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Sirmour News: सड़कों पर घूम रहे सैकड़ों लावारिस गोवंश क्षेत्र में एक गंभीर समस्या बनती जा रही
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पांवटा साहिब में लगातार सड़कों पर गो वंश को छोड़ने से परेशानी बढ़ती जा रही है। संवाद
ग्राउंड रिपोर्ट--
चार वर्ष पहले गोसेवकों के अनशन के बाद कदम भी उठे, अब स्थिति फिर से वही
यातायात में बाधा और हादसों का खतरा बढ़ रहा, गो अभयारण्य की उठ रही मांग
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड सीमा से हरियाणा राज्य सीमा, नाहन के कोलर व पांवटा विधानसभा क्षेत्र से शिलाई क्षेत्र के प्रवेश द्वार सतौन तक सैकड़ों लावारिस गोवंश सड़कों पर भटक रहे हैं। एनएच और संपर्क सड़कों पर पशु बीच सड़क पर बैठे रहते हैं। रात के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है। क्षेत्र में कई सड़क हादसे भी हो चुके हैं। सड़कों पर छोड़े जा रहे गोवंश प्लास्टिक और कूड़ा-कचरा खाने को मजबूर हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए प्राण घातक है।
गोसेवक सुनील चौधरी, अजय संसरवाल व प्रदीप चौहान ने बताया कि वर्ष 2020 में गोसेवक सचिन ओबराय ने रामलीला मैदान में पांच दिनों तक अनशन किया था। गोवंश को सड़कों पर भटकते, हादसों में मरते देख कर इनके लिए ठिकाना तैयार करने की मांग उठाई थी। उस समय कुछ गोसेवकों के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ। फिर, करीब चार वर्ष पहले गो सेवकों सचिन ओबराय, उनकी मां, सुनील चौधरी व अजय समेत अन्यों ने मिल कर परशुराम चौक के समीप दो सप्ताह तक धरना प्रदर्शन किया था। इसके बाद कुछ हालत सुधर भी अब फिर से सैकड़ों गोवंश सड़कों पर छोड़ दिए जा रहे हैं।
यहां तक कि उत्तराखंड से भी दिन के समय गोवंश क्षेत्र में पहुंच रहा है। इस समय यमुना पुल से लेकर बद्रीपुर, देवीनगर से रामपुरघाट मार्ग, विश्वकर्मा चौक से बेहड़ेवाला, बाता चौक से लेकर बहराल, माजरा से लेकर कोलर तथा बद्रीपुर चौक से लेकर शिलाई विधानसभा क्षेत्र के सतौन तक सड़कों पर लावारिस गोवंश को छोड़ दिया जा रहा है।
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गोसेवक सचिन ओबराय व वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी शर्मा ने बताया कि चार वर्ष पहले अनशन व धरना प्रदर्शन के बाद करीब 185 मवेशियों को पकड़ कर राजगढ़ काऊ सेंचुरी भेजना सुनिश्चित गया था। नगर परिषद पांवटा साहिब में गोशाला तैयार की गई। अब इस गोशाला की हालत बेहद खराब है। जबकि बहराल में सत्यानंद महाराज व दूधलेश्वर गोशाला में दो सौ से अधिक गोवंश की सेवा की जा रही है। माजरा क्षेत्र में दो गोशाला व गोंदपुर में भी एक निजी गोशाला संचालित हो रही है। अब फिर से सैकड़ों गोवंश सड़कों पर भटकता नजर आ रहा है। सड़कों पर छोड़े जा रहे गोवंश प्लास्टिक और कूड़ा-कचरा खाने को मजबूर हैं। यदि कोई मालिक पशुओं को सड़कों पर छोड़ता है तो उन पर जुर्माना लगाया जाए।
बाक्स...
