार में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। संवाद
शिलाई में आठवें पोषण पखवाड़े की शुरुआत, मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। बाल विकास परियोजना शिलाई के अंतर्गत आठवें पोषण पखवाड़े की शुरुआत आंगनबाड़ी केंद्र शिलाई धार से खंड स्तरीय कार्यक्रम के रूप में की गई। इस अवसर पर आयोजित शिविर में क्षेत्र की महिलाओं और अभिभावकों को शिशु देखभाल एवं सही पोषण के बारे में जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी कि छोटे बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखें और उनके समुचित शारीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान दें। माताओं को बताया गया कि बच्चों को जन्म के बाद समय पर स्तनपान कराना अत्यंत आवश्यक है तथा छह महीनों तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए। सातवें महीने से बच्चों को घर में बना पौष्टिक ऊपरी आहार देना शुरू करें और उसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।
इसके साथ ही बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाने, प्रसव उपरांत मां और शिशु की सही देखभाल करने पर भी जोर दिया गया।
माताओं को पौष्टिक आहार में पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों को शामिल करने की सलाह दी गई। बच्चों का स्तनपान दो वर्ष तक जारी रखना चाहिए तथा मोटे अनाजों को पूरक पोषण में शामिल करना लाभकारी है। इससे जन्म से दो वर्ष तक बच्चों के मस्तिष्क का समुचित विकास होता है और वे भविष्य में बीमारियों एवं मानसिक समस्याओं से सुरक्षित रह सकते हैं। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी शिलाई, पोषण ब्लॉक कोऑर्डिनेटर रजनी देवी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीता देवी मौजूद रहीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। बाल विकास परियोजना शिलाई के अंतर्गत आठवें पोषण पखवाड़े की शुरुआत आंगनबाड़ी केंद्र शिलाई धार से खंड स्तरीय कार्यक्रम के रूप में की गई। इस अवसर पर आयोजित शिविर में क्षेत्र की महिलाओं और अभिभावकों को शिशु देखभाल एवं सही पोषण के बारे में जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी कि छोटे बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखें और उनके समुचित शारीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान दें। माताओं को बताया गया कि बच्चों को जन्म के बाद समय पर स्तनपान कराना अत्यंत आवश्यक है तथा छह महीनों तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए। सातवें महीने से बच्चों को घर में बना पौष्टिक ऊपरी आहार देना शुरू करें और उसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं।
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इसके साथ ही बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाने, प्रसव उपरांत मां और शिशु की सही देखभाल करने पर भी जोर दिया गया।
माताओं को पौष्टिक आहार में पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों को शामिल करने की सलाह दी गई। बच्चों का स्तनपान दो वर्ष तक जारी रखना चाहिए तथा मोटे अनाजों को पूरक पोषण में शामिल करना लाभकारी है। इससे जन्म से दो वर्ष तक बच्चों के मस्तिष्क का समुचित विकास होता है और वे भविष्य में बीमारियों एवं मानसिक समस्याओं से सुरक्षित रह सकते हैं। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी शिलाई, पोषण ब्लॉक कोऑर्डिनेटर रजनी देवी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीता देवी मौजूद रहीं।
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