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Sirmour News: 64,457 के चेक मामले में आरोपी बरी, अइालत ने बैंक की शिकायत की खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी रूप सिंह को राहत देते हुए बैंक की शिकायत खारिज कर दी। अदालत ने पाया कि एनआई एक्ट के तहत दायर शिकायत समय से पहले थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट रितु सिन्हा ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को आरोप से बरी कर दिया।
मामला एचपी स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक, राजगढ़ शाखा से जुड़ा था। बैंक के अनुसार रूप सिंह को वर्ष 2021 में पैकेजिंग और ग्रेडिंग के लिए 3 लाख रुपये का ऋण दिया गया था। जुलाई 2023 तक 64,457 रुपये की बकाया राशि हो गई थी। इसके भुगतान के लिए एक चेक बैंक को दिया गया। लेकिन 5 दिसंबर 2023 को बैंक में चेक खाता बंद टिप्पणी के साथ अनादरित हो गया।
अदालत ने पाया कि नोटिस की वास्तविक डिलीवरी की तारीख रिकॉर्ड पर साबित नहीं हुई थी। इसलिए मामले में नोटिस की सेवा को लेकर कानूनी अनुमान लागू किया गया। अदालत के अनुसार 14 दिसंबर 2023 को भेजे गए नोटिस की सेवा 13 जनवरी 2024 मानी जाएगी। ऐसे में शिकायत 9 जनवरी 2024 को, यानी निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही दाखिल कर दी गई थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी शिकायत पर अदालत संज्ञान नहीं ले सकती।-- -- -- -- -
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नाहन (सिरमौर)। अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी रूप सिंह को राहत देते हुए बैंक की शिकायत खारिज कर दी। अदालत ने पाया कि एनआई एक्ट के तहत दायर शिकायत समय से पहले थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट रितु सिन्हा ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को आरोप से बरी कर दिया।
मामला एचपी स्टेट को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक, राजगढ़ शाखा से जुड़ा था। बैंक के अनुसार रूप सिंह को वर्ष 2021 में पैकेजिंग और ग्रेडिंग के लिए 3 लाख रुपये का ऋण दिया गया था। जुलाई 2023 तक 64,457 रुपये की बकाया राशि हो गई थी। इसके भुगतान के लिए एक चेक बैंक को दिया गया। लेकिन 5 दिसंबर 2023 को बैंक में चेक खाता बंद टिप्पणी के साथ अनादरित हो गया।
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अदालत ने पाया कि नोटिस की वास्तविक डिलीवरी की तारीख रिकॉर्ड पर साबित नहीं हुई थी। इसलिए मामले में नोटिस की सेवा को लेकर कानूनी अनुमान लागू किया गया। अदालत के अनुसार 14 दिसंबर 2023 को भेजे गए नोटिस की सेवा 13 जनवरी 2024 मानी जाएगी। ऐसे में शिकायत 9 जनवरी 2024 को, यानी निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही दाखिल कर दी गई थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी शिकायत पर अदालत संज्ञान नहीं ले सकती।
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