क्षेत्रवासी बोले गो अभयारण्य तैयार करना वक्त की मांग
अधिवक्ता अनिंद्र सिंह नोटी, बलबीर पुंडीर, अधिवक्ता दिनेश चौहान, सचिन वर्मा, जगमोहन सूर्या, कंवर ठाकुर व रामलाल शर्मा का कहना है कि गोवंश की सड़कों पर बढ़ती संख्या हादसों का खतरा बन रही है। सरकार, प्रशासन समय रहते सड़कों पर घूम रहे गोवंश को गो अभयारण्य (काऊ सेंचुरी) तैयार करने की योजना पर गंभीरता से ध्यान दें। काऊ सेंचुरी खोलने के लिए शामलात भूमि चिह्नित कर, आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर आवश्यक कदम उठाएं।
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सरकार के समक्ष उठा चुके काऊ सेंचुरी की मांग: सुखराम चौधरी
पूर्व ऊर्जा मंत्री व स्थानीय विधायक सुखराम चौधरी ने बताया कि प्रदेश सरकार के समक्ष मांग उठा चुके हैं। इसमें हर जिले में कम से कम एक काऊ सेंचुरी तैयार करने की मांग रखी गई। पांवटा साहिब में वन भूमि पर इस तरह की योजना तैयार करने की मांग उठाई है। इसमें 1500 से 2000 मवेशियों को रखा जा सकें। आसपास पशुओं को खुले में चरने की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
संवाद-- -- -- -- -- -- -- -
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चार वर्ष पहले गोसेवकों के अनशन के बाद कदम भी उठे, अब स्थिति फिर से वही
यातायात में बाधा और हादसों का खतरा बढ़ रहा, गो अभयारण्य की उठ रही मांग
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। उत्तराखंड सीमा से हरियाणा राज्य सीमा, नाहन के कोलर व पांवटा विधानसभा क्षेत्र से शिलाई क्षेत्र के प्रवेश द्वार सतौन तक सैकड़ों लावारिस गोवंश सड़कों पर भटक रहे हैं। एनएच और संपर्क सड़कों पर पशु बीच सड़क पर बैठे रहते हैं। रात के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी होती है। क्षेत्र में कई सड़क हादसे भी हो चुके हैं। सड़कों पर छोड़े जा रहे गोवंश प्लास्टिक और कूड़ा-कचरा खाने को मजबूर हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए प्राण घातक है।
गोसेवक सुनील चौधरी, अजय संसरवाल व प्रदीप चौहान ने बताया कि वर्ष 2020 में गोसेवक सचिन ओबराय ने रामलीला मैदान में पांच दिनों तक अनशन किया था। गोवंश को सड़कों पर भटकते, हादसों में मरते देख कर इनके लिए ठिकाना तैयार करने की मांग उठाई थी। उस समय कुछ गोसेवकों के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ। फिर, करीब चार वर्ष पहले गो सेवकों सचिन ओबराय, उनकी मां, सुनील चौधरी व अजय समेत अन्यों ने मिल कर परशुराम चौक के समीप दो सप्ताह तक धरना प्रदर्शन किया था। इसके बाद कुछ हालत सुधर भी अब फिर से सैकड़ों गोवंश सड़कों पर छोड़ दिए जा रहे हैं।
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यहां तक कि उत्तराखंड से भी दिन के समय गोवंश क्षेत्र में पहुंच रहा है। इस समय यमुना पुल से लेकर बद्रीपुर, देवीनगर से रामपुरघाट मार्ग, विश्वकर्मा चौक से बेहड़ेवाला, बाता चौक से लेकर बहराल, माजरा से लेकर कोलर तथा बद्रीपुर चौक से लेकर शिलाई विधानसभा क्षेत्र के सतौन तक सड़कों पर लावारिस गोवंश को छोड़ दिया जा रहा है।
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गोसेवक सचिन ओबराय व वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी शर्मा ने बताया कि चार वर्ष पहले अनशन व धरना प्रदर्शन के बाद करीब 185 मवेशियों को पकड़ कर राजगढ़ काऊ सेंचुरी भेजना सुनिश्चित गया था। नगर परिषद पांवटा साहिब में गोशाला तैयार की गई। अब इस गोशाला की हालत बेहद खराब है। जबकि बहराल में सत्यानंद महाराज व दूधलेश्वर गोशाला में दो सौ से अधिक गोवंश की सेवा की जा रही है। माजरा क्षेत्र में दो गोशाला व गोंदपुर में भी एक निजी गोशाला संचालित हो रही है। अब फिर से सैकड़ों गोवंश सड़कों पर भटकता नजर आ रहा है। सड़कों पर छोड़े जा रहे गोवंश प्लास्टिक और कूड़ा-कचरा खाने को मजबूर हैं। यदि कोई मालिक पशुओं को सड़कों पर छोड़ता है तो उन पर जुर्माना लगाया जाए।
बाक्स...
क्षेत्रवासी बोले गो अभयारण्य तैयार करना वक्त की मांग
अधिवक्ता अनिंद्र सिंह नोटी, बलबीर पुंडीर, अधिवक्ता दिनेश चौहान, सचिन वर्मा, जगमोहन सूर्या, कंवर ठाकुर व रामलाल शर्मा का कहना है कि गोवंश की सड़कों पर बढ़ती संख्या हादसों का खतरा बन रही है। सरकार, प्रशासन समय रहते सड़कों पर घूम रहे गोवंश को गो अभयारण्य (काऊ सेंचुरी) तैयार करने की योजना पर गंभीरता से ध्यान दें। काऊ सेंचुरी खोलने के लिए शामलात भूमि चिह्नित कर, आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर आवश्यक कदम उठाएं।
सरकार के समक्ष उठा चुके काऊ सेंचुरी की मांग: सुखराम चौधरी
पूर्व ऊर्जा मंत्री व स्थानीय विधायक सुखराम चौधरी ने बताया कि प्रदेश सरकार के समक्ष मांग उठा चुके हैं। इसमें हर जिले में कम से कम एक काऊ सेंचुरी तैयार करने की मांग रखी गई। पांवटा साहिब में वन भूमि पर इस तरह की योजना तैयार करने की मांग उठाई है। इसमें 1500 से 2000 मवेशियों को रखा जा सकें। आसपास पशुओं को खुले में चरने की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
संवाद

पांवटा साहिब में लगातार सड़कों पर गो वंश को छोड़ने से परेशानी बढ़ती जा रही है। संवाद