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Shimla News: भू-अधिग्रहण के खिलाफ लोग लामबंद, बोले-गरीबों को उजाड़ रइसों को बसाने की तैयारी

Sun, 28 Dec 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Dec 2025 11:55 PM IST
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agitation of peoples against land requisition
जाठियादेवी में माउंटेन सिटी बसाने के विरोध में लोग मझाैला में बैठक करते हुए। - फोटो : क
नौ गांवों के लोगों ने बैठक कर भूमि अधिग्रहण का किया विरोध
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सरकार पर लगाया बिना जानकारी प्रक्रिया शुरू करने का आरोप
एसआईए सर्वे को बताया एकतरफा, जनसहमति न लेने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के समीपवर्ती जाठियादेवी क्षेत्र में माउंटेन सिटी बसाने की सरकारी कवायद अब जनविरोध में तब्दील हो गई है। एसडीएम ग्रामीण की अध्यक्षता में सोमवार को प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले ही प्रभावित ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को मझौला में नौ गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और साफ शब्दों में कहा कि वे अपनी जमीनें किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। बैठक की अध्यक्षता बागी पंचायत के उपप्रधान देसराज ने की।
उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना और ग्रामीणों की सहमति के भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। पंचायत घर में नोटिस चस्पा होने के बाद ही लोगों को इसकी भनक लगी। देसराज ने कहा कि सरकार गरीबों को उजाड़कर रइसों को बसाने की तैयारी में है। यह पूरी प्रक्रिया मनमानी और अन्यायपूर्ण है।
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उन्होंने कहा कि क्षेत्र में भय का माहौल है। लोग डरे हुए हैं कि यदि जमीन छिन गई तो वे कहां जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कुछ लोगों ने स्वेच्छा से हिमुडा को थोड़ी जमीन दी थी, लेकिन अब उसी की आड़ में पूरे क्षेत्र की जमीन हड़पने की तैयारी की जा रही है। बीते दस वर्षों में हिमुडा ने यहां शहर बसाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, न कोई ढांचा बनाया और न ही कोई विकास कार्य किया।
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देसराज ने यह भी आरोप लगाया कि अब निजी कंपनियों के प्रतिनिधि घर-घर जाकर जमीन खरीदने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यह परियोजना किसी राष्ट्रहित से जुड़ी नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों को उजाड़कर बाहर के लोगों को बसाने की साजिश है। उन्होंने सरकार से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तत्काल बंद करने की मांग की।
बैठक में बागी पंचायत के पूर्व प्रधान मदन शास्त्री ने कहा कि एसआईए सर्वे रिपोर्ट में मंदिर, मकान, दुकान, जंगल तक के अधिग्रहण की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह सरासर अन्याय है। पंचायत के लोग पढ़े-लिखे जरूर हैं, लेकिन रोजगार के अभाव में खेती और पशुपालन ही उनकी आजीविका का साधन है। क्षेत्र से रोजाना करीब दस ट्रक सब्जियां मंडियों में भेजी जाती हैं। सिंचाई के लिए कूहलों की व्यवस्था है और ग्रामीण अपने जंगल अधिकारों के तहत पशुपालन कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईए सर्वे के दौरान ग्रामीणों की राय तक नहीं ली गई। बिना सहमति नौ गांवों की जमीन अधिग्रहित करने की योजना पूरी तरह असंवैधानिक और जनविरोधी है।

बैठक में मझोला, चनान, शिल्लीबागी, क्यारगी, पदरहाना, पंटी, शिलड़ू, दनोखरी और आंजी गांवों के ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वे अपनी जमीन नहीं बेचेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया वापस नहीं ली, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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