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मोदी सरकार के खिलाफ ट्रेड यूनियनों का हल्लाबोल

Tue, 08 Jan 2019 10:26 PM IST
rajeshwar  gautam rajeshwar gautam
Updated Tue, 08 Jan 2019 10:26 PM IST
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मोदी सरकार के खिलाफ ट्रेड यूनियनों का हल्लाबोल
अमर उजाला ब्यूरो
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नाहन (सिरमौर)। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त अभियान के तहत मंगलवार को सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर गए। मजदूर, कर्मचारी और विभिन्न संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने नाहन की सड़कों पर जोरदार रैली निकालते हुए माहौल गरमा दिया। हक मिला तो काम करेंगे, वरना चक्का जाम करेंगे...,जैसे नारे लगाते हुए उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली गई। इसके बाद वहां करीब एक घंटे तक धरना-प्रदर्शन कर उपायुक्त के मार्फत प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।
राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर जिला मुख्यालय नाहन की सड़कों पर ट्रेड यूनियनों ने जमकर प्रदर्शन किया। बस स्टैंड नाहन से शुरू हुई रैली शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंची। रैली के दौरान सैकड़ों कर्मियों और मजदूरों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सीटू के बैनर तले कर्मियों और मजदूरों ने अपनी मांगों को रखा। साथ ही केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की गई। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार को कर्मचारी और मजदूर विरोधी करार दिया। उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर एवं कर्मचारी विरोधी करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि अब यह सरकार सत्ता से बाहर होने वाली है। सरकार पूंजीपत्तियों की गोद में बैठकर कार्य कर रही है। देश की सरकारी संपत्तियों को निजी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है। देश के बैंक नीलाम हो रहे हैं। अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। श्रम कानूनों को समाप्त किया जा रहा है और मजदूर विरोधी कानून बनाए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान राजेंद्र ठाकुर, महेंद्र सिंह काहलो, सुभाष शर्मा, रमजान मोहम्मद, लाल सिंह, आशीष कुमार, बीना शर्मा, नीलम शर्मा, राजपाल, जागर सिंह कपूर, अंजू, ममता, ब्लू स्टार से चरण ठाकुर, पुरुषोत्तम सिंह, रजवान, अमित शर्मा, हेम चंद, बंसी, प्रदीप राणा आदि भी मौजूद रहे।
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ये हैं ट्रेड यूनियन की मांगें
1. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए मजदूरों का मासिक वेतन 18000 कर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ जोड़ा जाए।
2. ठेकेदारी प्रथा और आउटसोर्स प्रणाली को खत्म कर मजदूरों को पक्का रोजगार दिया जाए। अदालत के फैसले के अनुसार समान काम का समान वेतन दिया जाए।
3. श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन वापस लेकर मार्च 2018 में फिक्सड टर्म रोजगार की अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए।
4. केंद्र सरकार महंगाई को रोकने में तत्काल कदम उठाए। अनाज व अन्य खाद्य वस्तुओं में सट्टाबाजार की नीति बंद कर पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और वैट कम किया जाए।
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5. आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर को तृतीय श्रेणी का कर्मचारी बनाकर हरियाणा पेंशन का लाभ देकर हरियाणा की तर्ज पर वेतन दिया जाए।
6. सभी मजदूरों को पेंशन सुविधा दी जाए। वर्ष 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नीति के दायरे में लाया जाए।
7. मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित परिवहन मजदूर और मालिक विरोधी धाराओं को वापस लिया जाए।
8. मनरेगा मजदूरों को 120 दिन काम दिया जाए और न्यूनतम वेतन दिया जाए। काम मांगने पर उसकी रसीद देने का भी प्रावधान किया जाए।
9. सार्वजनिक क्षेत्र जैसे बैंक, बीमा, बीएनएनएल, रक्षा, बिजली, रेलवे आदि का विनिवेश व निजीकरण न किया जाए।
10. स्ट्रीट वैंडरज एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए।
11. सभी मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा जैसे भविष्य निधि, ईएसआई, चिकित्सा लाभ, दुर्घटना, ग्रेच्युटी व पेंशन लाभ के दायरे में लाया जाए।
12. औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को कारखाना मालिकों द्वारा आवास सुविधा मुहैया करवाई जाए अन्यथा राज्य सरकार मजदूरों के लिए कालोनियों का निर्माण करे।
13. यूनियनों को पंजीकरण सरल किया जाए व एक महीने के अंदर यूनियन का पंजीकरण किया जाए।
14. निर्माण मजदूरों का सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण सरल किया जाए।
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