{"_id":"5a58c88e4f1c1bdd408b46c6","slug":"91515767950-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिन बारिश-बर्फबारी बढ़ी किसान-बागवानों की मुश्किलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिन बारिश-बर्फबारी बढ़ी किसान-बागवानों की मुश्किलें
Updated Fri, 12 Jan 2018 08:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बिन बारिश-बर्फबारी बढ़ी किसान-बागवानों की मुश्किलें
स्टोन फ्रूट्स और नकदी फसलों पर पड़ रही मौसम की मार
जनवरी के दूसरे सप्ताह में बारिश न होने से ग्रामीण चिंतित
अमर उजाला ब्यूरो
नौहराधार (सिरमौर)।
जनवरी के दूसरे सप्ताह में भी बारिश व बर्फबारी न होने से बागबानों व किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोगों को आस थी कि लोहड़ी पर्व तक सिरमौर में बारिश होगी लेकिन बारिश की संभावनाएं न के बराबर नजर आने से किसानों को नकदी फसलों की चिंता सताने लगी है।
हालांकि जिला के ऊपरी क्षेत्रों में ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया है। पूरा जिला ठंड की चपेट में है। दिसंबर व जनवरी माह के दौरान होने वाली बारिश व बर्फबारी सेब सहित अन्य स्टोन फ्रूट्स के लिए संजीवनी का काम करती है।
विंटर सीजन में बारिश के साथ बर्फबारी को अन्य फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए भी लाभदायक माना जाता है। बारिश न होने से बागवान बगीचों में तोलिये व गड्डों का निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि जिला के अधिकतर क्षेत्रों में बागबानों ने प्रूनिंग का कार्य पूरा कर दिया है मगर पौधे के पास तोलिये निर्माण व पौधों को लगाने के लिए गड्डों का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं किया है।
विज्ञापन
दिसंबर माह में नाममात्र बारिश हुई थी। सीजन में भी अभी तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई हैं। मौसम की बेरुखी इस बार फसलों के उत्पादन में भारी पड़ सकती है। जिला के अधिकतर क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं हैं। जिला में 80 फीसदी बागबान व किसान इंद्रदेव के रहमोकरम पर ही आश्रित हैं।
बागवान सेब के बागानों में रासायनिक व जैविक खादों को डालने के लिए भी बारिश का इंतजार कर रहे है ताकि पौधों को पोषक तत्व मिल सकें। बागबानों द्वारा खरीदे गए नई प्रजाति के पौधे भी नहीं लगा पा रहे हैं। यही हाल किसानों का है। किसानों की नकदी फसलें लहसुन, धनिया सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। आजकल लहसुन की गुड़ाई और खाद डालने का कार्य किया जाता है लेकिन बिना नमी के यह सब कार्य मजबूरी में किसान नहीं कर पा रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी माह के दूसरे सप्ताह तक तीन बार बर्फ गिर चुकी थी।
उधर, बागबानी विभाग के विषय विशेषज्ञ उजागर सिंह तोमर ने बागवानों को सुझाव दिया कि बागीचों में बारिश के बाद ही तोलिये व गड्डों का निर्माण करें चूंकि सूखे में तोलिये व गड्डों का निर्माण होने से मौजूद नमी खत्म होने का खतरा बना रहता है जो पौधों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
-------------------
---------कपिल ठाकुर, हितेश
स्टोन फ्रूट्स और नकदी फसलों पर पड़ रही मौसम की मार
जनवरी के दूसरे सप्ताह में बारिश न होने से ग्रामीण चिंतित
अमर उजाला ब्यूरो
नौहराधार (सिरमौर)।
जनवरी के दूसरे सप्ताह में भी बारिश व बर्फबारी न होने से बागबानों व किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोगों को आस थी कि लोहड़ी पर्व तक सिरमौर में बारिश होगी लेकिन बारिश की संभावनाएं न के बराबर नजर आने से किसानों को नकदी फसलों की चिंता सताने लगी है।
हालांकि जिला के ऊपरी क्षेत्रों में ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया है। पूरा जिला ठंड की चपेट में है। दिसंबर व जनवरी माह के दौरान होने वाली बारिश व बर्फबारी सेब सहित अन्य स्टोन फ्रूट्स के लिए संजीवनी का काम करती है।
विज्ञापन
विंटर सीजन में बारिश के साथ बर्फबारी को अन्य फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए भी लाभदायक माना जाता है। बारिश न होने से बागवान बगीचों में तोलिये व गड्डों का निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि जिला के अधिकतर क्षेत्रों में बागबानों ने प्रूनिंग का कार्य पूरा कर दिया है मगर पौधे के पास तोलिये निर्माण व पौधों को लगाने के लिए गड्डों का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं किया है।
विज्ञापन
दिसंबर माह में नाममात्र बारिश हुई थी। सीजन में भी अभी तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई हैं। मौसम की बेरुखी इस बार फसलों के उत्पादन में भारी पड़ सकती है। जिला के अधिकतर क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं हैं। जिला में 80 फीसदी बागबान व किसान इंद्रदेव के रहमोकरम पर ही आश्रित हैं।
बागवान सेब के बागानों में रासायनिक व जैविक खादों को डालने के लिए भी बारिश का इंतजार कर रहे है ताकि पौधों को पोषक तत्व मिल सकें। बागबानों द्वारा खरीदे गए नई प्रजाति के पौधे भी नहीं लगा पा रहे हैं। यही हाल किसानों का है। किसानों की नकदी फसलें लहसुन, धनिया सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। आजकल लहसुन की गुड़ाई और खाद डालने का कार्य किया जाता है लेकिन बिना नमी के यह सब कार्य मजबूरी में किसान नहीं कर पा रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी माह के दूसरे सप्ताह तक तीन बार बर्फ गिर चुकी थी।
उधर, बागबानी विभाग के विषय विशेषज्ञ उजागर सिंह तोमर ने बागवानों को सुझाव दिया कि बागीचों में बारिश के बाद ही तोलिये व गड्डों का निर्माण करें चूंकि सूखे में तोलिये व गड्डों का निर्माण होने से मौजूद नमी खत्म होने का खतरा बना रहता है जो पौधों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
-------------------
---------कपिल ठाकुर, हितेश