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Sirmour News: सड़क हादसे में दो लोगों मौत के मामले में आरोपी बरी
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29 सितंबर 2014 को बाईपास में हुआ था हादसा
11 साल पुराने केस में अभियोजन आरोप साबित करने में नाकाम
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे में दो लोगों की मौत के मामले में अदालत ने आरोपी यशपाल शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनाया। मामला पांवटा साहिब थाना क्षेत्र से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 29 सितंबर, 2014 को माजरा बाईपास पर एक पिकअप दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में संजय और मतीन खान की मौत हो गई थी। आरोप था कि वाहन चालक तेज और लापरवाही से वाहन चला रहा था। वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बिठाई गई थीं, जिसके चलते दुर्घटना हुई।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 304-ए और मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच के बाद अदालत में चालान पेश किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। हालांकि मुख्य प्रत्यक्षदर्शी अपने पूर्व बयान से मुकर गया, जबकि अन्य महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका।
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अदालत ने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध करने में असफल रहा है कि दुर्घटना आरोपी की लापरवाही से हुई थी। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो पाए। ऐसे में आरोपी को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने यशपाल शर्मा को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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11 साल पुराने केस में अभियोजन आरोप साबित करने में नाकाम
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे में दो लोगों की मौत के मामले में अदालत ने आरोपी यशपाल शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनाया। मामला पांवटा साहिब थाना क्षेत्र से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 29 सितंबर, 2014 को माजरा बाईपास पर एक पिकअप दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में संजय और मतीन खान की मौत हो गई थी। आरोप था कि वाहन चालक तेज और लापरवाही से वाहन चला रहा था। वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बिठाई गई थीं, जिसके चलते दुर्घटना हुई।
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पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 304-ए और मोटर वाहन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच के बाद अदालत में चालान पेश किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। हालांकि मुख्य प्रत्यक्षदर्शी अपने पूर्व बयान से मुकर गया, जबकि अन्य महत्वपूर्ण गवाहों को अदालत में पेश नहीं किया जा सका।
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अदालत ने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह सिद्ध करने में असफल रहा है कि दुर्घटना आरोपी की लापरवाही से हुई थी। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो पाए। ऐसे में आरोपी को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने यशपाल शर्मा को सभी आरोपों से बरी कर दिया।